दिल्ली में आवारा कुत्तों की गिनती के लिए शिक्षकों की ड्यूटी तय, आदेश पर शिक्षक संगठनों की आपत्ति
दिल्ली में आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों में विशेष सर्वे कराने का निर्देश दिया है। इस सर्वे के तहत स्कूल शिक्षकों को क्षेत्रवार गिनती के कार्य में लगाया जाएगा। आदेश के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी इस अभियान के नोडल अधिकारी होंगे और शिक्षकों की तैनाती की जिम्मेदारी संभालेंगे। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस फैसले से स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जबकि शिक्षा विभाग का तर्क है कि यह सीमित अवधि का जनहित से जुड़ा कार्य है। फिलहाल इस आदेश को लेकर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
नवीदुल हसन
दिल्ली में आवारा कुत्तों की गिनती के लिए शिक्षकों की ड्यूटी तय, आदेश पर शिक्षा जगत में उठा सवाल
दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर सरकार ने एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय ने राजधानी में आवारा कुत्तों की गिनती कराने के लिए सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिला शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने और चयनित शिक्षकों का विवरण शिक्षा विभाग को भेजने को कहा गया है। आदेश सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों की ओर से इस फैसले पर आपत्ति जताई गई है।
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि दिल्ली के सभी जिलों में एक विशेष अभियान के तहत आवारा कुत्तों की संख्या का आकलन किया जाएगा। इसके लिए स्कूल शिक्षकों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जो मौके पर जाकर कुत्तों की गिनती करेंगे और संबंधित प्राधिकरण को रिपोर्ट सौंपेंगे। यह पूरी प्रक्रिया जिला स्तर पर संचालित की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका तय
आदेश के अनुसार, प्रत्येक जिले में जिला शिक्षा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह शिक्षकों की तैनाती, सर्वे के समय और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को समन्वित तरीके से पूरा कराए। इसके अलावा सरकारी और निजी स्कूलों से ऐसे शिक्षकों की सूची मांगी गई है, जिन्हें इस कार्य में लगाया जाएगा।
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस सर्वे से राजधानी में आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या सामने आएगी, जिससे आगे की योजनाओं को लागू करने में सहूलियत होगी। विभाग के मुताबिक, अब तक अलग-अलग एजेंसियों के पास उपलब्ध आंकड़ों में अंतर देखा गया है, इसलिए एक समन्वित सर्वे की जरूरत महसूस की गई।
शिक्षक संगठनों की आपत्ति
आदेश जारी होते ही शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आई है। संगठनों ने कहा है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि शिक्षकों पर पहले से ही प्रशासनिक और अन्य विभागीय कार्यों का बोझ है, जिसमें चुनाव ड्यूटी, सर्वे और रिपोर्टिंग जैसे काम शामिल हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस तरह के कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से कक्षाओं का नियमित संचालन बाधित हो सकता है। संगठनों ने इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की है और कहा है कि इस कार्य के लिए किसी अन्य विभाग या एजेंसी की सेवाएं ली जानी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंता
शिक्षक संगठनों के अनुसार, कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की संख्या सीमित है। ऐसे में यदि शिक्षकों को बाहर के सर्वे कार्यों में लगाया जाता है, तो स्कूलों में कक्षाओं के संचालन और शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ सकता है। संगठनों का यह भी कहना है कि इस तरह के आदेश शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सर्वे का कार्य सीमित अवधि के लिए है और इसे इस तरह से आयोजित किया जाएगा कि स्कूलों की नियमित गतिविधियां न्यूनतम रूप से प्रभावित हों।
सरकार का पक्ष
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या से जुड़े मामलों में सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, सही आंकड़े सामने आने के बाद ही नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण से जुड़े कार्यक्रमों की प्रभावी योजना बनाई जा सकती है।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि शिक्षकों को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर क्षेत्रों को बेहतर तरीके से समझते हैं और सर्वे कार्य को व्यवस्थित रूप से पूरा कर सकते हैं। विभाग का दावा है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
दिल्ली में आवारा कुत्तों का मुद्दा
दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या और उससे जुड़ी घटनाएं समय-समय पर चर्चा में रही हैं। कई इलाकों में कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। वहीं पशु कल्याण से जुड़े संगठन भी इस मुद्दे पर सक्रिय रहते हैं और मानवीय तरीके से समाधान की मांग करते हैं।
सरकार का मानना है कि आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या सामने आने के बाद ही संतुलित और प्रभावी नीति तैयार की जा सकती है। इसी उद्देश्य से यह सर्वे कराया जा रहा है।
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