नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में ऐसा इतिहास रचा है, जिसका इंतजार देश को 44 साल से था। शुक्रवार को खेले गए फाइनल में भारत ने चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने न केवल एशियाई खेलों में लंबे अंतराल के बाद गोल्ड मेडल जीता, बल्कि लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए भी सीधे क्वालीफाई कर लिया।
सिर्फ एक गोल ने बदल दिया इतिहास, लालरेम्सियामी बनीं जीत की नायिका
भारत और चीन के बीच खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए। मैच का एकमात्र गोल 10वें मिनट में लालरेम्सियामी ने किया। साक्षी राणा से गेंद मिलने के बाद लालरेम्सियामी ने रिवर्स स्टिक से गेंद को गोल के ऊपरी हिस्से में पहुंचा दिया। चीन की गोलकीपर को इस तेज हमले पर प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
200वां अंतरराष्ट्रीय मैच और उसी दिन ऐतिहासिक गोल
लालरेम्सियामी के लिए यह मुकाबला कई मायनों में यादगार रहा। वह अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही थीं और इसी मुकाबले में उन्होंने भारत के लिए निर्णायक गोल किया। उनका यह गोल पूरे फाइनल में भारत की बढ़त का आधार बना रहा और अंत तक चीन भारतीय रक्षा को भेद नहीं सका।
सविता ने पेनल्टी स्ट्रोक रोककर भारत को बचाया
भारत की बढ़त के बाद चीन ने लगातार दबाव बनाने की कोशिश की। 24वें मिनट में लालरेम्सियामी की गलती के बाद चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला। उस समय मुकाबला भारत के हाथ से निकल सकता था, लेकिन अनुभवी गोलकीपर सविता ने अपने बायीं ओर डाइव लगाकर शानदार बचाव किया। उनके इस बचाव ने चीन को बराबरी करने का मौका नहीं दिया।
भारतीय डिफेंस ने चीन के हमलों को लगातार किया नाकाम
चीन ने मैच के दौरान कई बार भारतीय गोल पर दबाव बनाया, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने संयम बनाए रखा। इशिका चौधरी, बलजीत कौर और सुशीला चानू ने चीनी खिलाड़ियों को खुलकर हमला करने से रोका। गोलकीपर सविता के साथ बिछू देवी ने भी भारतीय रक्षा को मजबूती दी। चीन के लगातार हमलों के बावजूद भारत ने अपनी 1-0 की बढ़त को अंतिम सीटी तक सुरक्षित रखा।
44 साल बाद फिर एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी का स्वर्ण
भारतीय महिला हॉकी टीम ने इससे पहले 1982 में दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उस समय एशियाई खेलों में पहली बार महिला हॉकी को शामिल किया गया था। इसके बाद भारत को फिर स्वर्ण पदक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। भारतीय टीम 1998 और 2018 में फाइनल तक पहुंची, लेकिन दोनों मौकों पर उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
चीन को हराकर सीधे लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पहुंचा भारत
एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक भारतीय टीम के लिए ओलंपिक क्वालीफिकेशन भी लेकर आया। चीन को फाइनल में 1-0 से हराने के साथ भारत ने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 का टिकट हासिल कर लिया। पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाने के बाद भारतीय टीम ने इस जीत के साथ अगले ओलंपिक अभियान की राह साफ कर ली।
उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19 गोल से शुरू हुआ था अभियान
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन शुरुआत से ही प्रभावशाली रहा। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराकर की। इसके बाद इंडोनेशिया के खिलाफ टीम ने 17-1 और थाईलैंड के खिलाफ 20-1 से जीत दर्ज की।
सिंगापुर को 7-0 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत
पूल बी के अंतिम लीग मुकाबले में भारतीय टीम ने सिंगापुर को 7-0 से हराया। इस जीत के साथ भारत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में भारतीय महिला हॉकी टीम का सामना दक्षिण कोरिया से हुआ, जहां उसने 2-0 से जीत दर्ज कर आठ साल बाद एशियाई खेलों के फाइनल में प्रवेश किया।
फाइनल से पहले भी चीन के खिलाफ भारत ने दिखाया था दम
भारत और चीन की टीमें हाल के समय में कई अहम मुकाबलों में आमने-सामने रही हैं। पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित विश्व कप के ग्रुप चरण में भारत ने चीन को 2-2 की बराबरी पर रोक दिया था। इसके बाद एशियन गेम्स के फाइनल में भारत ने चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मैच शुरू होने में हुई करीब एक घंटे की देरी
भारत और चीन के बीच स्वर्ण पदक का मुकाबला निर्धारित समय से देर से शुरू हुआ। टीम बसों के यातायात में फंसने के कारण मुकाबले के समय में बदलाव हुआ और मैच करीब एक घंटे की देरी से शुरू हुआ। मुकाबला पहले साढ़े तीन बजे शुरू होना था, लेकिन बाद में इसे 4:15 बजे शुरू किया गया।
जापान ने जीता कांस्य, चीन के खाते में आया रजत
फाइनल में भारत से हारने के बाद चीन को रजत पदक मिला। वहीं कांस्य पदक के मुकाबले में जापान ने शूटआउट में दक्षिण कोरिया को हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। इस तरह महिला हॉकी प्रतियोगिता में भारत स्वर्ण, चीन रजत और जापान कांस्य पदक के साथ पोडियम पर रहे।
2026 में भारतीय महिला हॉकी का शानदार सफर
भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए 2026 का साल खास रहा है। टीम ने एफआईएच नेशंस कप जीतकर प्रो लीग में वापसी की। इसके बाद नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित विश्व कप में भारत ने पांचवां स्थान हासिल किया। यह 1974 के बाद विश्व कप में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। विश्व कप में भारतीय टीम ने ग्रुप चरण में दुनिया की चौथे नंबर की टीम चीन को 2-2 से ड्रॉ पर रोका था।
विश्व कप में 11 खिलाड़ियों का था पहला अनुभव
विश्व कप में भारतीय टीम की खास बात यह भी रही कि उसके 11 खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप था। पूरे टूर्नामेंट में भारत को केवल एक मुकाबले में हार मिली और सह-मेजबान नीदरलैंड ने उसे 0-2 से हराया। इसके बाद टीम ने एशियन गेम्स में अपने प्रदर्शन को और मजबूत किया और आखिरकार चीन को फाइनल में हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।
भारत-चीन के बीच अब तक बराबरी की टक्कर
एशियाई हॉकी में भारत और चीन के बीच मुकाबले हमेशा कड़े रहे हैं। दोनों टीमों के बीच अब तक 29 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें भारत और चीन ने 12-12 मैच जीते हैं, जबकि पांच मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में भी दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन लालरेम्सियामी के शुरुआती गोल और भारतीय रक्षा के शानदार प्रदर्शन ने भारत को ऐतिहासिक जीत दिला दी।
