ere | Source: ereहर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा समझदार, आत्मविश्वासी और जीवन में सफल बने। इसके लिए वे बच्चों को हर छोटी-बड़ी बात समझाते हैं और कई बार उनके सवालों का जवाब देने के साथ हर समस्या का समाधान भी खुद ही बता देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों को समझदार बनाने के लिए माता-पिता को कभी-कभी अनजान या 'मूर्ख' बनने का अभिनय भी करना चाहिए? प्रोफेसर डॉ. अनिल योगी ने अपनी एक सलाह में इसी बात पर जोर दिया है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे खुद सोचें, सवाल करें और अपनी समझ विकसित करें, तो उन्हें हर समय सर्वज्ञानी बनने से बचना चाहिए। बच्चों को खुद जवाब खोजने और अपनी बात समझाने का अवसर देना उनकी बौद्धिक क्षमता को विकसित करने में मदद कर सकता है।

बच्चों के सामने हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं

प्रोफेसर डॉ. अनिल योगी के मुताबिक, कई बार माता-पिता अपनी समझदारी दिखाने के चक्कर में बच्चों को सोचने का पर्याप्त मौका नहीं देते। बच्चा किसी सवाल का जवाब खोजने की कोशिश करता है, तो माता-पिता तुरंत उसे सही उत्तर बता देते हैं। इससे बच्चा खुद विचार करने और समस्या का हल निकालने के अभ्यास से दूर रह सकता है।

उनका कहना है कि माता-पिता को कभी-कभी ऐसा व्यवहार करना चाहिए, जैसे उन्हें किसी सवाल का जवाब नहीं पता। इससे बच्चा खुद सोचने, अपनी जानकारी साझा करने और माता-पिता को समझाने की कोशिश करता है।

अहंकार और समझदारी के बीच का संबंध

डॉ. योगी ने समझदारी और अहंकार के संबंध पर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार, वास्तविक समझदारी का अर्थ हर समय अपनी जानकारी का प्रदर्शन करना नहीं है। कई बार अधिक समझ रखने वाला व्यक्ति शांत रहता है, जबकि सतही ज्ञान रखने वाला व्यक्ति अपनी बात को अधिक जोर-शोर से साबित करने की कोशिश करता है।

इसलिए बच्चों की परवरिश में माता-पिता का विनम्र रहना और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण है। बच्चे के हर सवाल पर तुरंत जवाब देने के बजाय उससे भी सवाल पूछना उसकी सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ावा दे सकता है।

बेटी से सवाल पूछकर सिखाते थे समझदारी

प्रोफेसर डॉ. अनिल योगी ने अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उनकी बेटी छोटी थी, तब वह उससे अक्सर पूछते थे कि यह क्या है? ऐसा नहीं था कि उन्हें उस चीज के बारे में जानकारी नहीं होती थी, बल्कि वह जानबूझकर बेटी से सवाल करते थे।

जब बच्ची को लगता था कि उसे अपने पिता को कुछ समझाना है, तो वह खुद उस विषय पर सोचती और जवाब देने की कोशिश करती थी। इस प्रक्रिया में उसे अपनी जानकारी व्यक्त करने और आत्मविश्वास के साथ बात रखने का मौका मिलता था।

बच्चों को खुद सोचने और सीखने का मौका दें

इस सलाह का मूल संदेश यह है कि बच्चों की हर समस्या का समाधान माता-पिता खुद न करें। उन्हें छोटे-छोटे फैसले लेने, सवालों के जवाब खोजने और गलतियों से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। माता-पिता मार्गदर्शन जरूर करें, लेकिन हर कदम पर उनकी जगह फैसला लेने से बचें।

बच्चों को समझदार बनाने के लिए जरूरी है कि घर का माहौल ऐसा हो, जहां वे बिना झिझक सवाल पूछ सकें, अपनी राय रख सकें और नई चीजें सीखने की कोशिश करें। कभी-कभी माता-पिता का अनजान बनना बच्चों को अपनी समझ और क्षमता दिखाने का अवसर दे सकता है।