पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों के आरोपों पर पलटवार करते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को पटना में आयोजित पत्रकार वार्ता में विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बिहार में 12 राजनीतिक दलों की ओर से कुल 1,60,813 बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए गए थे, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान इन एजेंटों की ओर से केवल दो आपत्तियां दर्ज कराई गईं। उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने का आरोप लगा रहा था, तब उसके प्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया में सक्रियता क्यों नहीं दिखाई?
1.60 लाख बीएलए के बावजूद केवल दो आपत्तियां, विपक्ष से मांगा जवाब
पटना के द पनाश कोटिल्य में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भूपेंद्र यादव ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोपों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बिहार में विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 1,60,813 बूथ लेवल एजेंट मौजूद थे। इन एजेंटों को मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नामों की जांच करने और आवश्यक आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया था।
केंद्रीय मंत्री ने इसी आंकड़े को आधार बनाते हुए विपक्ष की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि यदि मतदाता सूची में वास्तव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं थीं, तो राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के प्रतिनिधियों को सामने आकर आपत्तियां दर्ज करानी चाहिए थीं। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में बीएलए होने के बावजूद केवल दो आपत्तियां दर्ज होना विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़ा करता है।
SIR को असंवैधानिक बताने वालों को भूपेंद्र यादव का जवाब, संविधान की धाराओं का किया उल्लेख
भूपेंद्र यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक वैधता पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई या असंवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए अपनाई जाने वाली संवैधानिक व्यवस्था है।
उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 और 326 तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार, मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि देश में इससे पहले आठ बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसलिए इस प्रक्रिया को लेकर संवैधानिक सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका का बचाव किया।
21.53 लाख नए मतदाताओं के नाम जुड़े, 25 लाख मृत मतदाता भी चिह्नित
पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बिहार में एसआईआर के तहत किए गए सत्यापन के आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के दौरान 21 लाख 53 हजार नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए।
वहीं, सत्यापन प्रक्रिया में 25 लाख मृत मतदाता, 36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाता और सात लाख दोहरे नाम वाले मतदाता चिह्नित किए गए। भूपेंद्र यादव के अनुसार, इन आंकड़ों से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आवश्यकता और महत्व स्पष्ट होता है।
उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के साथ राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका भी सुनिश्चित की गई थी। बीएलओ को निर्देश दिया गया था कि वे मतदाताओं के घर तीन बार जाकर सत्यापन करें, ताकि मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों की जांच बेहतर तरीके से की जा सके।
विपक्ष के थिंक टैंक पर भी साधा निशाना, राजनीतिक रणनीति को लेकर उठाए सवाल
भूपेंद्र यादव ने एसआईआर के मुद्दे से आगे बढ़ते हुए विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक रणनीति और उसके थिंक टैंक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की रणनीति तैयार करने वाले समूहों का आम जनता के साथ सीधा जुड़ाव नहीं है।
उन्होंने राजद के थिंक टैंक में आइसा के पूर्व नेतृत्व, कांग्रेस के युवा नेतृत्व में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रभाव और समाजवादी पार्टी के रणनीतिक समूह में जामिया के पुराने नेतृत्व का उल्लेख किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों को चुनावी व्यवस्था पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच अपनी नीतियों और कामकाज के आधार पर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
EVM और चुनावी नतीजों पर विपक्ष के आरोपों को भी किया खारिज
पत्रकारों से बातचीत के दौरान भूपेंद्र यादव ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और चुनावी नतीजों को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने विभिन्न राज्यों के चुनाव परिणामों और पोस्टल बैलेट के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव में हार मिलने के बाद विपक्षी दल अक्सर चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। राजनीतिक दलों को चुनावी नतीजों को स्वीकार करते हुए जनता के बीच अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए। चुनावी प्रक्रिया पर लगातार आरोप लगाने से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का किया जिक्र, लोकतंत्र की मजबूती पर दिया जोर
भूपेंद्र यादव ने बिहार की ऐतिहासिक लोकतांत्रिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार लोकतांत्रिक चेतना, न्यायशास्त्र और जन आंदोलनों की ऐतिहासिक भूमि रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतंत्र की रक्षा के लिए चलाए गए आंदोलन को याद किया।
उन्होंने लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद एक व्यक्ति, एक वोट के सिद्धांत पर टिकी है। इस व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक के मत का समान महत्व है। इसलिए मतदाता सूची का सही और त्रुटिरहित होना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
SIR पर सियासी टकराव के बीच मतदाता सूची की शुद्धता बनी बड़ा मुद्दा
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार चर्चा में है। एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा इस प्रक्रिया को संवैधानिक और आवश्यक बताते हुए उसका बचाव कर रही है। पटना में भूपेंद्र यादव ने 1,60,813 बूथ लेवल एजेंटों के मुकाबले केवल दो आपत्तियों का आंकड़ा सामने रखकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की। उनके बयान से स्पष्ट है कि बिहार में मतदाता सूची का मुद्दा केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन चुका है।
