झुकते समय पेट में दर्द होना, कमर या जांघ के पास सूजन दिखाई देना या किसी हिस्से में उभरी हुई गांठ महसूस होना कई लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण हर्निया जैसी गंभीर समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं कराया गया तो यह समस्या जटिल रूप ले सकती है और कुछ मामलों में जानलेवा स्थिति भी पैदा हो सकती है।
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार हर्निया ऐसी स्थिति है जिसमें पेट या शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी आने पर अंदर का कोई अंग या वसायुक्त ऊतक (फैटी टिश्यू) बाहर की ओर उभरने लगता है। यह समस्या अधिक वजन, लंबे समय तक भारी सामान उठाने, लगातार खांसी रहने, पुरानी कब्ज या बढ़ती उम्र के कारण विकसित हो सकती है। हर्निया अपने आप ठीक नहीं होता और इसका स्थायी उपचार सर्जरी ही माना जाता है।
हर्निया आखिर क्यों होता है?
जब पेट की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं, तब शरीर के अंदर मौजूद ऊतक या आंत उस कमजोर हिस्से से बाहर की ओर निकलने लगती है। शुरुआत में यह केवल हल्की सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है, लेकिन समय के साथ इसका आकार बढ़ सकता है और दर्द भी शुरू हो सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जाता।
सूजन का लगातार बढ़ना हो सकता है खतरे का संकेत
अमेरिकन कॉलेज ऑफ सर्जन्स के अनुसार यदि पेट, कमर (ग्रोइन) या जांघ के आसपास दिखाई देने वाला उभार धीरे-धीरे बड़ा होने लगे, तो यह मांसपेशियों की कमजोरी बढ़ने का संकेत हो सकता है। हर्निया जितना बड़ा होता जाता है, आसपास के ऊतकों और मांसपेशियों पर उतना ही अधिक प्रभाव पड़ता है। इससे भविष्य में सर्जरी भी अधिक जटिल हो सकती है और रिकवरी में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए शुरुआती अवस्था में ही उपचार करवाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
झुकने, खांसने या वजन उठाने पर दर्द को न करें नजरअंदाज
मायो क्लिनिक के अनुसार शुरुआती दौर में हर्निया कई बार बिना दर्द के भी हो सकता है। हालांकि समय के साथ चलने, झुकने, खांसने, भारी सामान उठाने या लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द और असहजता महसूस होने लगती है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्रभावित मांसपेशियां लगातार कमजोर हो रही हैं।
यदि दर्द के साथ सूजन में लालिमा, उल्टी या बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई दें तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
लेटने के बाद भी सूजन कम न हो तो बढ़ सकती है परेशानी
हर्निया की शुरुआती अवस्था में लेटने पर कई बार सूजन कम दिखाई देती है, क्योंकि उस समय प्रभावित हिस्से पर दबाव कम हो जाता है। लेकिन यदि आराम करने या लेटने के बाद भी गांठ बनी रहे और सूजन कम न हो, तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है।
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (एनसीबीआई) के अनुसार यह स्थिति इनकार्सरेटेड हर्निया में बदल सकती है, जिसमें आंत या अन्य ऊतक फंस जाते हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें तो इलाज में देरी न करें
विशेषज्ञों के अनुसार यदि हर्निया की वजह से चलने, सीढ़ियां चढ़ने, कार्यालय जाने, व्यायाम करने या घरेलू काम करने में परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार दर्द और असहजता के कारण व्यक्ति की सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने लगती है, जिससे जीवन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
तेज दर्द, उल्टी और लाल सूजन हो सकती है मेडिकल इमरजेंसी
क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार यदि हर्निया के साथ अचानक तेज दर्द, सूजन में लालिमा, उल्टी, गैस या मल का न निकलना और पेट फूलने जैसी समस्या होने लगे, तो यह स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया का संकेत हो सकता है।
इस स्थिति में फंसी हुई आंत तक रक्त का प्रवाह रुक सकता है, जिससे ऊतकों के नष्ट होने का खतरा रहता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल पहुंचना आवश्यक होता है। उपचार में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
हर्निया की सर्जरी और रिकवरी कैसी होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में अधिकांश हर्निया की सर्जरी ओपन या लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की जाती है। कई मरीज सर्जरी के उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से घर लौट सकते हैं।
सर्जरी के बाद कुछ दिनों में हल्की शारीरिक गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं, जबकि भारी वजन उठाने से कुछ सप्ताह तक बचने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने से रिकवरी बेहतर होती है और दोबारा हर्निया होने का जोखिम भी कम हो सकता है।
समय पर पहचान और उपचार है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि हर्निया ऐसी समस्या नहीं है जो समय के साथ अपने आप ठीक हो जाए। यदि पेट, कमर या जांघ में लगातार सूजन बनी रहे, उसका आकार बढ़ने लगे, झुकने या चलने पर दर्द महसूस हो या दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने लगें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। वहीं अचानक तेज दर्द, उल्टी, लालिमा और सूजन जैसी स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी मानते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
