नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में एक ऐसा अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक अनोखा और बड़ा मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार (30 अक्तूबर) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास पर एक 'मॉक संसद' (प्रतीकात्मक संसद सत्र) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रतीकात्मक रूप से 'जन महाभियोग' चलाया जाएगा।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों को कमजोर किया है और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। इसी के विरोध में 'जनता की अदालत' लगाकर यह सांकेतिक महाभियोग प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मीरा कुमार की अध्यक्षता और खरगे का प्रस्ताव: ऐसे चलेगी 'मॉक संसद' की कार्यवाही
इस अभूतपूर्व कार्यक्रम की रूपरेखा बेहद सुनियोजित तरीके से तय की गई है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार इस 'जन महाभियोग' कार्यक्रम की अध्यक्षता (स्पीकर की भूमिका) करेंगी।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे स्वयं 'महाभियोग प्रस्ताव' पेश करेंगे। इसके बाद 'इंडिया' गठबंधन के तमाम घटक दलों के प्रतिनिधि एक-एक करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोपों की सूची प्रस्तुत करेंगे। इस पूरी कार्यवाही का समापन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के कड़े भाषण के साथ होगा, जिसके बाद प्रस्ताव को प्रतीकात्मक रूप से पारित किया जाएगा।
खरगे के आवास पर देर रात तक मंथन: बैठक में शामिल हुए ये बड़े चेहरे
गुरुवार को नई दिल्ली स्थित मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की एक आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में 'जनता की अदालत में महाभियोग' के स्वरूप, कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर गहन चर्चा हुई।
बैठक में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सांसद गौरव गोगोई, टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नेता महुआ मांझी, समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र मलिक, माकपा (CPM) सांसद जॉन ब्रिटास, और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा व मणिकम टैगोर सहित कई प्रमुख चेहरे शामिल थे।
पीड़ित मतदाता और नागरिक समाज भी होंगे शामिल: यह महज नाटक नहीं, जनता का सवाल है
गठबंधन के नेताओं ने साफ किया है कि यह केवल नेताओं का कोई प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन नहीं है। इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों से प्रभावित आम नागरिकों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा नागरिक समाज (Civil Society) के प्रतिनिधि भी इस महाभियोग की कार्यवाही के साक्षी बनेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इसे संसद की महज नकल या नाटक न समझा जाए। यह सीधे तौर पर जनता के बीच चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने का एक जरिया है, ताकि देश का हर नागरिक अपने वोट की कीमत को समझ सके।
रामलीला मैदान में 1 नवंबर को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली का ऐलान
खरगे के आवास पर आयोजित होने वाला यह 'जन महाभियोग' विपक्ष के इस देशव्यापी आंदोलन का पहला चरण है। इसके तुरंत बाद 01 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली का आयोजन किया जाएगा।
इस महारैली में देश भर से लाखों लोगों और कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा किया गया है। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि वोट चोरी और संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग के खिलाफ उनका यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो जाती।
