मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के गोरेगांव इलाके में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां एक रिहायशी इमारत की छठी मंजिल से 18 महीने के बच्चे को नीचे फेंकने का आरोप 10 साल की एक बच्ची पर लगा है। इस घटना में मासूम की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए नाबालिग बच्ची और उसकी मां को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है।
CCTV में कैद हुई घटना, छठी मंजिल से नीचे गिरा मासूम
यह घटना बुधवार रात करीब 9 बजे गोरेगांव स्थित शिवशाही बिल्डिंग में हुई। पुलिस के मुताबिक, इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना से जुड़े दृश्य रिकॉर्ड हुए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फुटेज में कथित तौर पर 10 साल की बच्ची बच्चे को उठाकर छठी मंजिल से नीचे फेंकती दिखाई देती है। पुलिस अधिकारी के अनुसार, फुटेज में बच्चे को ऊंचाई से गिरते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद बच्ची गलियारे की दूसरी ओर भागती नजर आती है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ समय बाद वह उसी मंजिल के गलियारे में साइकिल चलाती भी दिखाई देती है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें वास्तव में क्या-क्या हुआ था।
बिल्ली को लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद की बात आई सामने
पुलिस के अनुसार, पीड़ित परिवार 1 अक्टूबर को ही शिवशाही बिल्डिंग में रहने आया था। बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया है कि दोनों परिवारों के बीच एक बिल्ली को लेकर विवाद चल रहा था। हालांकि, इस विवाद की वास्तविक वजह और घटना से उसका संबंध अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। पीड़ित परिवार ने यह आरोप भी लगाया है कि घटना को छिपाने के उद्देश्य से बच्ची के परिवार ने इमारत के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए थे। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि कैमरों को बंद किए जाने का आरोप सही है या नहीं और यदि ऐसा हुआ, तो इसके पीछे क्या कारण था। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिवारों के बीच कथित विवाद, घटना से पहले की परिस्थितियों और सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाली गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
10 साल की बच्ची की मानसिक स्थिति को लेकर भी जांच
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, 10 साल की बच्ची के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बच्ची मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थी। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कथित मानसिक स्वास्थ्य समस्या का घटना से कोई संबंध था या नहीं। ऐसे में पुलिस जांच के दौरान बच्ची की उम्र, परिस्थितियों और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को ध्यान में रखा जाना महत्वपूर्ण है। केवल शुरुआती दावों के आधार पर घटना के कारण या बच्ची की मानसिक स्थिति के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
पुलिस ने दर्ज की ADR, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
इस मामले में डिंडोशी पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, ताकि मौत से संबंधित चिकित्सकीय तथ्यों की जांच हो सके। पुलिस ने नाबालिग बच्ची को हिरासत में लिया है और उसकी मां को भी कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू की है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, परिवारों के बयान और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भूमिका अहम मानी जा रही है। चूंकि आरोप एक 10 साल की बच्ची पर लगा है, इसलिए मामले में आगे की कार्रवाई करते समय नाबालिग से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करना आवश्यक होगा। पुलिस की जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही घटना की परिस्थितियों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
मासूम की मौत से परिवार सदमे में, न्याय की मांग
18 महीने के बच्चे की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों ने मामले में न्याय और सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। घटना ने रिहायशी इमारतों में बच्चों की सुरक्षा और पड़ोसियों के बीच विवादों को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। हालांकि, इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के परिणामों का इंतजार करना जरूरी है।
