ere | Source: ereपटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में नामांकित बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र और बैंक खाता अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र की एक प्रति स्कूल के रिकॉर्ड में सुरक्षित रखी जाएगी। इसके साथ ही सभी बच्चों का बैंक खाता भी खुलवाया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जा सके। इस संबंध में शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन विजय कुमार पाण्डेय ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को आदेश जारी किया है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर इस कार्य को पूरा कराया जाए।

हर बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र स्कूल में रखना होगा, बिना दस्तावेज के नहीं चलेगा काम

शिक्षा विभाग के नए निर्देश के अनुसार, बिहार के सरकारी स्कूलों में नामांकित प्रत्येक बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र की एक प्रति स्कूल के अभिलेख में रखना अनिवार्य होगा। इसके लिए स्कूलों को अपने यहां पढ़ने वाले सभी बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जुटाने होंगे और उनका रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से तैयार करना होगा।

विभाग ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में ग्रामीण और शहरी निकायों की भूमिका भी स्पष्ट की है। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म प्रमाण पत्र मुखिया या पंचायत सेवक के माध्यम से जारी कराया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगर निकाय इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में स्कूलों को बच्चों के प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क करना होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी नामांकित बच्चों का आधिकारिक जन्म रिकॉर्ड स्कूलों में उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में उनकी शैक्षणिक और सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की कमी के कारण परेशानी न हो।

अब सभी बच्चों का खुलेगा बैंक खाता, सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे मिलेगा

शिक्षा विभाग ने केवल जन्म प्रमाण पत्र ही नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे का बैंक खाता खुलवाने का भी निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाना है।

आदेश के मुताबिक, बच्चों के बैंक खाते एकल या संयुक्त दोनों प्रकार के हो सकते हैं। हालांकि, खाते केवल सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंक में ही खुलवाने होंगे। इस व्यवस्था से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को विभिन्न योजनाओं की राशि सीधे बैंक खाते के माध्यम से उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

खास बात यह है कि बैंक खाता खुलने से छात्रवृत्ति की राशि के भुगतान की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा। जिन बच्चों को छात्रवृत्ति मिलती है, उनके खाते खुलवाने पर शिक्षा विभाग ने विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।

प्रधानाध्यापकों को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बैंक प्रबंधकों से करना होगा संपर्क

बच्चों के बैंक खाते खुलवाने की जिम्मेदारी संबंधित सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई है। विभाग ने निर्देश दिया है कि प्रधानाध्यापक अपने क्षेत्र की नजदीकी बैंक शाखा के प्रबंधक से संपर्क करें और स्कूल में नामांकित सभी बच्चों के खाते खुलवाने की प्रक्रिया पूरी कराएं।

इस कार्य को केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे अभियान के रूप में पूरा करने को कहा गया है। प्रधानाध्यापकों को ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके बैंक खाते खुलवाने पर विशेष ध्यान देना होगा, जिन्हें सरकारी छात्रवृत्ति या अन्य योजनाओं का लाभ मिलता है।

बैंक खाते उपलब्ध होने से सरकारी सहायता की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे भुगतान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने और बच्चों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में मुखिया और पंचायत सचिव की भी ली जाएगी मदद

जिन बच्चों के पास अभी तक जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, उनके लिए शिक्षा विभाग ने पंचायत स्तर पर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को संबंधित पंचायत के मुखिया से संपर्क करना होगा। इसके अलावा पंचायत सेवक और अन्य संबंधित कर्मियों की सहायता से बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

विभाग का निर्देश है कि किसी भी बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का काम लंबित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए स्कूल प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल स्थापित किया जाएगा।

शिक्षा विभाग ने जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने और बैंक खाते खुलवाने, दोनों कार्यों को अभियान के तौर पर पूरा करने पर जोर दिया है। इसका मतलब है कि स्कूलों को एक साथ दोनों व्यवस्थाओं पर काम करना होगा, ताकि तय समय के भीतर सभी बच्चों का रिकॉर्ड और बैंकिंग व्यवस्था पूरी की जा सके।

31 दिसंबर 2026 तक पूरा करना होगा पूरा अभियान, स्कूलों को मिली समय-सीमा

शिक्षा विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2026 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है। यानी बिहार के सभी सरकारी स्कूलों को इस तारीख तक प्रत्येक नामांकित बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र की प्रति अपने रिकॉर्ड में रखनी होगी। इसके साथ ही बच्चों के बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

इस समय-सीमा को देखते हुए स्कूल प्रशासन को जल्द से जल्द बच्चों के दस्तावेजों की जांच और बैंक खाते की स्थिति का पता लगाना होगा। जिन बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए संबंधित पंचायत या नगर निकाय से संपर्क करना होगा। इसी तरह जिन बच्चों का बैंक खाता नहीं है, उनके अभिभावकों और बैंक शाखाओं के सहयोग से खाता खुलवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

2014 से चल रहे वित्तीय समावेशन कार्यक्रम से जुड़ा है आदेश

शिक्षा विभाग ने अपने इस निर्देश को केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2014 से संचालित वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तहत जारी निर्देशों के संदर्भ में बताया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत अधिक से अधिक लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

बच्चों का बैंक खाता खुलवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने दोनों कार्यों को आपस में जोड़ते हुए स्कूलों के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने और बैंक खाते खुलवाने की जिम्मेदारी तय की है।

इस पहल से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का जन्म संबंधी रिकॉर्ड व्यवस्थित करने के साथ उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं की राशि सीधे खातों में भेजने की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब दस्तावेज और बैंक खाते पर विशेष जोर

शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद बिहार के सभी सरकारी स्कूलों को बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और बैंक खातों से संबंधित कार्यों में तेजी लानी होगी। प्रधानाध्यापकों के साथ जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को भी इस अभियान को निर्धारित समय में पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। 31 दिसंबर 2026 की समय-सीमा इस पूरी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगी। विभाग का यह कदम बच्चों के आधिकारिक दस्तावेजों का रिकॉर्ड तैयार करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों के माध्यम से पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है।