erer | Source: ereनई दिल्ली। आधी रात को अचानक दांत या जबड़े में तेज दर्द शुरू हो जाए और डॉक्टर तक पहुंचना संभव न हो, तो राहत के लिए लोग अक्सर घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इनमें लौंग का नाम सबसे पहले लिया जाता है। दादी-नानी के समय से दांत दर्द में लौंग का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई दर्द को कम कर सकती है या फिर इसका असर केवल कुछ समय तक ही रहता है?

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आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, लौंग में मौजूद यूजेनॉल नामक प्राकृतिक यौगिक इसके दर्द कम करने और सूजन से जुड़े प्रभावों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, लौंग से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन इसे दांत के संक्रमण या किसी गंभीर दंत समस्या का स्थायी इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

लौंग में ऐसा क्या है जो दांत के दर्द में राहत दे सकता है?

लौंग में यूजेनॉल प्रमुख बायोएक्टिव कंपाउंड के रूप में मौजूद होता है। इसी वजह से लौंग और उससे तैयार तेल का इस्तेमाल लंबे समय से मुंह और दांतों से जुड़ी कुछ तकलीफों में किया जाता रहा है।

आयुर्वेद में लौंग को कफ-वात शामक और दुर्गंध नाशक गुणों वाला माना जाता है। वहीं आधुनिक संदर्भ में यूजेनॉल के दर्द कम करने, सूजन घटाने और कुछ प्रकार के बैक्टीरिया पर प्रभाव डालने वाले गुणों का अध्ययन किया गया है। इसी कारण दांत में अचानक होने वाले दर्द के दौरान लौंग से कुछ समय के लिए राहत महसूस हो सकती है।

दर्द के साथ सूजन पर भी असर डाल सकता है यूजेनॉल

यूजेनॉल को केवल दर्द से राहत से जोड़कर नहीं देखा जाता। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर भी अध्ययन हुए हैं। दंत चिकित्सा में भी यूजेनॉल आधारित कुछ सामग्रियों का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किया जाता है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि घर पर लौंग लगाने से दांत का संक्रमण खत्म हो जाएगा। अगर दांत में कैविटी, पस, मसूड़ों का गंभीर संक्रमण या नस से जुड़ी समस्या है, तो मूल कारण का उपचार दंत चिकित्सक से कराना जरूरी होता है।

साबुत लौंग और लौंग के तेल में जमीन-आसमान का अंतर

दांत दर्द के लिए साबुत लौंग और लौंग के एसेंशियल ऑयल को एक जैसा समझना सही नहीं है। एसेंशियल ऑयल अत्यधिक केंद्रित होता है, इसलिए इसे सीधे मसूड़ों या मुंह के अंदर लगाने से जलन और टिश्यू को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

साबुत लौंग की तुलना में तेल का प्रभाव अधिक तीव्र हो सकता है, लेकिन इसी वजह से इसके इस्तेमाल में सावधानी भी ज्यादा जरूरी है। खासकर बिना पतला किया हुआ लौंग का तेल सीधे मसूड़ों पर लगाने से बचना चाहिए।

लौंग का इस्तेमाल करते समय ये गलती बिल्कुल न करें

घरेलू उपाय के तौर पर लौंग का इस्तेमाल करते समय सबसे बड़ी सावधानी इसकी मात्रा और तेल के इस्तेमाल को लेकर है। शुद्ध लौंग का एसेंशियल ऑयल सीधे मुंह के अंदर लगाने से जलन, लालिमा या टिश्यू को नुकसान हो सकता है।

अगर कोई व्यक्ति लौंग के तेल का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे उपयुक्त कैरियर ऑयल में पर्याप्त मात्रा में पतला करना चाहिए। इसके बावजूद संवेदनशील मसूड़ों, मुंह में घाव या किसी अन्य समस्या वाले व्यक्ति को बिना विशेषज्ञ की सलाह के प्रयोग करने से बचना बेहतर है।

दांत दर्द में कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी?

लौंग से थोड़ी देर के लिए दर्द कम महसूस होने का मतलब यह नहीं है कि दांत की समस्या खत्म हो गई। लगातार दर्द, चेहरे या मसूड़ों में सूजन, पस, बुखार, मुंह खोलने में परेशानी या निगलने में दिक्कत जैसे लक्षण गंभीर संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय जल्द से जल्द डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए। खासकर रात में अचानक बहुत तेज दर्द हो और दर्द लगातार बना रहे, तो अगले दिन तक इंतजार करने के बजाय चिकित्सा सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

आयुर्वेद में लौंग का इस्तेमाल पुराना, लेकिन इलाज का विकल्प नहीं

लौंग का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से होता आया है। इसमें मौजूद यूजेनॉल के कारण आधुनिक दंत चिकित्सा में भी इससे जुड़े कुछ यौगिकों का उपयोग विशेष उपचार सामग्री में किया जाता है।

फिर भी किसी भी घरेलू उपाय को दांतों की बीमारी का पूर्ण उपचार मानना सही नहीं होगा। लौंग का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर अस्थायी राहत के लिए किया जा सकता है, लेकिन दांत में दर्द की असली वजह जानना और उसका उचित उपचार कराना सबसे महत्वपूर्ण है।