एक युग का अंत: डॉ. सैयद शाहिद महदी अब हमारे बीच नहीं
डॉ. सैयद शाहिद महदी एक प्रतिष्ठित IAS अधिकारी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व कुलपति और उर्दू साहित्य प्रेमी थे। उन्होंने लोक प्रशासन और शिक्षा के क्षेत्र में अमिट योगदान दिया। एएमयू के छात्र और संकाय सदस्य रहे, उन्होंने विश्व खाद्य संगठन जैसे मंच पर भी सेवाएँ दीं। जामिया और हमदर्द विश्वविद्यालय में उनके नेतृत्व ने शिक्षा को नई दिशा दी। सरल, सच्चे और दूरदर्शी, उनकी बातें, अनुभव और मार्गदर्शन हमेशा याद रहेंगे।
सबा फ़िरदौस
सैयद शाहिद महदी भारत के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में से थे, जिन्होंने लोक प्रशासन और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। वे एक प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे और साथ ही जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व कुलपति के रूप में उन्होंने शैक्षणिक जगत को नई दिशा दी।
डॉ. सैयद शाहिद महदी 1963 बैच के IAS अधिकारी थे। उन्होंने बिहार सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्रालय सहित कई अहम पदों पर रहकर देश की निस्वार्थ सेवा की। वे ईमानदारी, सादगी और दूरदर्शिता के प्रतीक थे। उनके निर्णयों में हमेशा मानवता और न्याय की झलक दिखाई देती थी।
वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के गौरवशाली छात्र रहे और बाद में वहीं संकाय सदस्य के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को दिशा दी। शिक्षा से उनका रिश्ता केवल पेशे का नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा हुआ था। यही कारण रहा कि उन्होंने विश्व खाद्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी काम कर मानव कल्याण से जुड़े विषयों पर अपनी सेवाएँ दीं।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति के रूप में डॉ. महदी ने विश्वविद्यालय को न सिर्फ़ आगे बढ़ाया, बल्कि उसे एक संवेदनशील और आधुनिक शैक्षणिक संस्थान के रूप में मजबूत पहचान दी। उनके कार्यकाल को आज भी विकास और संतुलन के दौर के रूप में याद किया जाता है।
वे हमदर्द पब्लिक स्कूल की स्थापना से जुड़े रहे और हमदर्द विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में योगदान दिया। उनका विश्वास था कि शिक्षा समाज को बेहतर बनाने की सबसे बड़ी ताकत है।
डॉ. सैयद शाहिद महदी उर्दू साहित्य के सच्चे प्रेमी थे। उन्हें किताबों, कॉफी और बातचीत से विशेष लगाव था। वे मानते थे कि अजनबियों से संवाद भी जीवन की सबसे सुंदर सीख दे सकता है। उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उनकी सरलता, मुस्कान और अनुभवों से भरी बातों को हमेशा याद रखता है।
सर सैयद अहमद खान की द्विशताब्दी समारोह के अवसर पर वे एक सम्मानित वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। अपने संबोधन में उन्होंने सर सैयद के शैक्षिक मिशन, आधुनिक शिक्षा की ज़रूरत और संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी पर दिल से बात की, जो आज भी लोगों को प्रेरित करती है।
डॉ. सैयद शाहिद महदी का पूरा जीवन ज्ञान, संवाद और राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा। उनके निधन से एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, शिक्षक और संवेदनशील इंसान हमसे बिछड़ गया है। उनकी सोच, उनके शब्द और उनके कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए रोशनी बने रहेंगे।
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