आज के आधुनिक और पढ़े-लिखे समाज में भी क्या बच्चों की परवरिश की सारी जिम्मेदारी सिर्फ मां की ही होती है? इस सवाल पर सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो बवाल मचा रहा है, जिसे देखने के बाद हर कोई हैरान है और सोचने पर मजबूर हो गया है। कंटेंट क्रिएटर गौरव अग्रवाल ने भारतीय समाज की उस दबी हुई मानसिकता पर करारा प्रहार किया है, जहां पिता के थोड़े से सहयोग को भी बहुत बड़ा एहसान मान लिया जाता है। आइए जानते हैं इस वायरल वीडियो के पीछे की पूरी और चौंकाने वाली सच्चाई।
जरा सा काम करने पर क्यों मिलने लगती है आसमान छूती तारीफ?
वायरल हो रहे इस वीडियो में गौरव अग्रवाल ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे शब्दों में उन पिताओं की पोल खोली है जो घर में थोड़ा सा भी हाथ बंटाकर खुद को बहुत बड़ा तीरंदाज समझने लगते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई भारतीय पिता अपने ही बच्चे का 'चींटी बराबर' यानी बेहद मामूली सा भी काम कर दे, तो आसपास के लोग और रिश्तेदार उसकी ऐसे तारीफ करने लगते हैं जैसे उसने कोई जंग जीत ली हो। समाज तुरंत यह ढोल पीटने लगता है कि देखो-देखो, कितना महान पति है जो अपनी पत्नी की इतनी मदद करता है।
'वो बच्चे का सगा बाप है, कोई दूर का मेहमान या रिश्तेदार नहीं!'
अपनी बात को और गहराई से रखते हुए गौरव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि लोग यह बुनियादी बात क्यों भूल जाते हैं कि वो इंसान उस बच्चे का सगा बाप है, न कि कोई ऐसा दूर का रिश्तेदार जो घर में आया, खाया-पिया और चुपचाप खिसक लिया। जब इस दुनिया में बच्चे को लाने वाले दो ही लोग हैं—एक मां और दूसरा पिता—तो फिर हर परिस्थिति में सिर्फ मां को ही आगे क्यों धकेल दिया जाता है? समाज ने यह नियम क्यों बना लिया है कि बच्चों की देखभाल का सारा ठेका केवल महिलाओं का ही है?
महिलाओं की सोच पर भी उठाया गया है एक बड़ा सवाल
सिर्फ पुरुषों ही नहीं, बल्कि इस वीडियो में भारतीय महिलाओं की उस भोली सोच का भी जिक्र किया गया है जो कई बार खुद ही अपने पतियों के प्रति जरूरत से ज्यादा उदार हो जाती हैं। महिलाओं को यह लगने लगता है कि अगर उनका पति थोड़ा सा भी बच्चा संभाल ले, तो मानो उसने कोई पहाड़ तोड़ दिया हो या बहुत बड़ी मजदूरी कर ली हो। समाज की इस कंडीशनिंग की वजह से महिलाओं के मन में यह घर कर गया है कि चूंकि 9 महीने का गर्भकाल, लेबर पेन और पोस्टपार्टम का दर्द मां ने सहा है, तो बच्चे की सारी जिम्मेदारियां भी अकेली मां को ही उठानी चाहिए।
पेरेंटिंग में पिता की बराबर भागीदारी क्यों है आज की सबसे बड़ी जरूरत?
गौरव अग्रवाल के इस बेबाक वीडियो ने भले ही व्यंग्यात्मक लहजे में अपनी बात रखी हो, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही गंभीर और कड़वा सामाजिक सच छिपा है। आज भी कई घरों में महिलाएं बच्चों की परवरिश और घर की भागदौड़ के बीच मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर टूट जाती हैं कि वे डिप्रेशन का शिकार होने लगती हैं। यह समय की मांग है कि समाज इस पुरानी सोच को बदले और समझे कि पेरेंटिंग कोई एहसान नहीं, बल्कि मां और पिता दोनों की संयुक्त और बराबर की जिम्मेदारी है।
