ere | Source: ereअक्सर सिरदर्द होने पर लोग इसे तनाव, नींद की कमी या दिनभर की थकान का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग दर्द से राहत पाने के लिए बार-बार दवाइयों का सहारा भी लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि लगातार होने वाले सिरदर्द की वजह आपकी आंखें भी हो सकती हैं? खासकर मोबाइल, लैपटॉप और किताबों पर लंबे समय तक नजरें टिकाए रखने वालों को यह समस्या अधिक परेशान कर सकती है। आंखों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे माथे, कनपटी और गर्दन तक दर्द पहुंचा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, आंखों से जुड़ी चार प्रमुख समस्याएं सिरदर्द की वजह बन सकती हैं।

सिरदर्द का आंखों से क्या है संबंध? डॉक्टर ने समझाई वजह

बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के आई हेल्थ विभाग के प्रमुख डॉ. विवेक गर्ग के अनुसार, हर बार सिरदर्द की वजह दिमाग या नसों से जुड़ी समस्या नहीं होती। कई मामलों में आंखों की परेशानी भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती है। उनके पास ऐसे मरीज आते हैं, जो लंबे समय तक सिरदर्द की दवाइयां लेते रहते हैं और दिमाग की जांच कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाते। बाद में आंखों की जांच से पता चलता है कि दर्द की असली वजह नजर या आंखों के काम करने के तरीके में गड़बड़ी थी।

दरअसल, लगातार पढ़ने, मोबाइल देखने या किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों के आसपास की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर माथे, आंखों के पीछे और गर्दन तक दर्द महसूस हो सकता है।

आंखों की ये 4 समस्याएं बन सकती हैं सिरदर्द की वजह

1. चश्मे का नंबर गलत होना

अगर चश्मे का नंबर सही नहीं है या नजर कमजोर होने के बावजूद चश्मा नहीं लगाया जाता, तो आंखों को साफ देखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे आंखों पर लगातार दबाव बना रहता है। इसका असर माथे और कनपटी के आसपास दर्द के रूप में दिखाई दे सकता है। कई बार चश्मे के नंबर में मामूली अंतर भी सिरदर्द और आंखों में थकान पैदा कर सकता है।

2. दोनों आंखों के बीच तालमेल की कमी

किसी किताब को पढ़ते समय या मोबाइल-लैपटॉप देखते समय दोनों आंखों को एक ही दिशा में फोकस करना पड़ता है। लेकिन कुछ लोगों की आंखें आपस में सही तालमेल नहीं बना पातीं। ऐसी स्थिति में दिमाग को दोनों आंखों से मिलने वाली तस्वीरों को एक साथ समझने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण आंखों के पीछे दर्द, भारीपन और सिर में धड़कन जैसा दर्द महसूस हो सकता है।

3. मोबाइल और लैपटॉप का लगातार इस्तेमाल

आजकल घंटों स्क्रीन देखने की आदत भी सिरदर्द की बड़ी वजह बन रही है। डॉक्टर के मुताबिक, सामान्य स्थिति में व्यक्ति एक मिनट में लगभग 15 से 20 बार पलकें झपकाता है, लेकिन मोबाइल या लैपटॉप देखते समय यह संख्या घटकर 5 से 7 बार रह जाती है। इससे आंखों में नमी कम होने लगती है और सूखापन, जलन तथा रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। लगातार स्क्रीन देखने के बाद खासकर शाम के समय सिरदर्द और आंखों में थकान महसूस हो सकती है।

4. आंखों के अंदर दबाव बढ़ना

आंखों के अंदर मौजूद तरल पदार्थ का दबाव बढ़ने से ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। कुछ मामलों में आंखों में तेज दर्द होने लगता है, जो माथे और कनपटी तक फैल सकता है। इसके साथ जी मिचलाना, आंखों का लाल होना और रोशनी के आसपास रंगीन घेरे दिखाई देना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। अचानक तेज आंख दर्द या नजर धुंधली होने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

कैसे पहचानें कि आपके सिरदर्द की वजह आंखें हैं?

आंखों से जुड़ी परेशानी के कारण होने वाले सिरदर्द को पहचानने के लिए कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।

  • दोपहर या शाम को दर्द बढ़ना: सुबह सामान्य महसूस होने के बाद पढ़ाई, मोबाइल या लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने से सिरदर्द शुरू होना आंखों पर दबाव का संकेत हो सकता है।
  • आंखों के आसपास दर्द: माथे, दोनों आंखों के बीच, आंखों के पीछे या कनपटी में दर्द महसूस होना आंखों से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।
  • आराम करने पर राहत मिलना: आंखें बंद करके कुछ देर आराम करने या स्क्रीन से दूरी बनाने पर दर्द कम हो सकता है। हालांकि, केवल इससे सिरदर्द की वजह तय नहीं की जा सकती।
  • अन्य लक्षण दिखाई देना: सिरदर्द के साथ धुंधला दिखना, आंखों में जलन और गर्दन में अकड़न जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

बार-बार सिरदर्द हो तो क्या करें?

डॉक्टरों की सलाह है कि बार-बार होने वाले सिरदर्द को केवल दर्द की दवा लेकर दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसकी वास्तविक वजह जानने के लिए आंखों के विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। स्क्रीन पर लगातार काम करने के बीच नियमित अंतराल पर आराम दें और आंखों में सूखापन महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। वहीं, अचानक बहुत तेज सिरदर्द, आंखों में तेज दर्द, आंख लाल होने या नजर में अचानक बदलाव आने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। सही समय पर जांच कराने से आंखों की कई समस्याओं की पहचान कर उनका इलाज किया जा सकता है।