पटना/दरभंगा। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणामों में दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला सबसे चौंकाने वाला रहा। यहां मतगणना के अधिकांश समय बढ़त बनाए रखने वाले भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा विधान पार्षद सर्वेश कुमार सिंह को आखिरी दौर में हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार अनिल झा ने दूसरी वरीयता के मतों की गिनती में बाजी पलटते हुए महज 450 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर ली। इस नतीजे ने दिखाया कि चुनाव में शुरुआती बढ़त के बावजूद अंतिम परिणाम दूसरी वरीयता के मतों से पूरी तरह बदल सकता है।
दूसरी वरीयता के वोटों ने पलट दिया पूरा चुनाव
दरभंगा स्नातक सीट पर मतगणना के दौरान सर्वेश कुमार सिंह लंबे समय तक अनिल झा से आगे चल रहे थे। मुकाबला इतना करीबी था कि अंतिम चरण तक किसी एक प्रत्याशी की जीत को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। सर्वेश सिंह आखिरी तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के दौरान भी 1,046 वोटों की बढ़त बनाए हुए थे। हालांकि, इसके बाद मतगणना के एलिमिनेशन राउंड में दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू हुई तो चुनाव का रुख बदल गया।
जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी इम्तियाज तीसरे स्थान पर रहे। उनके मतपत्रों में दर्ज दूसरी वरीयता के मतों का हस्तांतरण शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच हुआ। इसी प्रक्रिया के बाद राजद के अनिल झा ने सर्वेश कुमार सिंह को पीछे छोड़ दिया। अंततः अनिल झा ने 450 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस तरह मतगणना के अंतिम चरण में मिली बढ़त ने उन्हें विधान परिषद पहुंचने का अवसर दिलाया, जबकि सर्वेश सिंह अपनी मौजूदा सीट नहीं बचा सके।
2020 में निर्दलीय जीतकर सदन पहुंचे थे सर्वेश सिंह
सर्वेश कुमार सिंह का पिछला चुनावी सफर भी उल्लेखनीय रहा था। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने भाजपा से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी दिलीप चौधरी को हराकर पहली बार विधान परिषद में प्रवेश किया था। इस बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे सर्वेश सिंह को मतगणना के अधिकांश समय बढ़त मिलने के बावजूद अंतिम परिणाम में हार का सामना करना पड़ा।
दूसरी ओर, अनिल झा की जीत ने दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राजद को नई सफलता दिलाई है। इस चुनाव में उनकी जीत का अंतर भले ही केवल 450 वोट रहा, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों की निर्णायक भूमिका के कारण यह मुकाबला बिहार विधान परिषद के चुनाव परिणामों में खास चर्चा का विषय बन गया।
दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय की जीत
दरभंगा में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम भी चर्चा में रहा। इस सीट पर बेगूसराय के शिक्षक नेता और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के विधान पार्षद मदन मोहन झा को हराकर जीत हासिल की थी। इस नतीजे के साथ ही दरभंगा की दोनों सीटों पर अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों की जीत दर्ज हुई। स्नातक सीट पर राजद के अनिल झा और शिक्षक सीट पर जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय विजयी रहे।
स्नातक सीट का परिणाम आने के बाद बिहार विधान परिषद की उन सभी आठ सीटों के नतीजे घोषित हो गए, जिन पर चुनाव कराया गया था। इन परिणामों ने कई मौजूदा विधान पार्षदों की राजनीतिक स्थिति बदल दी और विभिन्न दलों के चुनावी प्रदर्शन की तस्वीर भी स्पष्ट कर दी।
आठ सीटों के परिणाम में राजद को सबसे बड़ा फायदा
आठ सीटों के चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनता दल सबसे अधिक लाभ की स्थिति में रहा। राजद ने पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। इन दोनों सीटों पर पार्टी के पास पहले से प्रतिनिधित्व नहीं था। इस तरह राजद ने दो नई सीटें जीतकर विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत की।
भारतीय जनता पार्टी को तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सफलता मिली। हालांकि, सर्वेश कुमार सिंह की हार के कारण पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को झटका लगा। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार, भाजपा ने इन दोनों सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन दरभंगा स्नातक सीट गंवाने से उसे एक सीट का नुकसान हुआ।
जनता दल यूनाइटेड ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की, जबकि जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट अपने नाम की। वहीं, सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। इस प्रकार आठ सीटों के नतीजों में राजद, भाजपा, जदयू, जन सुराज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की अलग-अलग तस्वीर सामने आई।
पांच मौजूदा विधान पार्षदों को गंवानी पड़ी अपनी सीट
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में पांच मौजूदा विधान पार्षद अपनी सीट बचाने में असफल रहे। इनमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे। पटना शिक्षक सीट से भाजपा के नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक सीट से कांग्रेस के मदन मोहन झा, तिरहुत शिक्षक सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के संजय सिंह और सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय अफाक अहमद को हार का सामना करना पड़ा। दरभंगा स्नातक सीट से मौजूदा विधान पार्षद सर्वेश कुमार सिंह भी चुनाव हार गए।
इन परिणामों से स्पष्ट हुआ कि इस चुनाव में केवल नए उम्मीदवारों को ही सफलता नहीं मिली, बल्कि कई मौजूदा प्रतिनिधियों को भी मतदाताओं के फैसले के कारण अपनी सीट गंवानी पड़ी। खास तौर पर दरभंगा स्नातक सीट पर अंतिम चरण में बदले परिणाम ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया।
तीन मौजूदा विधान पार्षद सीट बचाने में रहे सफल
जहां पांच मौजूदा विधान पार्षदों को हार का सामना करना पड़ा, वहीं तीन प्रतिनिधि अपनी सीट बचाने में सफल रहे। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के नीरज कुमार, कोसी स्नातक सीट से भाजपा के एनके यादव और तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने अपनी जीत बरकरार रखी।
इन तीनों उम्मीदवारों की जीत के साथ यह भी स्पष्ट हुआ कि चुनाव में सभी मौजूदा विधान पार्षदों को मतदाताओं ने पूरी तरह नकारा नहीं। कुछ प्रतिनिधियों ने अपना राजनीतिक आधार बनाए रखा, जबकि अन्य को नए उम्मीदवारों से कड़ी चुनौती मिली।
मौजूदा विधान पार्षदों को हराकर पांच नए उम्मीदवार पहुंचे सदन
आठ सीटों के चुनाव में पांच उम्मीदवार ऐसे रहे, जिन्होंने मौजूदा विधान पार्षदों को हराकर विधान परिषद में जगह बनाई। इनमें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद के संजीव सिंह, दरभंगा स्नातक सीट से राजद के अनिल झा, दरभंगा शिक्षक सीट से जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय, तिरहुत शिक्षक सीट से भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह और सारण शिक्षक सीट से भाजपा के बागी निर्दलीय राहुल राज शामिल हैं।
इन परिणामों में राजद और जन सुराज पार्टी के लिए खास उपलब्धियां सामने आईं। राजद ने पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक सीट पर जीत हासिल की, जबकि जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधान पार्षद को हराया। भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने तिरहुत शिक्षक सीट पर सफलता प्राप्त की और निर्दलीय राहुल राज ने सारण शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की।
दरभंगा स्नातक सीट का नतीजा क्यों रहा खास?
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यहां लंबे समय तक बढ़त बनाए रखने के बावजूद सर्वेश कुमार सिंह जीत हासिल नहीं कर सके। अंतिम तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबले में 1,046 वोटों से आगे रहने के बाद भी दूसरी वरीयता के मतों की गिनती ने परिणाम बदल दिया। अनिल झा की 450 वोटों की जीत ने इस मुकाबले को आठ सीटों के चुनाव परिणामों में सबसे दिलचस्प घटनाक्रमों में शामिल कर दिया।
बिहार विधान परिषद की सभी आठ सीटों के नतीजों ने अलग-अलग दलों की स्थिति भी स्पष्ट कर दी। राजद को दो सीटें मिलीं, भाजपा ने तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक सीट पर जीत हासिल की, जदयू ने पटना स्नातक सीट अपने नाम की और जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट पर सफलता प्राप्त की। सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
कुल मिलाकर, बिहार विधान परिषद चुनाव में दरभंगा स्नातक सीट का परिणाम इस बात का प्रमुख उदाहरण बना कि मतगणना के शुरुआती रुझान और अंतिम नतीजे अलग हो सकते हैं। सर्वेश कुमार सिंह की बढ़त अंतिम चरण में समाप्त हो गई, जबकि अनिल झा ने दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर जीत दर्ज की। आठ सीटों के परिणामों में पांच मौजूदा विधान पार्षदों की हार और राजद की दो सीटों पर जीत ने इस चुनाव को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया।
