नई दिल्ली। नागरिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे विवाद के बीच CJP के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने विदेशी फंडिंग के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को खुली चुनौती दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि CJP के नेताओं को विदेश से पैसा मिल रहा था तो केंद्रीय मंत्री उनसे मुलाकात क्यों कर रहे थे? उनके साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे और बातचीत क्यों कर रहे थे? रांका ने आरोप लगाया कि सरकार के पास देश की वास्तविक समस्याओं का जवाब नहीं है, इसलिए बार-बार पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से फंडिंग मिलने जैसे पुराने आरोपों को दोहराया जा रहा है। इस पूरे मामले ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है।
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर रांका का सीधा सवाल- हमारे साथ हाथ क्यों मिला रहे थे?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से CJP के नेताओं पर विदेश से आर्थिक सहायता मिलने के आरोप लगाए जाने के बाद आशुतोष रांका ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जितेंद्र सिंह से पूछा जाना चाहिए कि यदि संगठन के नेताओं को विदेशी फंडिंग मिल रही थी तो वह उनसे संपर्क क्यों बनाए हुए थे?
रांका ने सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री उनके साथ हाथ क्यों मिला रहे थे, उनसे बातचीत क्यों कर रहे थे और उनके साथ बैठकर चाय पीने तथा नाश्ता करने की जरूरत क्यों महसूस कर रहे थे? उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब जितेंद्र सिंह को देना चाहिए। रांका के इस बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि एक तरफ संगठन के नेताओं पर विदेशी फंडिंग के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ उन्हीं नेताओं के साथ बातचीत और मुलाकातें भी की जा रही थीं। उन्होंने इसे लेकर केंद्रीय मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा।
सरकार के पास देश की समस्याओं का जवाब नहीं, 12 साल पुराने एजेंडे का लगाया आरोप
आशुतोष रांका ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में कई महत्वपूर्ण समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन सरकार के मंत्री उन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय बार-बार विदेशी फंडिंग के आरोपों को सामने ला रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से फंडिंग मिलने संबंधी दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही पुराना और घिसा-पिटा एजेंडा है, जिसे पिछले 12 वर्षों से दोहराया जा रहा है।
रांका ने दावा किया कि जब CJP का आंदोलन शुरू हुआ था, तब भी संगठन को लेकर इसी तरह के आरोप लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय यह दावा किया गया था कि देश में CJP के 95 प्रतिशत खाते पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास देश की समस्याओं को लेकर कोई ठोस जवाब क्यों नहीं है। उनके मुताबिक, बार-बार विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठाने के बजाय सरकार को उन सवालों का जवाब देना चाहिए, जिनसे आम जनता प्रभावित हो रही है।
वोट चोरी, ज्ञानेश कुमार और पेपर लीक पर भी सरकार को घेरा
CJP के सह-संस्थापक ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया और देश की दूसरी गंभीर समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में कथित वोट चोरी क्यों हो रही है और सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव क्यों कर रही है? रांका ने पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इन समस्याओं का कोई जवाब नहीं है। उनके अनुसार, देश में युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती है और परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर जवाब देने के बजाय सरकार विदेशी फंडिंग का मामला उठाकर चर्चा को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश कर रही है। रांका ने एक बार फिर जितेंद्र सिंह की मुलाकातों का जिक्र करते हुए पूछा कि यदि CJP के नेताओं को विदेशी स्रोतों से पैसा मिल रहा था तो मंत्री उनके साथ बैठकर बातचीत और चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने क्या लगाए थे आरोप?
दरअसल, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि अभिजीत दीपके को अमेरिका से और आशुतोष रांका को पाकिस्तान से फंडिंग मिली है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि पाकिस्तान के नेताओं सहित भारत विरोधी संगठन और विदेश से आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले समूह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को आर्थिक मदद दे रहे हैं। उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले कुछ लोगों पर झूठा नैरेटिव तैयार करने का आरोप भी लगाया था। मंत्री के इन दावों के बाद CJP से जुड़े नेताओं ने पलटवार शुरू कर दिया और विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर सरकार से सवाल पूछे।
हालांकि, विदेशी फंडिंग को लेकर दोनों पक्षों की ओर से किए गए दावे और आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं। इन आरोपों के समर्थन में किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी इस खबर में नहीं दी गई है।
अभिजीत दीपके ने भी उठाए सवाल, सौरव की फंडिंग पर मांगा जवाब
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के आरोपों पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से सवाल उठाया कि सौरव को कहां से फंडिंग मिल रही है?
दीपके ने एक अन्य पोस्ट में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पर निशाना साधते हुए धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटवाने के लिए कथित विदेशी फंडिंग में से कमीशन लेने को लेकर सवाल किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आखिर बातचीत की मेज पर जितेंद्र सिंह ही मौजूद थे।
दीपके के इन सवालों ने विवाद को और आगे बढ़ा दिया है। अब इस मामले में केवल विदेशी फंडिंग के आरोप ही नहीं, बल्कि संबंधित नेताओं के बीच हुई मुलाकातों और बातचीत को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर लगाया फंडिंग का आरोप
इस राजनीतिक विवाद में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने CJP को विदेशी संगठनों से फंडिंग मिलने के आरोपों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि CJP के कार्यकर्ताओं ने खुद कहा है कि उन्हें विदेशी स्रोतों से नहीं, बल्कि भाजपा से चुनावी बॉन्ड के माध्यम से पैसा मिला है। महुआ मोइत्रा ने कहा कि CJP के आशुतोष रांका, सौरव और अन्य सदस्यों ने भाजपा से फंड मिलने की बात कही है। उन्होंने तंज कसते हुए दावा किया कि भाजपा ही संगठन को आर्थिक सहायता दे रही है।
महुआ मोइत्रा के इस बयान ने विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। एक ओर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने CJP के नेताओं को पाकिस्तान और अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर ही संगठन को आर्थिक मदद देने का दावा किया है।
विदेशी फंडिंग के आरोपों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी
CJP के नेताओं पर विदेशी फंडिंग के आरोपों के बाद शुरू हुआ विवाद अब भाजपा, कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक विमर्श और तृणमूल कांग्रेस तक पहुंच गया है। आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मुलाकातों पर सवाल उठाए हैं, जबकि अभिजीत दीपके और महुआ मोइत्रा ने भी अलग-अलग आरोपों के जरिए भाजपा को घेरा है।
इस पूरे मामले में विदेशी फंडिंग के आरोप, चुनावी बॉन्ड, SIR का विरोध और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि विदेशी फंडिंग के दावों को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है और इन आरोपों पर संबंधित पक्ष क्या प्रमाण सामने रखते हैं।
