ere | Source: ereमोतिहारी। मां की एक फोन कॉल, बेटी की जिंदगी बचाने की आखिरी उम्मीद और पुलिस की करीब 500 किलोमीटर लंबी कार्रवाई। पश्चिम बंगाल के एक रेड लाइट इलाके में फंसी बिहार की युवती को सुरक्षित निकालने के लिए केसरिया पुलिस ने ऐसा अभियान चलाया, जिसकी कहानी किसी फिल्मी घटनाक्रम से कम नहीं है। पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान छिपाकर पहले इलाके की गतिविधियों को समझा, फिर एक दलाल के साथ 50 रुपये देकर पूरे बाजार का चक्कर लगाया। इसके बाद कोठे की संचालिका तक पहुंचकर युवती को बाहर निकालने की रणनीति बनाई गई। इस पूरे ऑपरेशन में एक छोटी-सी रकम पुलिस के लिए बड़ा सुराग साबित हुई।

आठ अक्टूबर की सुबह थाने पहुंची मां, बेटी की आवाज सुनकर टूट गई थी हिम्मत

घटना की शुरुआत 8 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब आठ बजे हुई। पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया थाने में एक महिला घबराई हुई हालत में पहुंची। वह सीधे थानाध्यक्ष राहुल से मिलना चाहती थी। जैसे ही थानाध्यक्ष उसके सामने आए, महिला अपने आंसू नहीं रोक सकी। वह फूट-फूटकर रोने लगी और मोबाइल फोन में एक नंबर दिखाते हुए बेटी को बचाने की गुहार लगाने लगी।

महिला ने पुलिस को बताया कि कुछ देर पहले उसकी बेटी का फोन आया था। बेटी ने फोन पर बताया था कि उसे एक बेहद खराब जगह पर रखा गया है और जबरन गलत काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वह वहां से निकलना चाहती थी और अपनी मां से मदद मांग रही थी। हालांकि, बातचीत के कुछ ही देर बाद फोन कट गया। इसके बाद बेटी से दोबारा संपर्क नहीं हो सका।

थानाध्यक्ष राहुल ने बनाई विशेष टीम, मोबाइल लोकेशन से मिला बंगाल का सुराग

महिला की शिकायत मिलते ही थानाध्यक्ष राहुल ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर, राजकुमार राजू, सोनू कुमार और महिला पुलिसकर्मी सुनीता कुमारी को शामिल करते हुए एक विशेष पुलिस टीम गठित की।

पुलिस ने सबसे पहले महिला की ओर से उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लिया। तकनीकी जांच के दौरान मोबाइल की लोकेशन पश्चिम बंगाल के पोंजीपोड़ा रेड लाइट इलाके में मिली। इस जानकारी के बाद पुलिस को आशंका हुई कि युवती को देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया गया है।

500 किलोमीटर का सफर तय कर बंगाल पहुंची केसरिया पुलिस

युवती की सुरक्षित बरामदगी के लिए पुलिस टीम ने उसी दिन पश्चिम बंगाल रवाना होने का फैसला किया। टीम के साथ पीड़िता के पिता को भी ले जाया गया। केसरिया से पोंजीपोड़ा तक करीब 500 किलोमीटर की दूरी तय कर पुलिसकर्मी वहां पहुंचे।

बंगाल पहुंचने के बाद पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ गई। रेड लाइट इलाके में कई गलियां थीं और वहां युवती की मौजूदगी का सटीक पता लगाना आसान नहीं था। पुलिस को यह भी ध्यान रखना था कि उनकी पहचान उजागर न हो। टीम ने कुछ देर आराम करने के बाद शाम होते ही अपनी रणनीति के अनुसार कार्रवाई शुरू की। सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर ने सादे कपड़े पहनकर इलाके के बाहर मोर्चा संभाला।

50 रुपये लेकर सामने आया दलाल, दारोगा को घुमाया पूरा रेड लाइट बाजार

ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ उस समय आया, जब इलाके में घूम रहे एक अधेड़ व्यक्ति की नजर सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर पर पड़ी। वह उनके पास आया और पूछने लगा कि उन्हें क्या चाहिए और कैसी लड़की पसंद है। उसने दावा किया कि 50 रुपये देने पर वह उन्हें पूरा बाजार घुमा सकता है और पसंद की लड़की दिखा सकता है।

मनोज ठाकुर को इसी तरह के व्यक्ति की तलाश थी। उन्होंने बिना अपनी पहचान जाहिर किए दलाल को 50 रुपये दे दिए। इसके बाद वह व्यक्ति उन्हें एक गली से दूसरी गली तक घुमाने लगा। तीसरी गली पार करने के बाद मनोज ठाकुर एक स्थान पर रुक गए और वहां मौजूद एक युवती की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें वही लड़की चाहिए।

कोठे की संचालिका लक्की ने मांगे दो हजार रुपये, एक हजार में तय हुआ सौदा

दलाल इसके बाद सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर को कोठे की संचालिका लक्की के पास लेकर पहुंचा। वहां युवती को उपलब्ध कराने के बदले लक्की ने दो हजार रुपये की मांग की। मनोज ठाकुर ने इसके बदले 500 रुपये देने की बात कही।

दोनों के बीच काफी देर तक मोलभाव चलता रहा। आखिरकार एक हजार रुपये में सौदा तय हुआ। पुलिसकर्मी की योजना के तहत बातचीत आगे बढ़ी और मनोज ठाकुर कोठे के भीतर जाने की तैयारी करने लगे।

मोबाइल जमा कराने पर अड़ी संचालिका, दारोगा ने बातचीत में उलझाए रखा

लक्की बिना मोबाइल जमा कराए मनोज ठाकुर को अंदर जाने देने के लिए तैयार नहीं थी। वहीं, सब इंस्पेक्टर अपना मोबाइल फोन छोड़ना नहीं चाहते थे, क्योंकि मोबाइल के जरिए बाहरी टीम से संपर्क बनाए रखना जरूरी था। इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस होने लगी। स्थिति ऐसी बन गई कि मनोज ठाकुर को कुछ समय के लिए वहां से बाहर निकलना पड़ा।

हालांकि, उन्होंने मौके पर धैर्य बनाए रखा और बातचीत के जरिए संचालिका को उलझाए रखा। इसी दौरान पुलिस की बाकी टीम स्थानीय पुलिस के सहयोग से मौके पर पहुंच गई।

स्थानीय पुलिस के सहयोग से पहुंची टीम, कोठे के अंदर से सुरक्षित निकाली गई युवती

पुलिस की बाकी टीम के मौके पर पहुंचते ही रेड लाइट इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस को देखकर वहां मौजूद कई महिलाएं और अन्य लोग इधर-उधर भागने लगे। इसी बीच सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर कोठे के अंदर पहुंचे और वहां फंसी बिहार की युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

इस तरह केसरिया पुलिस की टीम ने लंबी दूरी तय कर चलाए गए अभियान में मां की बेटी को बरामद करने में सफलता हासिल की। जिस युवती की तलाश में परिवार परेशान था, उसे आखिरकार पुलिस सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब रही।

इस पूरे घटनाक्रम में एक मां की समय पर की गई शिकायत, बेटी की आखिरी फोन कॉल और पुलिस की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण साबित हुई। मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच से पश्चिम बंगाल के पोंजीपोड़ा तक पहुंचने का रास्ता मिला। इसके बाद सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने इलाके की गतिविधियों को समझते हुए युवती तक पहुंचने की रणनीति तैयार की।

केसरिया पुलिस के इस अभियान में 50 रुपये देकर दलाल के साथ बाजार घूमने से लेकर कोठे की संचालिका से बातचीत और स्थानीय पुलिस की मदद से युवती को सुरक्षित निकालने तक कई चुनौतीपूर्ण चरण शामिल रहे। यह घटना बताती है कि संकट में फंसे व्यक्ति की समय पर मिली सूचना और पुलिस की तत्परता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। शादी का झांसा देकर युवती को घर से दूर ले जाने और उसे कथित तौर पर देह व्यापार में धकेलने का यह मामला महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।