अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान
खुशबू खातून
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता और हर कोई हर पीठ का अधिकारी नहीं हो सकता।”
मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य पद कोई सामान्य पद नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत सम्मानित और परंपरागत धार्मिक पद है, जिसकी अपनी मर्यादा, नियम और परंपरा होती है। उन्होंने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित पीठों की व्यवस्था एक निश्चित प्रक्रिया से चलती है और उसी प्रक्रिया के अनुसार किसी व्यक्ति को शंकराचार्य घोषित किया जाता है।
सीएम योगी ने कहा कि शंकराचार्य बनने के लिए व्यक्ति का चयन उसके आचरण, ज्ञान, संस्कार और परंपरा के अनुसार होता है। आज की भाषा में कहा जाए तो शंकराचार्य पद पर वही व्यक्ति आसीन हो सकता है, जिसे शास्त्रों और परंपरा के अनुरूप मान्यता मिले।
उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक के बाद ही किसी को मान्यता मिलती है और परंपरा के तहत ही उसे स्वीकार किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए संकेतों में कहा कि हाल के दिनों में कुछ मामलों ने धार्मिक वातावरण को प्रभावित करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा,
“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता, हर व्यक्ति हर पीठ के लिए उपयुक्त नहीं होता। और न ही हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह धार्मिक मर्यादाओं को तोड़कर माहौल खराब करे।”
सीएम योगी ने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश में शांति, व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द बना रहे। किसी भी तरह से परंपराओं को तोड़ने या विवाद फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाल के दिनों में शंकराचार्य पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद चर्चा में रहा है। इस विवाद ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस को जन्म दिया, जिस पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान सामने आया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान संकेत देता है कि सरकार धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने साफ कर दिया कि शंकराचार्य पद की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है
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