अखलाक लिंचिंग केस: 10 साल बाद भी न्याय का इंतज़ार, केस वापसी की कोशिश पर कोर्ट ने लगाई रोक।
28 सितंबर 2015 को दादरी के बिसाहड़ा गांव में हुए अखलाक मॉब लिंचिंग मामले को दस साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह अब भी अधूरी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मामला वापस लेने की कोशिश पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर कोर्ट ने सरकार की उस अर्जी को नामंजूर कर दिया ।
सबा फ़िरदौस
ग्रेटर नोएडा: 28 सितंबर 2015 को दादरी के बिसाहड़ा गांव में हुए अखलाक मॉब लिंचिंग मामले को दस साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन पीड़ित परिवार के लिए न्याय की राह अब भी अधूरी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मामला वापस लेने की कोशिश पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर कोर्ट ने सरकार की उस अर्जी को नामंजूर कर दिया, जिसमें आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने इसे निरर्थक और आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद यह साफ़ हो गया है कि अखलाक हत्याकांड से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अपने निर्धारित क्रम में जारी रहेगी।
उधर, अखलाक की पत्नी इकरामन, जो पिछले दस वर्षों से बिसाहड़ा गांव नहीं लौटी हैं, का कहना है कि वे अब भी इंसाफ का इंतज़ार कर रही हैं। घटना के दौरान उनके छोटे बेटे दानिश गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिवार का कहना है कि यदि सरकार की केस वापसी की मांग को कहीं से भी मंजूरी मिलती, तो वे इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देते।
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