rer | Source: ereपटना। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मोकामा विधायक अनंत सिंह और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी अब पार्टी के लिए चुनौती बनती दिख रही है। दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की जिम्मेदारी को लेकर केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने साफ कर दिया है कि वह किसी के व्यक्तिगत विवाद में नहीं पड़ना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोनों नेता खुद समझौते के लिए तैयार होते हैं तो वह सुलह कराने में मदद कर सकते हैं।


ललन सिंह ने शनिवार को लखीसराय के घोषेठ में एक सभा को संबोधित करते हुए बिना किसी नेता का नाम लिए अपने रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह झगड़ों में पड़ने के बजाय विकास के काम में विश्वास रखते हैं। उनका कहना था कि उन्होंने अपने गांव तक में कभी किसी का झगड़ा सुलझाने की जिम्मेदारी नहीं ली है।

ललन सिंह बोले- मैं किसके पक्ष में रहूंगा?

सभा में ललन सिंह ने कहा कि गांव में बहुत से लोग आपस में विवाद करते हैं और उनके पास भी आते हैं, लेकिन वह किसी के बीच में नहीं पड़ते। उन्होंने कहा कि सभी लोग उनके वोटर हैं, इसलिए वह किसी एक पक्ष की पैरवी कैसे कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "आज तक गांव में किसी झगड़े को प्रोत्साहन नहीं दिया। गांव में बहुत लोग झगड़ते हैं। मेरे पास आते हैं। हम कभी किसी के बीच में नहीं पड़ते हैं। सब लोग हमारे वोटर हैं। हम किसके पक्ष में रहेंगे? आपकी पैरवी कर दें, तो वो भी आएगा और उसकी भी पैरवी करना मेरा फर्ज है।"

ललन सिंह के इस बयान से यह साफ संकेत मिला कि वह अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद में सीधे तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के खुद तैयार होने की स्थिति में उन्होंने समझौता कराने की संभावना से इनकार नहीं किया।

संजय झा ने कहा था- ललन सिंह को मिली है जिम्मेदारी

अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद के बीच जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दो दिन पहले कहा था कि ललन सिंह इस मामले को देख रहे हैं। संजय झा के मुताबिक, विवाद ललन सिंह के मुंगेर लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और इसी वजह से पार्टी ने उन्हें दोनों नेताओं से बातचीत करने के लिए अधिकृत किया है।

संजय झा ने दोनों नेताओं के बीच जल्द सुलह होने की संभावना भी जताई थी। लेकिन अब ललन सिंह के बयान ने इस मामले में पार्टी के स्तर पर होने वाली संभावित मध्यस्थता को लेकर तस्वीर बदल दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह तभी किसी समझौते की कोशिश करेंगे, जब दोनों पक्ष इसके लिए तैयार होंगे।

बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच खुलकर सामने आया विवाद

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हो रहे चुनाव के दौरान खुलकर सामने आया है। पटना स्नातक एमएलसी सीट पर जेडीयू ने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी चुनाव को लेकर अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ खुला विरोध शुरू कर दिया है।

मोकामा विधायक अनंत सिंह का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनके खिलाफ साजिश की थी। इसी वजह से वह इस बार उन्हें हराने के लिए उनके विरोध में खड़े हैं। अनंत सिंह का रुख पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।

नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह ने किया जन सुराज उम्मीदवार का समर्थन

जेडीयू की ओर से नीरज कुमार को दोबारा विधान परिषद चुनाव का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अनंत सिंह ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह को समर्थन दिया है।

अनंत सिंह ने अनुज सिंह के नामांकन के दौरान रोड शो में हिस्सा लिया था। इसके बाद शनिवार को नवादा में आयोजित आशीर्वाद यात्रा के दौरान उन्होंने अनुज सिंह के लिए वोट भी मांगा। इस तरह उनका विरोध केवल बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह चुनावी मैदान में पार्टी के उम्मीदवार के मुकाबले दूसरे प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

जेडीयू के भीतर की खींचतान ने बढ़ाई पार्टी की चिंता

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच जारी विवाद ने जेडीयू के अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। एक ओर पार्टी ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के ही विधायक अनंत सिंह उनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

इस स्थिति से पार्टी के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों तरह की चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव के दौरान नेताओं के बीच खुली खींचतान से पार्टी की एकजुटता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी नेतृत्व की ओर से बातचीत की कोशिशों की चर्चा भी सामने आई है।

नीतीश कुमार की भी मामले पर नजर

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बढ़ते विवाद पर जेडीयू नेतृत्व की नजर बनी हुई है। बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के प्रमुख नेता नीतीश कुमार भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। पार्टी के भीतर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।

ललन सिंह के ताजा बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सुलह की कोई पहल आगे बढ़ती है या नहीं। फिलहाल ललन सिंह ने अपनी भूमिका को दोनों नेताओं की सहमति से ही जोड़ दिया है और किसी एक पक्ष की ओर से विवाद में हस्तक्षेप करने से दूरी बना ली है।

सुलह की गेंद अब दोनों नेताओं के पाले में

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद के बीच ललन सिंह ने साफ कर दिया है कि वह किसी पक्ष के दबाव में मध्यस्थता नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि दोनों नेता खुद बातचीत और समझौते के लिए तैयार होते हैं, तभी वह इस दिशा में कोई पहल कर सकते हैं। ऐसे में जेडीयू के भीतर चल रही इस राजनीतिक खींचतान का अगला कदम अब काफी हद तक दोनों नेताओं के रुख पर निर्भर करता है।

बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच सामने आए इस विवाद ने जेडीयू के भीतर मतभेदों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ललन सिंह के बयान से फिलहाल यह स्पष्ट है कि वह विवाद में सीधे उतरने के बजाय दोनों पक्षों की सहमति का इंतजार करेंगे। अब नजर इस बात पर है कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच कोई समझौते की राह निकलती है या विवाद चुनाव तक इसी तरह जारी रहता है।