erer | Source: ereनई दिल्ली/वॉशिंगटन। आमतौर पर आपने बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने हाथियों के वृद्धाश्रम के बारे में सुना है? अमेरिका के टेनेसी में ऐसा ही एक अनोखा अभयारण्य है, जहां रिटायर हो चुके हाथियों को सुरक्षित और शांत वातावरण में रहने का अवसर मिलता है। इसकी शुरुआत एक महिला की उस कोशिश से हुई, जो अपनी देखरेख में रहने वाली हथिनी के लिए बेहतर भविष्य चाहती थीं।

इस अभयारण्य की कहानी कैरोल बकले और हथिनी तारा से जुड़ी है। बकले ने 1994 में टेनेसी के होहेनवाल्ड में 112 एकड़ जमीन खरीदी थी। उनका उद्देश्य तारा को ऐसी जगह देना था, जहां वह मनोरंजन के कार्यक्रमों और सार्वजनिक प्रदर्शन के दबाव से दूर अपना जीवन बिता सके। अगले वर्ष, 1995 में, इस जमीन पर हाथियों के लिए अभयारण्य की शुरुआत हुई। समय के साथ यह पहल एक बड़े संरक्षण केंद्र में बदल गई।

एक हथिनी के लिए शुरू हुई पहल कैसे बनी विशाल अभयारण्य?

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, तारा के लिए शुरू की गई यह पहल आगे चलकर ‘द एलीफेंट सैंक्चुअरी’ के रूप में विकसित हुई। आज यह अभयारण्य टेनेसी के होहेनवाल्ड के पास लगभग 3,060 एकड़ में फैला हुआ है। यह स्थान नैशविल से करीब 85 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

यहां एशियाई और अफ्रीकी हाथियों को जीवनभर देखभाल देने की व्यवस्था है। जंगल, खुले मैदान, चरागाह, तालाब और मौसम के अनुसार उपयोग किए जाने वाले गर्म बाड़े हाथियों के लिए अलग-अलग तरह के आवास उपलब्ध कराते हैं। हाथियों की जरूरतों के अनुसार उनकी देखभाल और पशु चिकित्सा की व्यवस्था की जाती है।

इस अभयारण्य का मूल विचार यह है कि जिन हाथियों ने अपने जीवन के कई वर्ष मनोरंजन उद्योग, सर्कस या सार्वजनिक प्रदर्शन में बिताए हैं, उन्हें बाद के जीवन में अधिक खुली जगह और अपेक्षाकृत शांत वातावरण मिलना चाहिए।

1974 में हुई थी कैरोल बकले और तारा की पहली मुलाकात

कैरोल बकले की तारा से पहली मुलाकात 1974 में हुई थी। उस समय तारा एक युवा हथिनी थी और कैलिफोर्निया में एक टायर की दुकान में शुभंकर के तौर पर इस्तेमाल की जाती थी। बकले ने उसकी देखभाल शुरू की और बाद में उसकी मालकिन बन गईं।

इसके बाद बकले और तारा ने अमेरिका तथा विदेशों में साथ यात्रा की। दोनों सर्कस, चिड़ियाघरों, मनोरंजन पार्कों और टेलीविजन कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए। लेकिन जैसे-जैसे तारा बड़ी होती गई, बकले के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या हथिनी का जीवन केवल प्रदर्शनों और मनोरंजन तक सीमित रहना चाहिए।

वह तारा के लिए ऐसी जगह चाहती थीं, जहां उसे लोगों के सामने प्रदर्शन न करना पड़े और वह अधिक प्राकृतिक वातावरण में रह सके। इसी सोच ने उन्हें टेनेसी में जमीन खरीदकर अभयारण्य स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ाया।

1995 में तारा बनी अभयारण्य की पहली निवासी

1994 की शरद ऋतु में कैरोल बकले ने 112 एकड़ जमीन खरीदी और इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था स्थापित की। 1995 में अभयारण्य शुरू हुआ और तारा यहां रहने वाली पहली हथिनी बनी।

इस पहल के पीछे उद्देश्य केवल हाथियों को रहने के लिए जगह देना नहीं था, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना भी था, जहां उनकी शारीरिक और व्यवहार संबंधी जरूरतों का ध्यान रखा जा सके। अभयारण्य में हाथियों को अधिक जगह, विशेष देखभाल और इंसानों के साथ सीमित तथा सुरक्षित संपर्क की व्यवस्था देने पर जोर दिया गया।

समय बीतने के साथ इस परियोजना का विस्तार होता गया। एक हथिनी के लिए शुरू हुई यह जगह बाद में कई हाथियों का आश्रय बन गई।

हाथियों की देखभाल के लिए अपनाए जाते हैं खास तरीके

अभयारण्य में हाथियों की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखकर देखभाल की जाती है। संस्था के अनुसार, हाथियों के प्रबंधन में ‘प्रोटेक्टेड-कॉन्टैक्ट’ यानी सुरक्षित संपर्क और ‘पॉजिटिव रीइन्फोर्समेंट’ यानी सकारात्मक प्रोत्साहन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

सुरक्षित संपर्क पद्धति में देखभाल करने वाले लोग हाथियों के साथ एक भौतिक अवरोध बनाए रखते हैं। इससे हाथियों को संभालने या उनकी देखभाल करने के लिए सीधे संपर्क की जरूरत कम होती है। सकारात्मक प्रोत्साहन के जरिए हाथियों को देखभाल से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

पारंपरिक चिड़ियाघरों या मनोरंजन स्थलों से अलग, इस अभयारण्य का उद्देश्य हाथियों को दर्शकों के सामने प्रदर्शित करना नहीं है। यहां उनका कल्याण, लंबे समय तक स्वास्थ्य और जीवनभर देखभाल प्राथमिकता है।

लाइव कैमरों से देख सकते हैं अभयारण्य की गतिविधियां

टेनेसी के होहेनवाल्ड स्थित अभयारण्य में लाइव कैमरे और शिक्षा केंद्र के माध्यम से लोगों को हाथियों और उनके संरक्षण से जुड़े काम के बारे में जानने का अवसर मिलता है। इससे लोग समझ सकते हैं कि हाथियों को सुरक्षित वातावरण देने और उनकी जरूरतों के अनुसार देखभाल करने के लिए किस तरह की व्यवस्थाएं की जाती हैं।

112 एकड़ से शुरू हुई यह जमीन अब 3,060 एकड़ तक फैल चुकी है। यह विस्तार दर्शाता है कि एक हथिनी के लिए शुरू की गई पहल किस तरह समय के साथ कई हाथियों की देखभाल करने वाली संस्था में बदल गई।

तारा और कुतिया बेला की दोस्ती ने भी बटोरी सुर्खियां

हथिनी तारा की कहानी का एक भावुक पहलू उसकी बेला नाम की कुतिया के साथ दोस्ती भी रही। बेला एक आवारा कुतिया थी, जो अभयारण्य के आसपास रहने लगी थी। समय के साथ तारा और बेला के बीच गहरा लगाव हो गया।

दोनों साथ समय बिताती थीं, खाना खाती थीं, आराम करती थीं और आसपास घूमती थीं। उनकी दोस्ती के वीडियो ऑनलाइन सामने आने के बाद लोगों का ध्यान इस अनोखे रिश्ते की ओर गया।

तारा और बेला की कहानी ने यह दिखाया कि जानवरों के बीच भी अलग-अलग प्रजातियों के बावजूद गहरे संबंध बन सकते हैं। अभयारण्य के शांत वातावरण में दोनों की दोस्ती तारा के जीवन के एक अलग पहलू को सामने लेकर आई।

अभयारण्य से तारा के जाने के पीछे क्या था विवाद?

कैरोल बकले और तारा की कहानी में बाद में कानूनी विवाद भी सामने आया। अभयारण्य के बोर्ड ने बकले को हाथियों की रोजमर्रा की देखभाल की जिम्मेदारी से हटा दिया था। इसके बाद तारा के स्वामित्व और उसकी कस्टडी को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली।

इस मामले में कई अदालती कार्यवाहियां और अपीलें हुईं। जून 2021 में टेनेसी कोर्ट ऑफ अपील्स ने फैसला सुनाया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा अभयारण्य को नया ट्रायल देने का निर्णय गलत था। इस फैसले के बाद तारा की कस्टडी कैरोल बकले को सौंप दी गई।

नवंबर 2021 में तारा टेनेसी के अभयारण्य से निकलकर जॉर्जिया चली गई, जहां वह बकले की देखरेख में रहने लगी। अभयारण्य प्रशासन ने उसके जाने की पुष्टि की। वह 26 साल से अधिक समय तक इस अभयारण्य में रही थी और इसकी पहली निवासी थी।

तारा के जाने से उस जगह की कहानी में महत्वपूर्ण बदलाव आया, लेकिन अभयारण्य का काम जारी रहा। संस्था आज भी हाथियों को सुरक्षित आश्रय और जीवनभर देखभाल देने के उद्देश्य से काम करती है।

तारा अब अलग रहती है, लेकिन अभयारण्य का मिशन जारी

तारा अब टेनेसी के अभयारण्य में नहीं रहती, लेकिन उसके लिए शुरू की गई पहल आज भी जारी है। 1995 से अब तक इस संस्था ने कई हाथियों की देखभाल की है। इसका उद्देश्य उन हाथियों को बेहतर जीवन देना है, जिन्हें उम्र, स्वास्थ्य या उनकी पिछली परिस्थितियों के कारण विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

यह कहानी केवल एक महिला और हथिनी के रिश्ते की नहीं है, बल्कि वन्यजीव कल्याण के उस विचार की भी है, जिसमें जानवरों को मनोरंजन के साधन के बजाय अपनी जरूरतों और स्वभाव के अनुसार जीवन जीने का अवसर देने पर जोर दिया जाता है।

112 एकड़ जमीन से शुरू हुआ यह सफर अब 3,060 एकड़ के विशाल अभयारण्य तक पहुंच चुका है। तारा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि एक जानवर के लिए बेहतर जीवन की तलाश किस तरह लंबे समय तक चलने वाली पहल का आधार बन सकती है।