बस्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार दिवाली का त्योहार छत्तीसगढ़ के बस्तर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के साथ मनाया। नक्सलवाद के प्रभाव के लिए कभी देशभर में चर्चित रहे बस्तर में प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की सफलता की सराहना की और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में हथियार लेकर सक्रिय रहने वाले नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन अब देश को दिमागी नक्सलियों से मुकाबला करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों ने कई राजनीतिक दलों और संगठनों में घुसपैठ कर ली है।
देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त, जवानों को दिया सफलता का श्रेय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर जवानों के साथ दिवाली मनाना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि का पूरा श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों के बलिदान, साहस और समर्पण को दिया।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई में जवानों ने असाधारण बहादुरी दिखाई है। अनेक सुरक्षाकर्मियों ने देश की सुरक्षा और आम नागरिकों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन वीर जवानों के त्याग और समर्पण को सम्मान देने के उद्देश्य से ही वह उनके बीच दिवाली मनाने पहुंचे हैं।
नक्सलियों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए सरकार ने उठाए बड़े कदम
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने नक्सलियों और अलगाववादी संगठनों के वित्त पोषण पर करारा प्रहार करने वाले फैसले लिए हैं। सरकार के इन कदमों से जाली नोटों का नेटवर्क ध्वस्त हुआ और नक्सलियों तथा अलगाववादियों की आपूर्ति शृंखला बाधित हुई।
प्रधानमंत्री ने सीआरपीएफ की सुरक्षा उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 47 वर्षों में पहली बार बीते एक साल के दौरान ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ के किसी जवान की जान नहीं गई। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए सुरक्षा बलों के समर्पण और कार्यक्षमता की सराहना की।
कभी 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद की चपेट में थे
प्रधानमंत्री ने देश में नक्सलवाद के पुराने प्रभाव को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद की चपेट में थे। इन इलाकों में हालात इतने खराब थे कि शाम होते ही जनजीवन ठहर जाता था। लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डरते थे और सामान्य जीवन जीना भी चुनौती बन गया था।
उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी हमला किया। लोगों से उनका मतदान का अधिकार छीन लिया जाता था और कई क्षेत्रों में मतदाता स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाते थे।
पीएम मोदी ने कहा कि बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित देश का एक बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की समस्या से प्रभावित था। हजारों गांवों में रहने वाली करोड़ों की आबादी को नक्सली हिंसा का सामना करना पड़ता था। कई इलाकों में एक साल के दौरान दो-दो हजार तक नक्सली हमले होते थे।
दंतेवाड़ा में 76 जवानों की शहादत का जिक्र, विपक्ष को घेरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुई नक्सली घटनाओं का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इसी इलाके के पास नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इसी वर्ष दंतेवाड़ा में एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।
पीएम मोदी ने कहा कि यह धरती वीर जवानों के रक्त से अभिषिक्त हुई है। नक्सली हिंसा ने यहां सुरक्षा बलों के जवानों के साथ-साथ निर्दोष नागरिकों की भी जान ली। उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व पर हमला करते हुए कहा कि महलों में रहने वाले किसी भी नामदार की सिसकी सुनाई नहीं दी और उनकी आंखों से एक आंसू तक नहीं गिरा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इन घटनाओं के जरिए यह संदेश दिया कि नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में जवानों और निर्दोष नागरिकों ने भारी कीमत चुकाई है। उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।
गरीबी हटाओ के नारों से जो नहीं हुआ, वह 12 साल में करके दिखाया: मोदी
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक गरीबी हटाओ के नारे दिए गए, लेकिन जिन कामों को पहले पूरा नहीं किया जा सका, उन्हें उनकी सरकार ने 12 वर्षों में करके दिखाया है।
उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग नक्सलवाद के प्रभाव और उसके कारण विकास को हुए नुकसान को अच्छी तरह जानते हैं। जिन इलाकों में नक्सलियों का दबदबा था, वहां उनका पहला एजेंडा विकास कार्यों को रोकना होता था। वे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते थे और सरकारी योजनाओं तथा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बाधा डालते थे।
पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलियों ने बच्चों की शिक्षा को भी निशाना बनाया। कई क्षेत्रों में स्कूलों को खुलने नहीं दिया जाता था और जहां स्कूल मौजूद थे, उन्हें आग लगा दी जाती थी। इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन बच्चों को हुआ, जिनका भविष्य शिक्षा और बेहतर अवसरों पर निर्भर था।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं था, बल्कि इसने शिक्षा, विकास, लोकतंत्र और आम नागरिकों के अधिकारों को भी प्रभावित किया।
जंगलों में नक्सली खत्म, अब दिमागी नक्सलियों से मुकाबले की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित हिस्सा दिमागी नक्सलियों को लेकर दिया गया बयान रहा। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा का अंत हुआ है और जंगलों में हथियार लेकर सक्रिय रहने वाले नक्सली समाप्त हो गए हैं, लेकिन देश के सामने अब एक अलग तरह की चुनौती मौजूद है।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि दिमागी नक्सलियों ने कई संगठनों पर कब्जा कर रखा है। उन्होंने कहा कि ये लोग आज भी देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसाने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, कई राजनीतिक दलों और संगठनों में भी ऐसे लोगों ने घुसपैठ कर ली है।
उन्होंने कहा कि अब ऐसे तत्वों को पहचानने और उन्हें परास्त करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने जवानों से कहा कि देश को सुरक्षित रखने के लिए इस चुनौती को समझना और उसका मुकाबला करना जरूरी है।
बस्तर से प्रधानमंत्री का संदेश, जवानों के बलिदान को किया नमन
बस्तर में सीआरपीएफ जवानों के साथ दिवाली मनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा बलों के योगदान को सम्मान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने नक्सलवाद के पुराने प्रभाव, सुरक्षा बलों की उपलब्धियों, दंतेवाड़ा की घटनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने जहां नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता बताया, वहीं दिमागी नक्सलियों को लेकर नई चुनौती का मुद्दा उठाया। उनके बयान में विपक्ष पर राजनीतिक हमला भी साफ दिखाई दिया। कुल मिलाकर बस्तर में जवानों के बीच मनाई गई दिवाली का यह अवसर सुरक्षा बलों के सम्मान के साथ-साथ नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री के कड़े संदेश के रूप में सामने आया।
