ere | Source: ereबक्सर। बिहार में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है। चक्रवात, तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिन खेतों में कुछ ही दिनों बाद सुनहरी फसल की कटाई होनी थी, वहां अब तेज हवाओं से गिरी फसल और बारिश के पानी से भरे खेत किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के इस बदले स्वरूप ने किसानों के सामने आर्थिक संकट की आशंका खड़ी कर दी है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए रेडक्रॉस बक्सर के सचिव सह समाजसेवी श्रवण तिवारी ने बिहार सरकार से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए फसल नुकसान का आकलन कराया जाए और प्रभावित परिवारों को बिना देरी किए उचित मुआवजा दिया जाए।

तैयार धान की फसल पर मौसम की मार, किसानों की बढ़ी चिंता

बिहार के विभिन्न इलाकों में चक्रवात और लगातार हो रही बारिश के कारण खेती-किसानी प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो गई है। तेज हवाओं के चलते कई स्थानों पर खेतों में तैयार धान की फसल गिर गई है। वहीं, लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने से फसल को बचाना किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि महीनों की मेहनत के बाद धान की फसल कटाई के लिए तैयार होती है। ऐसे समय में प्राकृतिक आपदा का सामना करना उनके लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है। खेती पर निर्भर परिवारों के सामने अब तैयार उपज को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की चुनौती है।

श्रवण तिवारी बोले- किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ सकती सरकार

रेडक्रॉस बक्सर के सचिव श्रवण तिवारी ने कहा कि किसानों ने दिन-रात मेहनत करके अपनी फसल तैयार की थी। बीज, खाद, सिंचाई और खेती से जुड़े दूसरे कार्यों पर उन्होंने अपनी जमा पूंजी और संसाधन लगाए थे। अब जब फसल घर लाने का समय आया है, तब प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी को केवल मौसम की मार मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह उनके परिवार की आजीविका और पूरे कृषि क्षेत्र से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे कठिन समय में सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराए।

फसल नुकसान का तत्काल और पारदर्शी सर्वे कराने की मांग

श्रवण तिवारी ने बिहार सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में धान सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का अविलंब सर्वे कराया जाए। सर्वे की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रभावित किसान का नाम सहायता सूची से छूटने न पाए।

उन्होंने कहा कि वास्तविक नुकसान का सही आकलन होने के बाद किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। प्राकृतिक आपदा के कारण जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें राहत उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से भी किसानों की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की।

खेतों से पानी निकालने और फसल बीमा का लाभ दिलाने पर जोर

श्रवण तिवारी ने प्रभावित खेतों में जमा बारिश के पानी की तत्काल निकासी की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि खेतों में पानी जमा रहने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित किसानों को कृषि सहायता और फसल बीमा योजना का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर सहायता मिलनी चाहिए। आपदा की इस घड़ी में सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की मांग

मौजूदा हालात को देखते हुए श्रवण तिवारी ने बिहार सरकार से प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि फसल खराब होने से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में केवल नुकसान का आकलन कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक रूप से संभालने के लिए ठोस सहायता भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण नहीं करता, बल्कि पूरे देश की खाद्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खेतों में उसकी मेहनत से ही लोगों की थाली तक अनाज पहुंचता है। इसलिए जब किसान प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होता है, तो उसके साथ खड़ा होना सरकार, प्रशासन और समाज सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है।

श्रवण तिवारी ने अपने संदेश में कहा, “अन्नदाता बचेगा, तभी देश आगे बढ़ेगा। किसान की खुशहाली ही देश की खुशहाली है।” उन्होंने बिहार सरकार से आग्रह किया कि किसानों की मौजूदा परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर संज्ञान में लिया जाए और प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत तथा उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

चक्रवात, तेज आंधी और मूसलाधार बारिश से पैदा हुई परिस्थितियों ने एक बार फिर खेती को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बना दिया है। तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका के बीच किसानों को अब सरकारी सहायता की जरूरत है। श्रवण तिवारी की मांग है कि फसल क्षति का सही आकलन, जलनिकासी, बीमा भुगतान और विशेष राहत पैकेज जैसे कदम समय पर उठाए जाएं, ताकि प्रभावित किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।