ere | Source: rereनई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि महिला पत्रकारों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब तक संज्ञान क्यों नहीं लिया गया।

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर उठाया सवाल

प्रियंका गांधी वाद्रा ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज कर रही महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। प्रियंका ने दावा किया कि दर्जनों पत्रकारों के विरोध के बावजूद न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने पुलिस के कथित अभद्र व्यवहार की शिकायत की है। उनके मुताबिक, जिस पुलिस की जिम्मेदारी महिलाओं को सुरक्षा देने की है, अगर उसी से महिलाएं खतरा महसूस करने लगें तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

‘क्या महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?’

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सीधे सवाल करते हुए कहा, “नरेन्द्र मोदी जी, अमित शाह जी, क्या महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? अगर नहीं, तो आप इस पर संज्ञान क्यों नहीं लेते?”

प्रियंका ने अपने बयान में महिला सुरक्षा को व्यापक मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि कॉलेज की छात्राओं से लेकर पत्रकारों तक महिलाएं अलग-अलग जगहों पर असुरक्षा का सामना कर रही हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले पर ध्यान देने की मांग की।

तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप

एक अधिकारी के अनुसार, तीन महिला पत्रकारों ने 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

अधिकारी ने बताया कि इस मामले में नई दिल्ली जिला पुलिस को शिकायतें मिली हैं। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को भेज दिया गया है। अब अपराध शाखा इन आरोपों की जांच करेगी।

एक महिला पत्रकार ने ACP पर लगाया आरोप

शिकायत करने वाली महिला पत्रकारों में से एक ने शनिवार को आरोप लगाया था कि एक सहायक पुलिस आयुक्त यानी ACP ने कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया। यह आरोप प्रदर्शन की कवरेज के दौरान हुई कथित घटनाओं को लेकर लगाया गया है।

अधिकारी के अनुसार, मामले में मिली शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को भेजा गया है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने शिकायतें अपराध शाखा को भेजीं

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, नई दिल्ली जिला पुलिस को प्रदर्शन के दौरान कथित घटनाओं से संबंधित शिकायतें मिली थीं। चूंकि मामले में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के उद्देश्य से शिकायतों को अपराध शाखा के पास भेजा गया है।

अपराध शाखा अब शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी जानकारी लेगी। जांच के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

भारतीय प्रेस परिषद ने भी जताई चिंता

इस मामले पर भारतीय प्रेस परिषद ने भी प्रतिक्रिया दी है। परिषद ने प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर हैरानी और चिंता जताई। साथ ही दिल्ली पुलिस से शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया।

मामले में महिला पत्रकारों की शिकायतें, राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं और पुलिस की जांच अब आगे की कार्रवाई के केंद्र में हैं। फिलहाल अपराध शाखा की जांच के बाद ही आरोपों को लेकर विस्तृत स्थिति सामने आएगी।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर नजर

महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों ने ऐसे समय में राजनीतिक रंग ले लिया है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पहले से राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। प्रियंका गांधी के बयान ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के जवाबदेही के सवाल से जोड़ दिया है।

वहीं, पुलिस की ओर से शिकायतों को अपराध शाखा को भेजे जाने के बाद अब जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायतकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाने के बाद ही घटनाओं से जुड़े तथ्यों की तस्वीर स्पष्ट होगी।