तेलंगाना हाईकोर्ट ने इंजीनियरिंग कॉलेजों की बकाया ट्यूशन फीस पर मांगा सरकार से जवाब
तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इंजीनियरिंग कॉलेजों को देय ट्यूशन फीस और स्कॉलरशिप की बकाया राशि का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि करीब 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित है, जिससे कॉलेजों को वेतन और अन्य खर्चों में परेशानी हो रही है।
नवीदुल हसन
तेलंगाना हाईकोर्ट ने इंजीनियरिंग कॉलेजों की बकाया फीस पर सरकार से मांगा हिसाब
Telangana High Court ने राज्य सरकार से इंजीनियरिंग कॉलेजों को दी जाने वाली स्कॉलरशिप और ट्यूशन फीस की बकाया राशि का पूरा ब्यौरा पेश करने को कहा है। अदालत ने यह निर्देश मंगलवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सरकार ने करीब 1,500 करोड़ रुपये की फीस लंबे समय से जारी नहीं की है।
न्यायमूर्ति ईवी वेणुगोपाल इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। याचिका में कहा गया है कि सरकार की लापरवाही और देरी के कारण कई इंजीनियरिंग कॉलेजों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
केशव मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एल. रविचंदर ने अदालत में दलील दी कि अगर इतनी बड़ी रकम किसी निजी व्यक्ति पर बकाया होती, तो अदालत सख्त कार्रवाई करती। उन्होंने कहा कि सरकार ने भुगतान के लिए ‘टोकन’ जारी कर दिए थे, लेकिन पांच साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कॉलेजों को पैसा नहीं मिला है।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सरकार की योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (BC) के छात्रों की ट्यूशन फीस सीधे कॉलेजों को दी जाती है। लेकिन यह भुगतान भी लंबे समय से लंबित है।
केशव मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का दावा है कि सरकार पर उसके 56 करोड़ रुपये बकाया हैं। वकील ने यह भी बताया कि वर्ष 2024 में सरकार ने लगभग 1,500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
वकील ने कहा कि बजट की मंजूरी मिलने के बाद भी राशि जारी न करना गंभीर लापरवाही और गड़बड़ी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेजों को अपने शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों का वेतन देना होता है, साथ ही भविष्य निधि (PF) जैसे कानूनी भुगतान भी करने होते हैं। फीस न मिलने से कॉलेजों का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जानकारी देने को कहा है। अब अगली सुनवाई में सरकार को यह बताना होगा कि कितनी राशि बकाया है और उसे कब तक जारी किया जाएगा।
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