ट्रंप की धमकियां: कूटनीति के बीच भी ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा क्यों बना हुआ है?
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान चर्चा में हैं। कभी सख्त धमकी तो कभी नरम रुख अपनाने वाले ट्रंप पहले भी ऐसे समय पर सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं, जब बातचीत चल रही थी। वेनेजुएला और ईरान पर पहले हुए हमलों के उदाहरण बताते हैं कि कूटनीति के बावजूद अमेरिका हमला कर सकता है। इसी वजह से ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका अब भी बनी हुई है।
नवीदुल हसन
ट्रंप की चेतावनियां: ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा क्यों अब भी बना हुआ है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते कई दिनों तक ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए वहां हमला करने की धमकी दी। हालांकि बुधवार शाम उन्होंने अपने तेवर कुछ नरम किए और कहा कि ईरान में हत्याएं रुक गई हैं और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं दी जाएगी।
इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान पर हमले की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है। उनके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए माना जा रहा है कि अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
वेनेजुएला का मामला
पिछले साल अमेरिका ने कैरेबियन सागर में दशकों की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की थी। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ड्रग्स ले जा रही 30 से ज्यादा नावों पर हमला किया, जिसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए। ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर ड्रग तस्करी के आरोप लगाए।
हालांकि नवंबर में ट्रंप और मादुरो के बीच बातचीत हुई और दोनों देशों के बीच बातचीत के संकेत मिले। मादुरो ने अमेरिका को तेल और ड्रग तस्करी पर सहयोग की पेशकश भी की। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना ने कराकस में कार्रवाई कर मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया।
जून में भी ऐसा ही हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। ट्रंप ने खुद कहा था कि उनकी सरकार कूटनीतिक समाधान चाहती है।
लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिका के सहयोगी इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर भारी बमबारी की। इस हमले ने दुनिया को चौंका दिया क्योंकि उससे पहले कूटनीति की बात की जा रही थी।
ईरान में पिछले दो हफ्तों से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें हालात हिंसक हो गए थे। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की थी और कहा था कि “मदद आ रही है।”
लेकिन 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुक गई हैं और फांसी नहीं दी जाएगी।
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