Tमॉनसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई लोगों के लिए यह माइग्रेन और तेज सिरदर्द की समस्या भी बढ़ा देता है। न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, बारिश के दौरान मौसम में होने वाले बदलाव, बढ़ी हुई नमी और बिगड़ी हुई दिनचर्या माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकती है। हालांकि, कुछ आसान और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता है माइग्रेन?

पुणे के सह्याद्री सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आराधना चौहान के अनुसार, मॉनसून के दौरान वायुमंडलीय दबाव (Barometric Pressure) में गिरावट माइग्रेन का प्रमुख कारण बन सकती है। बारिश से पहले और उसके दौरान हवा का दबाव कम हो जाता है, जिससे माइग्रेन से पीड़ित लोगों के मस्तिष्क के दर्द-संवेदनशील तंत्र सक्रिय हो सकते हैं। यही वजह है कि कई लोगों को बारिश या बादलों वाले दिनों में सिरदर्द अधिक महसूस होता है।


उमस और डिहाइड्रेशन भी हैं जिम्मेदार

मॉनसून में बढ़ी हुई नमी के कारण शरीर में बिना एहसास हुए पानी की कमी हो सकती है। यह हल्का डिहाइड्रेशन भी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। इसके अलावा, लगातार बादल छाए रहने से धूप कम मिलती है, जिसका असर सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर पर पड़ सकता है। इससे भी माइग्रेन का खतरा बढ़ सकता है।


बदलती दिनचर्या भी बन सकती है वजह

बरसात के मौसम में लोगों की दिनचर्या अक्सर बदल जाती है। देर से सोना, भोजन समय पर न करना, तला-भुना भोजन अधिक खाना और शारीरिक गतिविधि कम होना माइग्रेन के जोखिम को बढ़ा सकता है। जिन लोगों को पहले से माइग्रेन की समस्या है, उनका मस्तिष्क ऐसी छोटी-छोटी दिनचर्या संबंधी गड़बड़ियों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है।


तनाव और मौसमी बीमारियां भी बढ़ाती हैं परेशानी

मॉनसून में वायरल संक्रमण, साइनस की समस्या और श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं। ये समस्याएं माइग्रेन के सिरदर्द को और गंभीर बना सकती हैं। वहीं, ट्रैफिक जाम, काम का तनाव और मानसिक दबाव भी माइग्रेन के दौरे की संभावना बढ़ा देते हैं।


मॉनसून में माइग्रेन से बचने के साइंस-बेस्ड टिप्स

- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, भले ही प्यास कम लगे।

- रोजाना एक निश्चित समय पर सोएं और पर्याप्त नींद लें।

- भोजन समय पर करें और लंबे समय तक खाली पेट न रहें।

- नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि और रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करें।

- सिरदर्द, मौसम, नींद, खानपान और तनाव का रिकॉर्ड रखें ताकि ट्रिगर की पहचान की जा सके।

- बार-बार या असहनीय सिरदर्द होने पर न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें।


कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है, दर्द असहनीय है या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर जांच और उचित इलाज से माइग्रेन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

मॉनसून से बचना संभव नहीं है, लेकिन इसके दौरान माइग्रेन के कारणों को समझकर और सही जीवनशैली अपनाकर सिरदर्द के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।