तेजप्रताप यादव ने परिवार को दिया दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण, राबड़ी देवी के आवास पर पहुंचे
तेजप्रताप यादव मकर संक्रांति के अवसर पर राबड़ी देवी के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण पत्र सौंपा। दही-चूड़ा बिहार की सांस्कृतिक पहचान है और इसे आपसी भाईचारे व शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता है। इस मुलाकात को राजद ने निजी और पारिवारिक कार्यक्रम बताया, जिसका राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं है।
नवीदुल हसन
तेजप्रताप यादव ने परिवार को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया, राबड़ी देवी के आवास पर पहुंचे
पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास 10 सर्कुलर रोड पहुंचे। यह मुलाकात पूरी तरह पारिवारिक और सादगी भरी रही। तेजप्रताप यादव ने इस मौके पर अपने पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव को पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का औपचारिक निमंत्रण दिया।
दही-चूड़ा बिहार की संस्कृति और परंपरा का एक अहम हिस्सा माना जाता है। खासकर मकर संक्रांति के अवसर पर इसका विशेष महत्व होता है। इस पर्व पर लोग दही, चूड़ा, गुड़ और तिल से बने व्यंजन खाते हैं और आपसी भाईचारे तथा खुशहाली की कामना करते हैं। तेजप्रताप यादव द्वारा दिया गया यह निमंत्रण भी इसी परंपरा से जुड़ा हुआ है।
मुलाकात के दौरान तेजप्रताप यादव ने अपने माता-पिता से आशीर्वाद लिया और परिवार के अन्य सदस्यों से भी बातचीत की। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि तेजप्रताप यादव अपने परिवार के सदस्यों को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण पत्र सौंपते नजर आ रहे हैं। राबड़ी देवी आराम से कुर्सी पर बैठी दिखीं, जबकि तेजप्रताप उनके पास खड़े होकर निमंत्रण देते हुए मुस्कुरा रहे हैं। अन्य तस्वीरों में तेजप्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी नजर आए।
इस पारिवारिक मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हल्की चर्चा देखने को मिली, लेकिन राजद की ओर से इसे पूरी तरह निजी और पारिवारिक कार्यक्रम बताया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मुलाकात किसी भी राजनीतिक संदेश से जुड़ी नहीं है, बल्कि त्योहार के मौके पर परिवार के बीच आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है।
तेजप्रताप यादव अक्सर अपने अलग अंदाज और पारंपरिक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं। वह समय-समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लेते रहते हैं। इस बार दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण देकर उन्होंने एक बार फिर यह दिखाया कि वे अपनी जड़ों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।
लालू परिवार में इस तरह की मुलाकातें त्योहारों के दौरान आम मानी जाती हैं। मकर संक्रांति जैसे पर्व पर परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और पुराने मतभेदों को भुलाकर आगे बढ़ने का संदेश देते हैं। तेजप्रताप यादव का यह कदम भी परिवार की एकता और आपसी रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
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