नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को आयोजित इंडिया गठबंधन की महारैली के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित विपक्ष के कई बड़े नेता इस रैली में एक मंच पर नजर आए। वहीं, काटजू ने इन सभी नेताओं को लेकर ऐसा गणित पेश किया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
मार्कंडेय काटजू का विपक्षी नेताओं पर तीखा तंज
पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर विपक्षी नेताओं के एक साथ आने को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ''आज की रैली में राहुल + खरगे + अखिलेश + तेजस्वी + ममता = 0+0+0+0+0=0''। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि इन नेताओं के एक साथ मंच साझा करने से भी कोई राजनीतिक फायदा नहीं होने वाला है।
काटजू की इस पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शून्य के गणित ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी टिप्पणी को विपक्षी एकजुटता पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है और इसे किसी चुनावी नतीजे या राजनीतिक आकलन का आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
रामलीला मैदान की रैली पर भी किया व्यंग्य
मार्कंडेय काटजू ने केवल विपक्षी नेताओं पर ही टिप्पणी नहीं की, बल्कि रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर भी व्यंग्य किया। उन्होंने अपनी एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि किसी व्यक्ति ने उन्हें संदेश भेजकर कहा कि वह रामलीला मैदान में मौजूद है। इस पर काटजू ने जवाब दिया, ''आप राम का रोल कर रहे हैं या रावण का?''
उनकी इस टिप्पणी को भी रैली के संदर्भ में किया गया व्यंग्य माना जा रहा है। दोनों पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने उनकी टिप्पणियों का समर्थन किया, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर की गई टिप्पणी बताया।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दिए दिलचस्प जवाब
मार्कंडेय काटजू की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में मनोरंजन भी होना चाहिए और कुछ नहीं करने से बेहतर है कि कुछ किया जा रहा है। वहीं, एक अन्य यूजर ने उन्हें सलाह देते हुए लिखा कि इस उम्र में तनाव नहीं लेना चाहिए और आराम करना चाहिए।
एक दूसरे यूजर ने काटजू की टिप्पणी पर असहमति जताते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि यह बात जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर कही गई है और इसमें सुधार किया जाना चाहिए। इस तरह उनकी पोस्ट पर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
क्यों जुटे थे विपक्ष के बड़े नेता?
दरअसल, इंडिया गठबंधन ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित की थी। इस रैली का प्रमुख मुद्दा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर सवाल उठाना था। विपक्षी दलों ने निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सार्वजनिक कीं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से रैली में दस लाख लोगों की भीड़ जुटने का दावा किया गया।
विपक्षी नेताओं ने अपने भाषणों में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इस विषय पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर भी साधा निशाना
रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश की आत्मा और संविधान पर हमला किया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश का गला घोंटने के अपराध के कारण वह रात में सो नहीं पा रहे हैं।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी रात में सो नहीं पा रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कथित वोट चोरी के मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस मुद्दे पर विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का बड़ा बयान
रैली के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से हटेंगे और जेल जाएंगे। राहुल गांधी ने उनके खिलाफ देशद्रोह से संबंधित आरोपों का भी उल्लेख किया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करने की बात कही।
राहुल गांधी के इन बयानों ने रैली के राजनीतिक संदेश को और आक्रामक बना दिया। दूसरी ओर, मार्कंडेय काटजू की टिप्पणियों ने विपक्षी नेताओं की एकजुटता और रैली के राजनीतिक प्रभाव को लेकर सोशल मीडिया पर अलग बहस शुरू कर दी।
विपक्षी एकजुटता और काटजू की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
रामलीला मैदान की महारैली में विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को गठबंधन की एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। वहीं, मार्कंडेय काटजू ने अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में इसी एकजुटता पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी कर दी। एक तरफ विपक्षी नेता चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरते नजर आए, तो दूसरी तरफ काटजू की पोस्ट ने राजनीतिक बहस को एक अलग दिशा दे दी।
कुल मिलाकर, 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली जहां विपक्षी दलों के लिए चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का मंच बनी, वहीं पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू की टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बन गईं। उनके शून्य वाले गणित ने विपक्षी नेताओं की राजनीतिक एकजुटता पर एक नया व्यंग्यात्मक सवाल खड़ा कर दिया।
