नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2026 के नतीजों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी ने पूरी शिक्षा प्रणाली और बोर्ड के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की चेकिंग में नए सिस्टम के इस्तेमाल और उसके बाद री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के नाम पर परीक्षार्थियों से करोड़ों रुपये की फीस वसूली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) और लापरवाही के आरोप
सीबीएसई ने 13 मई 2026 को 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया था, जिसमें ओवरऑल उत्तीर्ण प्रतिशत 85.20% दर्ज किया गया। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत कम था। रिजल्ट आते ही देशभर के हजारों छात्रों ने अपने प्राप्तांकों को लेकर नाराजगी जताई।
इस असंतोष का मुख्य कारण सीबीएसई द्वारा पहली बार लागू किया गया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (CBSE OSM) था। आरोप है कि बिना किसी पूर्व पायलट प्रोजेक्ट या स्ट्रेस टेस्ट के जल्दबाजी में इस डिजिटल चेकिंग सिस्टम को लागू कर दिया गया। इसके कारण कई तरह की गंभीर तकनीकी खामियां सामने आईं:
- उत्तर पुस्तिकाओं और हैंडराइटिंग का आपस में बदल जाना।
- कई प्रश्नों के सही उत्तरों को बिना जांचे छोड़ देना और अंक न देना।
- स्कैन की गई आंसर शीट्स का धुंधला और अधूरा होना।
- विवादित और ब्लैकलिस्टेड वेंडर कंपनी 'कोएम्प्ट एडु टेक' (Coempt Eduteck) को टेंडर दिए जाने के आरोप।
- एथिकल हैकर्स द्वारा OSM पोर्टल के सिक्योरिटी सिस्टम में सेंधमारी और डेटा लीक की संभावना जताए जाना।
शुरुआत में बोर्ड ने इन सभी दावों को खारिज किया, लेकिन संसदीय समिति के कड़े रुख, अदालती याचिकाओं और तकनीकी जांच के बाद आखिरकार सीबीएसई ने माना कि व्यवस्था में त्रुटियां हुई थीं।
री-चेकिंग के नाम पर फीस का चक्रव्यूह
गलती उजागर होने के बाद बोर्ड ने परीक्षार्थियों को राहत देने के बजाय री-चेकिंग की तीन-स्तरीय प्रक्रिया शुरू की। शुरुआती भारी-भरकम फीस के विरोध के बाद बोर्ड ने दरों में कटौती की थी:
- स्कैन कॉपी प्राप्त करने हेतु: ₹100 प्रति विषय (पहले ₹700)
- अंकों के सत्यापन (Verification) हेतु: ₹100 प्रति विषय (पहले ₹500)
- पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) हेतु: ₹25 प्रति प्रश्न (पहले ₹100)
सीबीएसई ने वादा किया था कि यदि किसी छात्र का 1 अंक भी बढ़ता है, तो उससे ली गई पूरी फीस रिफंड कर दी जाएगी।
RTI का सनसनीखेज दावा: ₹16.47 करोड़ की कमाई
हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा दाखिल की गई RTI रिपोर्ट से मिले आंकड़ों के अनुसार, सीबीएसई ने 12वीं की री-चेकिंग प्रक्रिया के जरिए कुल ₹16.47 करोड़ एकत्रित किए।
प्राप्त विवरण के मुताबिक:
- स्कैन आंसर शीट्स के अनुरोधों से: ₹11.37 करोड़ (अनऑडिटेड)
- सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से: ₹5.10 करोड़ (अनऑडिटेड)
बोर्ड ने यह भी स्वीकार किया कि जिन छात्रों के अंक पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़े, उन्हें रिफंड के रूप में केवल ₹3.57 करोड़ वापस दिए गए। यह ली गई कुल राशि का मात्र 21.68% है।
प्रशासनिक खामियां और अनुत्तरित सवाल
RTI से यह चौकाने वाली जानकारी भी सामने आई कि सीबीएसई के वित्त विभाग के पास OSM वेंडर 'कोएम्प्ट एडु टेक' को किए गए भुगतान का कोई स्वीकृत आदेश (Approval Order) रिकॉर्ड में नहीं था। साथ ही, कंपनी पर किसी तरह का जुर्माना लगाया गया या नहीं, इसकी जानकारी भी वित्त विभाग के पास उपलब्ध नहीं थी।
इसके अतिरिक्त, सीबीएसई ने यह स्पष्ट करने से परहेज किया कि कुल कितने छात्रों को रिफंड मिला, कितने अलग-अलग विद्यार्थियों ने आवेदन किया था और विषय-वार अंकों में क्या सुधार हुए। आंकड़ों के अनुसार, 26 मई तक 11,37,560 स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं छात्रों को भेजी गई थीं, जो शुरुआती आवेदनों से तीन गुना अधिक थीं।
इस खुलासे के बाद अब छात्र संगठन और अभिभावक बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं कि अपनी तकनीकी चूक की कीमत परीक्षार्थियों की जेब से क्यों वसूल की गई।
