विटामिन D को अक्सर सिर्फ हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन शरीर में इसकी कमी होने पर मांसपेशियों और रोजमर्रा की ऊर्जा पर भी असर पड़ सकता है। लगातार थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डियों में दर्द जैसी परेशानियां इसके संभावित संकेतों में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में विटामिन D की कमी की पुष्टि नहीं करता।
फिजिशियन डॉक्टर कुणाल सूद ने शरीर में विटामिन D की कमी से जुड़े पांच सामान्य संकेतों के बारे में बताया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए लगातार परेशानी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
1. हड्डियों में लगातार दर्द हो तो रहें सावधान
शरीर में विटामिन D की गंभीर कमी होने पर हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में हड्डियों में गहरा दर्द या छूने पर अधिक संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। यह परेशानी विशेष रूप से कमर के निचले हिस्से, कूल्हों और पैरों में महसूस होने की बात बताई गई है।
हालांकि, हड्डियों में दर्द को केवल विटामिन D की कमी से जोड़ना सही नहीं होगा। चोट, मांसपेशियों की समस्या, हड्डियों से संबंधित अन्य स्थितियां या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी दर्द का कारण बन सकती हैं। इसलिए लगातार दर्द होने पर चिकित्सक से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है।
2. सीढ़ियां चढ़ने या कुर्सी से उठने में कमजोरी
विटामिन D की कमी का असर मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है। खासकर कूल्हों और जांघों के आसपास की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है। रोजमर्रा के काम करते समय इसका असर अधिक स्पष्ट नजर आ सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को पहले की तुलना में सीढ़ियां चढ़ने में ज्यादा परेशानी होने लगे या नीचे रखी कुर्सी से उठने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़े, तो यह मांसपेशियों की कमजोरी का संकेत हो सकता है। फिर भी हर तरह की मांसपेशीय कमजोरी का कारण विटामिन D की कमी नहीं होती।
3. पर्याप्त नींद के बाद भी बनी रहे थकान
दिनभर काम करने के बाद थकान होना सामान्य है, लेकिन पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस होना ध्यान देने योग्य स्थिति हो सकती है। विटामिन D का कम स्तर थकान से जुड़ा हो सकता है और इसके साथ मांसपेशियों की कमजोरी तथा दर्द जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं।
हालांकि, लगातार थकान के पीछे नींद की कमी, तनाव, खून की कमी, थायरॉयड से जुड़ी समस्या, पोषण की कमी या कई अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल थकान के आधार पर विटामिन D की कमी मानकर सप्लीमेंट शुरू करना उचित नहीं है।
4. मूड में बदलाव और उदासी भी हो सकती है निशानी
विटामिन D और मूड के बीच संबंध को लेकर भी अध्ययन और चिकित्सकीय चर्चा होती रही है। डॉक्टर कुणाल सूद के अनुसार, शरीर में विटामिन D का स्तर कम होने पर कुछ लोगों में उदासी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
लेकिन विटामिन D की कमी को सीधे अवसाद का कारण मानना सही नहीं होगा। लंबे समय तक उदासी, रुचि में कमी या मूड से जुड़ी परेशानी बनी रहे तो इसके कई कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।
5. मामूली चोट में फ्रैक्चर का खतरा
लंबे समय तक विटामिन D की गंभीर कमी रहने पर हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है। हड्डियां कमजोर होने की स्थिति में सामान्य दबाव या मामूली चोट से भी नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है।
लेकिन हर फ्रैक्चर को विटामिन D की कमी से जोड़ना सही नहीं है। हड्डियों की कमजोरी, अत्यधिक शारीरिक गतिविधि, कुछ दवाओं का इस्तेमाल या हड्डियों से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी फ्रैक्चर की वजह बन सकती हैं।
शरीर में विटामिन D की कमी क्यों हो सकती है?
विटामिन D शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह शरीर को कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में मदद करता है, जो हड्डियों की सामान्य मजबूती और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। शरीर में विटामिन D का एक प्रमुख स्रोत सूर्य की रोशनी है।
आजकल बहुत से लोगों का समय घर, कार्यालय या अन्य बंद स्थानों में अधिक बीतता है। ऐसे में शरीर को पर्याप्त धूप न मिलने की स्थिति में विटामिन D का स्तर कम हो सकता है। हालांकि, विटामिन D की स्थिति केवल धूप मिलने या न मिलने पर निर्भर नहीं करती और व्यक्ति की उम्र, खान-पान, शरीर की स्थिति तथा अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
धूप और खान-पान से कैसे मिल सकता है Vitamin D?
विटामिन D के लिए कुछ समय धूप में रहना मददगार हो सकता है। समाचार में डॉक्टर की ओर से करीब 15 से 20 मिनट धूप लेने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा आहार में अंडे की जर्दी, मछली, दूध और कुछ डेयरी उत्पाद शामिल किए जा सकते हैं।
हालांकि, केवल खान-पान और धूप से पर्याप्त विटामिन D मिलना हर व्यक्ति में संभव हो, यह जरूरी नहीं है। यदि जांच में कमी सामने आती है या कमी अधिक है, तो डॉक्टर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार विटामिन D की दवा या सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।
बिना जांच के खुद से सप्लीमेंट लेना क्यों ठीक नहीं?
हड्डियों में दर्द, कमजोरी, थकान या मूड में बदलाव जैसे लक्षण कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से विटामिन D की दवा लेना सही तरीका नहीं है।
यदि परेशानी लगातार बनी हुई है, तो चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर विटामिन D की जांच सहित अन्य आवश्यक परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे कमी की वास्तविक स्थिति और लक्षणों के संभावित कारण को समझने में मदद मिल सकती है।
