दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले में उमर ख़ालिद को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा, अमेरिकी सांसदों की भारत से अपील
उफ़क साहिल
वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित मामलों को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इन मामलों में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ता और पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर ख़ालिद का प्रकरण अब भारत के बाहर भी चर्चा में है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें सितंबर 2020 में कथित साज़िश के आरोपों में गिरफ्तार किया था। उन पर दंगा, आपराधिक साज़िश, गैरकानूनी जमावड़ा और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत केस दर्ज हैं। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है।
इसी बीच, अमेरिका के आठ सांसदों ने भारत के अमेरिका स्थित राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में सांसदों ने उमर ख़ालिद को ज़मानत दिए जाने और मामले में निष्पक्ष तथा पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में न्याय प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
पत्र में सांसदों ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और स्वतंत्र न्यायपालिका का उल्लेख करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया को लोकतंत्र की नींव बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक किसी आरोपी को विचाराधीन हिरासत में रखना मानवाधिकारों से जुड़ी गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि, इस पत्र पर अब तक भारत सरकार या भारतीय दूतावास की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। देश के भीतर उमर ख़ालिद का मामला लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है। जहां जांच एजेंसियां आरोपों को गंभीर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बता रही हैं, वहीं उनके समर्थक और मानवाधिकार संगठन हिरासत की अवधि और मुकदमे में हो रही देरी पर सवाल उठा रहे हैं।
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