देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी?” सेंगर को जमानत पर उन्नाव पीड़िता का सवाल
सबा फिरदौस
2017 के उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता ने कहा है कि कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद वह और उनका परिवार खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। पीड़िता का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने उनकी चिंता और डर को और बढ़ा दिया है। उन्होंने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।
अदालत के फैसले के विरोध में पीड़िता ने अपनी मां और वकील योगिता भायना के साथ मंगलवार शाम मंडी हाउस के पास और बाद में इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। पीड़िता ने कहा कि सुनवाई के बाद वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई थीं और उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार भी आए, लेकिन परिवार की खातिर उन्होंने ऐसा कदम नहीं उठाया।
पीड़िता ने बुधवार (24 दिसंबर 2025) को कहा कि भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जेल की सजा को निलंबित किया जाना उनके परिवार के लिए “काल (मौत)” के समान है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (23 दिसंबर 2025) को सेंगर की उम्रकैद की सजा पर फिलहाल रोक लगाते हुए, उनकी अपील के निपटारे तक उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2019 में उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि सेंगर पीड़िता के निवास स्थान से पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं आएंगे और न ही पीड़िता या उसकी मां को किसी प्रकार से धमकाएंगे। शर्तों के उल्लंघन पर जमानत स्वतः रद्द हो जाएगी।
हालांकि, इस आदेश के बावजूद कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे, क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें 10 साल की सजा मिली हुई है और उस केस में उन्हें अभी जमानत नहीं दी गई है।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीड़िता, जो 2017 में घटना के समय नाबालिग थीं, ने दिल्ली से फोन पर पीटीआई को बताया कि उनके परिवार, वकीलों और गवाहों की सुरक्षा पहले ही हटा ली गई है। उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले से उनका डर और असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है।
पीड़िता ने कहा, “अगर ऐसे गंभीर मामलों में दोषियों को जमानत मिलती रहेगी, तो देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी? हमारे लिए यह फैसला ‘काल’ से कम नहीं है।
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