करवा चौथ का पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू हुआ व्रत रात में चंद्रमा के दर्शन, अर्घ्य और पूजा के बाद पूरा किया जाता है। इस वजह से महिलाओं को पूरे दिन चांद निकलने का इंतजार रहता है।
इस बार मौसम में बदलाव और आसमान में बादल रहने की संभावना के कारण कुछ शहरों में चंद्रमा के दर्शन में परेशानी हो सकती है। ऐसे में महिलाओं के मन में सवाल है कि उनके शहर में चांद कितने बजे निकलेगा और यदि बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं दे तो व्रत कैसे पूरा किया जाए।
दिल्ली-एनसीआर में कब होगा चंद्रोदय?
दिल्ली और आसपास के इलाकों में करवा चौथ की रात चंद्रमा निकलने का संभावित समय रात के आसपास 8 बजे बताया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक समय में स्थानीय भौगोलिक स्थिति और मौसम के कारण कुछ अंतर हो सकता है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी महिलाएं इसी अवधि के दौरान चंद्रमा के दर्शन की उम्मीद कर सकती हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चांद निकलने का समय
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर रह सकता है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और आगरा सहित प्रमुख शहरों में महिलाएं रात के समय चंद्रमा के दर्शन कर व्रत पूरा करेंगी। उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में भी चंद्रोदय का समय स्थानीय स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
करवा चौथ की पूजा करते समय महिलाओं को अपने शहर के चंद्रोदय के अनुमानित समय के साथ स्थानीय पंचांग का भी ध्यान रखना चाहिए। बादल होने की स्थिति में चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है।
बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कब दिखेगा चांद?
बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं रात में चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करेंगी। झारखंड के रांची, जमशेदपुर और धनबाद तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता समेत अन्य शहरों में भी चंद्रोदय का समय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।
इन क्षेत्रों में पूजा और व्रत खोलने के लिए अपने शहर के चंद्रोदय के समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। मौसम खराब रहने पर खुले आसमान से चंद्रमा का दर्शन करना मुश्किल हो सकता है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चंद्रमा के दर्शन का समय
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत प्रमुख शहरों में करवा चौथ की पूजा के बाद महिलाएं चंद्रमा के निकलने का इंतजार करेंगी। छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में भी व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रोदय के बाद पूजा की परंपरा पूरी करेंगी। चंद्रोदय का समय शहर के हिसाब से बदल सकता है। इसलिए एक ही राज्य के सभी शहरों में चांद एक ही समय पर दिखाई देगा, यह जरूरी नहीं है।
राजस्थान और गुजरात में कब होंगे चंद्रमा के दर्शन?
राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा सहित विभिन्न शहरों में करवा चौथ की रात चंद्रमा के दर्शन का इंतजार रहेगा। गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में भी महिलाएं पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी।
पश्चिमी भारत के शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रोदय का समय दूसरे क्षेत्रों से अलग हो सकता है। महिलाओं को अपने स्थानीय समय के अनुसार पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत में चंद्रोदय
महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर सहित प्रमुख शहरों में भी करवा चौथ का व्रत रखा जा रहा है। गोवा और दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं भी अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा करेंगी। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में चंद्रमा निकलने के समय की स्थानीय जानकारी लेना जरूरी है।
चंद्रोदय के समय पर मौसम, स्थान और स्थानीय पंचांग के कारण अंतर हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर उपलब्ध किसी दूसरे शहर का समय अपने शहर पर लागू मानने से बचना चाहिए।
बादलों में चांद न दिखे तो कैसे खोलें व्रत?
करवा चौथ पर कई बार आसमान में बादल छाए रहने या बारिश के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं को चिंता होने लगती है कि चांद के दर्शन के बिना व्रत कैसे पूरा किया जाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी परिस्थिति में परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित की सलाह के आधार पर उपाय अपनाए जा सकते हैं।
कुछ परंपराओं में चंद्रमा के उदय का समय होने पर उसकी दिशा की ओर मुख करके प्रार्थना की जाती है। कहीं-कहीं चंद्रमा का स्मरण कर पूजा करने और अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसके तरीके अलग हो सकते हैं। इसलिए चंद्रमा दिखाई नहीं देने पर किसी एक उपाय को सभी जगह के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं मानना चाहिए। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करना और जरूरत पड़ने पर स्थानीय विद्वान से सलाह लेना बेहतर है।
करवा चौथ की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?
करवा चौथ की पूजा में महिलाएं परंपरागत रूप से भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रमा की पूजा करती हैं। पूजा की थाली में दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई, जल से भरा करवा और छलनी जैसी वस्तुएं रखी जाती हैं। क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री में अंतर हो सकता है।
चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पूजा करती हैं। कई परिवारों में छलनी से चंद्रमा देखने के बाद पति का चेहरा देखने की परंपरा है। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलने की रस्म निभाई जाती है।
करवा चौथ की रात पूजा और चंद्रोदय का समय क्यों है महत्वपूर्ण?
करवा चौथ में चंद्रमा के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को पूजा करती हैं और चंद्रमा निकलने के बाद व्रत खोलती हैं। यही कारण है कि चंद्रोदय का समय इस पर्व की तैयारियों का अहम हिस्सा होता है।
हालांकि, चंद्रमा निकलने का समय और उसके प्रत्यक्ष दर्शन का समय अलग हो सकता है। यदि आसमान में बादल हों, तो चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आने के बाद भी दिखाई नहीं दे सकता। ऐसी स्थिति में धैर्य रखना और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार आगे बढ़ना उचित रहेगा।
निशिता मुहूर्त का समय
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से 30 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है। हालांकि, करवा चौथ की मुख्य पूजा और व्रत खोलने के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय और पूजा के समय को प्राथमिकता देना चाहिए।
व्रत खोलते समय सेहत का भी रखें ध्यान
करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को लंबे समय तक पानी और भोजन नहीं मिलता। व्रत खोलने के बाद धीरे-धीरे पानी पीना और हल्का भोजन करना बेहतर रहता है। कमजोरी, चक्कर, बेहोशी या तबीयत बिगड़ने पर केवल धार्मिक रस्म पूरी करने के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों या नियमित दवा लेने वालों को उपवास के संबंध में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के साथ व्रत पूरा करने की परंपरा महिलाओं के लिए भावनात्मक और धार्मिक महत्व रखती है। मौसम के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो तो घबराने के बजाय अपने शहर के चंद्रोदय का समय देखें और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा पूरी करें।
