अचानक निरीक्षण में खुली बड़ी खामियां, एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज की अनुमति वापस ली
MARB द्वारा किए गए बिना पूर्व सूचना निरीक्षण में मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी, मरीजों की संख्या कम होने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसे गंभीर उल्लंघन सामने आए। इसके बाद एनएमसी ने कॉलेज की लेटर ऑफ परमिशन वापस लेते हुए बैंक गारंटी जब्त करने का फैसला किया, जबकि छात्रों को अन्य कॉलेजों में एडजस्ट करने का निर्देश दिया गया।
नवीदुल हसन
अचानक निरीक्षण में गंभीर खामियां, एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द की
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) को बिना पहले बताए मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण करने का अधिकार है। इसी अधिकार के तहत MARB की एक टीम ने 2 जनवरी 2026 को संबंधित मेडिकल कॉलेज का अचानक निरीक्षण किया। इसी निरीक्षण के आधार पर कॉलेज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
निरीक्षण रिपोर्ट में कॉलेज में गंभीर कमियां पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या तय मानकों से 39 प्रतिशत कम थी। वहीं, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट की कमी 65 प्रतिशत तक पाई गई।
मरीजों की संख्या भी बेहद कम थी। दोपहर 1 बजे ओपीडी में केवल 182 मरीज मौजूद थे, जबकि मानक के अनुसार यह संख्या 400 होनी चाहिए थी। अस्पताल में बेड ऑक्यूपेंसी सिर्फ 45 प्रतिशत थी, जबकि जरूरी स्तर 80 प्रतिशत है। आईसीयू में भी औसतन केवल 50 प्रतिशत बेड भरे हुए थे। इसके अलावा, हर महीने औसतन सिर्फ 25 डिलीवरी हो रही थीं, जिसे MARB ने “बेहद गंभीर कमी” बताया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ विभागों में छात्रों की प्रैक्टिकल लैब और रिसर्च लैब मौजूद ही नहीं थीं। लेक्चर थिएटर न्यूनतम मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। लाइब्रेरी में जहां 1,500 किताबें होनी चाहिए थीं, वहां सिर्फ 744 किताबें मिलीं। जर्नल्स की संख्या भी तय 15 की जगह केवल 2 पाई गई।
इसके अलावा कॉलेज में ART सेंटर, एमडीआर-टीबी के इलाज की सुविधा, और कई विभागों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। कुछ वार्डों में पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग-अलग व्यवस्था तक नहीं थी। अस्पताल में केवल 2 ऑपरेशन थिएटर चालू थे, जबकि मानक के अनुसार 5 ओटी होने चाहिए थे। ओपीडी में माइनर ओटी भी नहीं था और पैराक्लिनिकल विषयों से जुड़ा उपकरण भी अपर्याप्त पाया गया।
MARB ने मेडिकल संस्थानों से जुड़े नियमों के तहत इन कमियों को गंभीर उल्लंघन माना। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि कॉलेज UGMSR-2023 के तहत तय न्यूनतम मानकों को पूरा करने में असफल रहा है।
इसके बाद NMC चेयरमैन की मंजूरी से MARB ने कॉलेज को दी गई लेटर ऑफ परमिशन (LoP), जो 8 सितंबर 2025 को जारी की गई थी, उसे तुरंत प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया। साथ ही कॉलेज द्वारा जमा की गई परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को भी जब्त करने का निर्णय लिया गया।
हालांकि, इस आदेश में छात्रों के हितों की सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में दाखिला ले चुके सभी छात्रों की सीटें सुरक्षित रहेंगी। इन छात्रों को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेरेरी सीटों पर एडजस्ट किया जाएगा। यानी किसी भी छात्र का एमबीबीएस में दाखिला रद्द नहीं होगा।
छात्रों के स्थानांतरण की जिम्मेदारी यूटी सरकार के स्वास्थ्य और काउंसलिंग अधिकारियों की होगी, जिन्हें इस आदेश की जानकारी दे दी गई है।
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