नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के भिलाई में कभी सड़क किनारे जूस की दुकान चलाने वाला एक युवक देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये के कथित अवैध कारोबार का मुख्य आरोपी बन गया। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सौरभ चंद्राकर की कहानी अब देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में से एक के केंद्र में है। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के जरिए करीब 6000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप है। कभी कपड़ों की दुकान में नौकरी करने वाले सौरभ की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि दुबई में 200 करोड़ रुपये की भव्य शादी, विदेशों में आलीशान ठिकाने और देशभर में फैले सट्टेबाजी नेटवर्क की चर्चा होने लगी। अब ओमान से प्रत्यर्पित होकर भारत लाए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों की पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज सामने आने की उम्मीद है।
भिलाई की जूस दुकान से हजारों करोड़ के साम्राज्य तक पहुंचा सौरभ
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार, सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का निवासी है। उसके पिता नगर निगम में पंप ऑपरेटर के पद पर काम करते थे। सौरभ ने शुरुआती दिनों में कपड़ों की दुकान में नौकरी की और बाद में सड़क किनारे जूस की दुकान चलाने लगा। सामान्य जीवन जीने वाले सौरभ ने वर्ष 2019 में दुबई का रुख किया। वहां उसने अपने साथी रवि उत्पल को भी बुलाया। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर महादेव ऐप की शुरुआत की। देखते ही देखते इस ऐप के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और ताश सहित विभिन्न खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने का नेटवर्क तैयार किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, धीरे-धीरे यह नेटवर्क देशभर में फैल गया और हजारों करोड़ रुपये के अवैध कारोबार का रूप ले लिया।
फ्रेंचाइजी और पैनल के जरिए देशभर में फैलाया सट्टेबाजी का जाल
महादेव ऐप के कथित नेटवर्क को संचालित करने के लिए फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और शाखाओं का इस्तेमाल किया जाता था। जांच के मुताबिक, इन पैनलों के माध्यम से नए लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे रकम जमा कराई जाती थी। नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर एजेंट और संचालक काम करते थे, जिससे इसका विस्तार कई शहरों तक हो गया। सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय बड़ी संख्या में कथित फर्जी बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजा जाता था। कई स्तरों पर लेनदेन के बाद रकम हवाला के माध्यम से विदेश पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस संगठित व्यवस्था के कारण अवैध कारोबार का पता लगाना और उसके वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
6000 करोड़ रुपये के मामले में सीबीआई और ईडी की जांच
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली थी। इसके बाद मामले में वित्तीय लेनदेन, कथित धोखाधड़ी और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू की गई। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित कानूनी प्रावधानों के साथ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किए हैं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की। ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य कथित अवैध कमाई का पता लगाना, संपत्तियों की पहचान करना और रकम को वैध बनाने के लिए अपनाए गए तरीकों का खुलासा करना है।
दुबई में 200 करोड़ रुपये की शादी ने खींचा देशभर का ध्यान
सौरभ चंद्राकर की कथित 200 करोड़ रुपये की भव्य शादी भी इस पूरे मामले में चर्चा का बड़ा विषय रही है। बताया जाता है कि उसने दुबई में बेहद आलीशान समारोह आयोजित किया था, जिसमें बॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियां शामिल हुई थीं। शादी में शामिल होने के लिए भारत से रिश्तेदारों को दुबई ले जाने के वास्ते निजी विमानों की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई थी। इस भव्य आयोजन के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद सौरभ की संपत्ति और कमाई के स्रोत को लेकर सवाल उठने लगे। जांच एजेंसियों ने भी इस आयोजन पर खर्च की गई रकम और कथित सट्टेबाजी कारोबार से होने वाली आय के बीच संबंधों की पड़ताल की। इसके बाद महादेव ऐप का मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया।
पुलिसकर्मियों से लेकर अधिकारियों और फिल्मी हस्तियों तक जांच का दायरा
महादेव ऐप मामले में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ईडी ने भारत और विदेशों के विभिन्न शहरों में छापेमारी की है। जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि अनेक लोगों से पूछताछ भी की गई। मामले की जांच के दायरे में पुलिसकर्मी, वरिष्ठ अधिकारी, नौकरशाह, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग, मीडियाकर्मी और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आने की बात कही गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित सट्टेबाजी नेटवर्क को किन लोगों से मदद मिली और उसके संचालन में किसकी क्या भूमिका थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित अवैध कमाई का इस्तेमाल किन संपत्तियों, कारोबारों और अन्य गतिविधियों में किया गया।
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान में पकड़ा गया सौरभ
केंद्रीय जांच ब्यूरो के प्रवक्ता के अनुसार, महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसी नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने मामले से संबंधित साक्ष्य जुटाकर ओमान सरकार के समक्ष औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव प्रस्तुत किया। दोनों देशों के बीच कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौरभ को भारत लाया गया। सीबीआई की एक टीम उसे मस्कट से लेकर भारत पहुंची। अब भारतीय जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और विदेशों में मौजूद संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश करेंगी।
ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस के सहयोग की सीबीआई ने की सराहना
सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की प्रक्रिया में सहयोग के लिए सीबीआई ने ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है। एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ संयुक्त प्रयासों का उदाहरण है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि महादेव ऐप से होने वाली कथित कमाई का एक हिस्सा कुछ सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था। अब सौरभ की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पूछताछ के दौरान नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, कथित आर्थिक लेनदेन, विदेशी ठिकानों और सट्टेबाजी से अर्जित संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जाएगी। महादेव ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
