erere | Source: ereनई दिल्ली। भारत में इस साल के पहले संभावित चक्रवाती तूफान को लेकर मौसम की गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में इसके और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) या अन्य मौसम विशेषज्ञों की ओर से यह ठोस तौर पर नहीं कहा गया है कि यह सिस्टम निश्चित रूप से चक्रवाती तूफान में बदलेगा। यदि यह चक्रवाती तूफान का रूप लेता है, तो इसका नाम ‘अर्नब’ रखा जाएगा।

बंगाल की खाड़ी में सिस्टम ने बदली दिशा, अब और मजबूत होने के संकेत

मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुंच चुका है। मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ इसके धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि 22 सितंबर को यह सिस्टम दबाव के क्षेत्र में बदल सकता है, जबकि इसके बाद 23 सितंबर तक इसके गहरे दबाव के क्षेत्र यानी डीप डिप्रेशन में तब्दील होने के आसार हैं।

मौसम की इस गतिविधि पर फिलहाल लगातार नजर रखी जा रही है। सिस्टम की दिशा, इसकी तीव्रता और समुद्र के ऊपर इसके आगे के विकास के आधार पर आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

चक्रवात बना तो ‘अर्नब’ होगा नाम

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय इस मौसमी सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके संभावित चक्रवाती तूफान में बदलने की है। यदि निम्न दबाव का क्षेत्र आगे चलकर चक्रवाती तूफान में परिवर्तित होता है, तो इसे ‘अर्नब’ नाम दिया जाएगा। हालांकि, वर्तमान स्थिति में इसे चक्रवाती तूफान घोषित नहीं किया गया है और इसके लिए सिस्टम के और मजबूत होने तथा निर्धारित मानकों को पूरा करने की स्थिति का इंतजार करना होगा।

उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा पर सबसे ज्यादा नजर

मौसम प्रणाली का संभावित प्रभाव उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों पर दिखाई दे सकता है। इसके प्रभाव का दायरा पश्चिम बंगाल तक भी पहुंचने की संभावना जताई गई है। तटीय क्षेत्रों में घने बादल और तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।

स्काईमेट के अनुमान के अनुसार, जब यह सिस्टम उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों की ओर बढ़ेगा, तब यह गहरे दबाव और चक्रवाती तूफान के बीच की स्थिति में हो सकता है। ऐसी परिस्थिति में आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना में बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।

23 सितंबर के आसपास लैंडफॉल की संभावना

मौसम एजेंसी ने इस मौसमी सिस्टम के 23 सितंबर के आसपास लैंडफॉल करने की संभावना जताई है। हालांकि, दबाव का क्षेत्र बनने और उसके बाद सिस्टम की वास्तविक दिशा तथा ताकत स्पष्ट होने पर इसके संभावित लैंडफॉल और प्रभाव को लेकर अधिक सटीक जानकारी सामने आ सकेगी।

अनुमान है कि 27 सितंबर तक कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। तेलंगाना, दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ जलभराव जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई है।

मध्य प्रदेश से बिहार तक बारिश का असर

बंगाल की खाड़ी के इस नए मौसमी सिस्टम के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू हो चुका है। सोमवार से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अलग-अलग राज्यों में हो रही बारिश का इस नए सिस्टम से सीधा संबंध कितना है।

स्काईमेट के पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में भी भारी बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई गई है।

ओडिशा में पहले से जारी है मौसम को लेकर चेतावनी

ओडिशा में इस मौसमी सिस्टम को लेकर पहले से ही निगरानी बढ़ा दी गई है। 18 सितंबर को भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की प्रमुख मनोरमा मोहंती ने कहा था कि कम दबाव वाले क्षेत्र के धीरे-धीरे गहराने और अगले तीन-चार दिनों के दौरान दक्षिण ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ने की संभावना है।

मनोरमा मोहंती ने यह भी कहा था कि मौसम प्रणाली को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, यदि यह तंत्र आगे और गहराता है तो भारत मौसम विज्ञान विभाग उचित समय पर लोगों को इसकी जानकारी देगा। उन्होंने यह भी बताया था कि 22 सितंबर से दक्षिण ओडिशा में तेज बारिश की गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।

25 सितंबर तक कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने ओडिशा के कई जिलों में 25 सितंबर तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है। दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहे सिस्टम के कारण तटीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता और मौसम प्रणाली की दिशा पर लगातार निगरानी जरूरी होगी।

अभी चक्रवात की पुष्टि नहीं, आगे की स्थिति पर नजर

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव का क्षेत्र निश्चित रूप से चक्रवाती तूफान बनेगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में इसके दबाव और फिर गहरे दबाव के क्षेत्र में मजबूत होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। सिस्टम के समुद्र के ऊपर आगे बढ़ने के साथ इसकी ताकत, दिशा और संभावित प्रभाव को लेकर तस्वीर अधिक साफ होगी।