ere | Source: reअमरावती/विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान अर्नब का प्रभाव तेज होने लगा है। समुद्र में उठती ऊंची लहरों और तेज हवाओं के बीच तूफान के तट से टकराने की प्रक्रिया शुरू होने की सूचना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया काकीनाडा के पास यानम क्षेत्र के आसपास चल रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात के लैंडफॉल के दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि तेज झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। तूफान की गंभीरता को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोगों को घरों के भीतर रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

तूफान की गति बढ़ने से बदला लैंडफॉल का अनुमान

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात अर्नब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय था और पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 18 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की शाम 5:30 बजे यह काकीनाडा से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से 170 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम और मछलीपट्टनम से 170 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में स्थित था। तूफान की रफ्तार अनुमान से अधिक होने के कारण इसके तट से टकराने के समय में बदलाव हुआ है। पहले लैंडफॉल दोपहर तक होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन बाद में इसके बुधवार तड़के दो बजे से सुबह चार बजे के बीच यानम-काकीनाडा क्षेत्र के पास पूरा होने का अनुमान व्यक्त किया गया।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू लगातार ले रहे हालात की जानकारी

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू चक्रवात की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि तूफान ने तट के पास पहुंचना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं और चक्रवात की दिशा, गति तथा संभावित प्रभाव को लेकर नियमित जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों के साथ कई समीक्षा बैठकें भी की हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान बचाना, संवेदनशील इलाकों से नागरिकों को सुरक्षित निकालना और संभावित नुकसान को कम करना है। प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा

चक्रवात अर्नब के आगे बढ़ने के साथ ही आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जिलों में मौसम का खतरा बढ़ गया है। श्रीकाकुलम में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। वहीं, विशाखापत्तनम और काकीनाडा में तेज हवाओं का असर महसूस किया जाने लगा है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और हवा की गति बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में जोखिम बढ़ सकता है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को समुद्र तटों और जोखिम वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि तूफान के तट पार करने के बाद भी बारिश और तेज हवाओं का असर जारी रह सकता है। ऐसे में लैंडफॉल की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

करीब 4,000 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार, चिकित्सा सेवाएं भी अलर्ट

चक्रवात की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव की तैयारियां की गई हैं। दोनों राज्यों में करीब 4,000 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार रखे गए हैं, जबकि संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। आंध्र प्रदेश सरकार ने 20 जिलों में 2,131 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार रखे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 1,087 चिकित्सा टीमों को सतर्क किया गया है। इसके अलावा, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए 8,281 बिस्तरों और 1,274 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। प्रशासन के अनुसार, 1,351 गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में पहुंचाया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

राशन की कमी रोकने के लिए दो महीने का जरूरी भंडार

चक्रवात के दौरान खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी तैयारी की गई है। आंध्र प्रदेश में राशन दुकानों में दो महीने का आवश्यक भंडार रखा गया है। इसका उद्देश्य प्रभावित इलाकों में आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में लोगों को जरूरी सामान उपलब्ध कराना है। राहत शिविरों, चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन परिवहन की व्यवस्था के साथ प्रशासन का जोर इस बात पर है कि तूफान के दौरान नागरिकों को आवश्यक सुविधाओं की कमी का सामना न करना पड़े। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

रेलवे और हवाई यातायात पर असर, 50 से अधिक ट्रेनें रद्द

चक्रवात अर्नब का असर रेल और हवाई यातायात पर भी पड़ने लगा है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में कम से कम 50 ट्रेनें रद्द की गई हैं। इनमें दक्षिण तटीय रेलवे की बुधवार के लिए निर्धारित 24 ट्रेनें और ईस्ट कोस्ट रेलवे की 22 ट्रेनें शामिल हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे ने भी चार ट्रेनें रद्द की हैं। इस तरह अलग-अलग रेलवे क्षेत्रों में ट्रेन सेवाओं को लेकर एहतियाती कदम उठाए गए हैं। रेलवे अधिकारियों ने लगभग 600 किलोमीटर रेल पटरियों पर निगरानी बढ़ा दी है, ताकि तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान किसी भी संभावित जोखिम पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। तूफान के दौरान और उसके बाद रेल सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल करने के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।

विमान सेवाएं प्रभावित, तटीय सड़कों पर भी प्रतिबंध

चक्रवात के कारण हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। विजयवाड़ा से चेन्नई और बेंगलुरु जाने वाली इंडिगो की दो उड़ानें मंगलवार को रद्द कर दी गईं। इसके अतिरिक्त, कई तटीय सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन कदमों का उद्देश्य यात्रियों को तेज हवाओं, भारी बारिश और अन्य संभावित खतरों से बचाना है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें। विशेष रूप से समुद्र तटों के आसपास और तेज हवाओं से प्रभावित होने वाले मार्गों पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

ओडिशा में 48 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी

चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा में भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान की तैयारी की गई है। राज्य में करीब 48,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए 135 स्थायी और लगभग 1,600 अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और अग्निशमन सेवाओं की कुल 294 टीमें तैनात की गई हैं। राज्य के आठ जिलों में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य संभावित प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्यों को तेजी से संचालित करना है।

पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी मौसम को लेकर सतर्कता

चक्रवात अर्नब के प्रभाव से पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भी बारिश दर्ज की गई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। वहीं, झारखंड में भी प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। रांची समेत कई जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल बंद रखने का आदेश दिया गया है। अलग-अलग राज्यों में प्रशासन मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुरूप स्थिति पर नजर रख रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे समुद्र तटों, जलभराव की आशंका वाले स्थानों और अन्य जोखिम वाले इलाकों से दूर रहें तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

तूफान के बाद भी जारी रह सकता है खतरा

चक्रवात अर्नब के तट पार करने के बाद भी बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव बने रहने की आशंका है। ऐसे में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ यातायात, चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आश्रय स्थलों, चिकित्सा दलों, एंबुलेंस और आपदा प्रबंधन टीमों की तैयारी के बीच प्रशासन का मुख्य जोर लोगों को सुरक्षित रखने पर है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें, बिना जरूरत घरों से बाहर न निकलें और प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा टालें। चक्रवात की स्थिति को देखते हुए आने वाले घंटों में तटीय जिलों के मौसम और यातायात व्यवस्था पर विशेष नजर बनी रहेगी।