erer | Source: ereनई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित इंडिया गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे लोग ही वोटों की चोरी करवा रहे हैं। तेजस्वी ने कहा कि ऐसे लोगों की असलियत सामने आ चुकी है और वे ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने इन्हें डरपोक बताते हुए कहा कि जो लोग लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास करते हैं, वे लंबे समय तक नहीं टिकते।

ज्ञानेश कुमार पर तेजस्वी का सीधा निशाना, वोट चोरी करवाने का लगाया आरोप

दिल्ली में आयोजित इस महारैली में शामिल होने पहुंचे तेजस्वी यादव ने कहा कि देश में जिस तरीके से कथित तौर पर वोटों की चोरी हो रही है और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है, उसके खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग संविधान को खत्म करना चाहते हैं और नागरिकों के अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रहे हैं। तेजस्वी के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा करना बेहद जरूरी हो गया है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा वोटों की चोरी करवाए जाने को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों की असलियत सामने आ गई है और ये ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे। तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र को कुचलने वाले लोग लंबे समय तक नहीं टिकते। इसलिए सभी विपक्षी दल देश के संविधान को बचाने के लिए एक साथ आए हैं।

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन

तेजस्वी यादव ने रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली बताते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन में कई राजनीतिक दल शामिल हैं और इस अभियान को आम जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दलों का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाई गई सामूहिक आवाज है।

उनका कहना था कि देश को बचाने, लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करने और संविधान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विपक्षी दल एक मंच पर आए हैं। तेजस्वी ने रैली में आम लोगों की भागीदारी को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि जनता का सहयोग इस आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रहा है।

खरगे के आवास से शुरू हुआ विपक्षी नेताओं का मार्च, कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान पहुंचे नेता

रैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी दलों के नेता एकत्र हुए। यहां से सभी नेता खुले वाहनों में सवार होकर दिल्ली के कनॉट प्लेस पहुंचे। इसके बाद विरोध मार्च शुरू हुआ, जिसका समापन रामलीला मैदान में होना था। मैदान में पहुंचकर गठबंधन के वरिष्ठ नेता रैली को संबोधित कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम के माध्यम से विपक्षी दलों ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधने के साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। यह आयोजन शनिवार को मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही के अगले दिन किया गया। इस कार्यक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं।

छात्रों, युवाओं, महिलाओं और श्रमिकों से भी रैली में शामिल होने की अपील

इंडिया गठबंधन की इस महारैली में भाग लेने के लिए विभिन्न राज्यों से विपक्षी दलों के नेता और समर्थक शनिवार से ही दिल्ली पहुंचने लगे थे। गठबंधन की ओर से छात्रों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों से मार्च और महारैली में शामिल होने की अपील की गई थी। कुछ छात्र संगठनों ने भी इस कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया।

विपक्षी दलों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। गठबंधन लगातार निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के कारण आम मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

रामलीला मैदान में तिरंगे से सजा मुख्य मंच, 10 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद

रविवार सुबह से ही रामलीला मैदान में रैली में शामिल होने के लिए लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। कार्यक्रम स्थल पर वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के लिए एक विशाल मुख्य मंच तैयार किया गया है। इस मंच पर तिरंगे के रंगों से सजा बड़ा शामियाना लगाया गया है। वहीं, इंडिया गठबंधन की विभिन्न प्रदेश इकाइयों के प्रतिनिधियों के लिए अलग मंच की व्यवस्था की गई है।

रैली में संभावित भीड़ को लेकर गठबंधन और दिल्ली पुलिस के अनुमान में बड़ा अंतर सामने आया। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इस कार्यक्रम में करीब 10 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई थी, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों के जुटने का था। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए।

4 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी

रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इसके अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रामलीला मैदान को 14 अलग-अलग जोन में बांटा गया।

कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से भीड़ की आवाजाही और कार्यक्रम स्थल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

रैली के कारण दिल्ली में यातायात प्रतिबंध, सुबह 10 से शाम 5 बजे तक पाबंदियां

महारैली को देखते हुए दिल्ली के कई हिस्सों में रविवार को यातायात संबंधी प्रतिबंध लागू किए गए। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कई मार्गों पर आवाजाही प्रभावित रहने की व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यातायात नियंत्रण के उपाय किए गए।

रविवार को आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी का मुद्दा रहा। इंडिया गठबंधन के नेता लगातार निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रियाओं से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर तेज हुआ राजनीतिक टकराव

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इस महारैली के जरिए विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही का मुद्दा फिर से प्रमुखता से उठाया है। तेजस्वी यादव के बयान ने इस राजनीतिक विरोध को और आक्रामक रूप दे दिया। एक ओर विपक्षी दल कथित वोट चोरी और मतदाता अधिकारों के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग को घेर रहे हैं, वहीं निर्वाचन आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

कुल मिलाकर, ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के जरिए इंडिया गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर अपनी राजनीतिक लड़ाई को तेज करने का संदेश दिया है। तेजस्वी यादव के तीखे बयानों से दिल्ली की इस रैली में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।