बांग्लादेश में हिंदू युवकों की लिंचिंग से हड़कंप, अल्पसंख्यक सुरक्षा पर सवाल
बांग्लादेश में हिंदू युवकों की लिंचिंग से दो मौतों के बाद अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ी है। भारत ने घटना की निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शाइस्ता आज़मी
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के युवकों के साथ हुई भीड़ हिंसा (लिंचिंग) की घटनाओं ने देश विदेश में चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में सामने आए मामलों में दो हिंदू युवकों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें से एक की मौत कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक पर कथित ईशनिंदा का आरोप लगाकर स्थानीय लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। युवक को गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।
इसके बाद एक अन्य जिले से भी दूसरे हिंदू युवक की हत्या की खबर सामने आई, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बन गया।पुलिस ने बताया कि दोनों मामलों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। बांग्लादेशी प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।भारत सरकार ने इन घटनाओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत गंभीर रूप से चिंतित है और इस तरह की हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत ने बांग्लादेश सरकार से दोषियों को सख्त सजा देने और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।बांग्लादेश सरकार ने इन घटनाओं को “अलग-थलग आपराधिक मामले” बताया है। सरकार का कहना है कि देश में किसी भी समुदाय के खिलाफ संगठित हिंसा नहीं हो रही और कानून सभी के लिए समान है।
हालाँकि, मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।इन घटनाओं के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल है। वहीं भारत में कई सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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