ere | Source: ereपटना। बिहार में दिवाली के त्योहार से ठीक पहले सरकारी कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। राज्य के कई विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के बैंक खातों में अक्टूबर महीने का वेतन अब तक नहीं पहुंचा है। हैरानी की बात यह है कि राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की ओर से सख्त निर्देश दिए जाने और छुट्टी के दिन भी सरकारी कार्यालय खोलकर वेतन भुगतान की व्यवस्था करने के आदेश के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। दिवाली से एक दिन पहले यानी 7 नवंबर 2026 की शाम तक कई शिक्षक, पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी कर्मचारी अपने वेतन का इंतजार करते रहे। वेतन भुगतान में देरी के कारण कर्मचारियों के सामने त्योहार की तैयारियों को लेकर आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी राज्य सरकार को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्य सचिव के सख्त आदेश के बावजूद कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन

बिहार सरकार की ओर से दिवाली और छठ पूजा से पहले सभी विभागों के कर्मचारियों को वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए थे। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि त्योहारों से पहले किसी भी विभाग के कर्मचारी का वेतन लंबित नहीं रहना चाहिए। इसके बावजूद कई विभागों में वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। नतीजतन, कर्मचारियों को दिवाली से ठीक पहले भी अपने बैंक खातों में वेतन आने का इंतजार करना पड़ा।

शिक्षा और पुलिस विभाग के कर्मचारियों की बढ़ी परेशानी

वेतन भुगतान में देरी का सबसे अधिक असर शिक्षा और पुलिस विभाग के कर्मचारियों पर दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, इन दोनों विभागों के अधिकांश कर्मचारियों को अक्टूबर महीने का वेतन अब तक नहीं मिला था। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के भी कई कर्मचारी वेतन भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे थे। सरकारी कर्मचारियों के लिए दिवाली का त्योहार महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घर की जरूरतों, खरीदारी और अन्य तैयारियों के लिए वेतन की आवश्यकता होती है। ऐसे में त्योहार से ठीक पहले खाते में पैसा नहीं पहुंचने से कर्मचारियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कई कर्मचारियों के लिए बिना वेतन दिवाली मनाना मुश्किल हो सकता है।

छुट्टी के दिन भी कार्यालय खोलने का दिया गया था आदेश

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वेतन भुगतान में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को समयसीमा के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर शनिवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी सरकारी कार्यालय खोले जाएं, लेकिन दिवाली से पहले सभी कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन पहुंच जाना चाहिए। अधिकारियों को भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने और लंबित मामलों का निपटारा करने को कहा गया था। इसके बावजूद शनिवार शाम तक कई विभागों में वेतन भुगतान नहीं हो पाने की खबर सामने आई। इससे मुख्य सचिव के निर्देशों के पालन और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

आरजेडी ने सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस मामले को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि दिवाली से एक दिन पहले तक सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलना राज्य के लिए असामान्य स्थिति है। आरजेडी ने दावा किया कि इस बार एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल में बड़ी सेंधमारी कर अरबों रुपये के फर्जी वेतन और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए फर्जी भत्तों का घोटाला किया गया है।

HRMS पोर्टल में सेंधमारी और अरबों के कथित घोटाले का दावा

आरजेडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि बिहार के भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों ने एचआरएमएस पोर्टल में कथित तौर पर बड़ी सेंधमारी की है। पार्टी के अनुसार, इसके माध्यम से फर्जी वेतन भुगतान और बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किए गए भत्तों के नाम पर अरबों रुपये का घोटाला किया गया है। पार्टी ने अपने पोस्ट में कहा कि दिवाली से एक दिन पहले तक सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलना बेहद गंभीर मामला है। हालांकि, एचआरएमएस पोर्टल में सेंधमारी और अरबों रुपये के घोटाले से जुड़े आरोप आरजेडी की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जवाब उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

दिवाली से पहले वेतन भुगतान में देरी ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

बिहार में सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य सरकार ने दिवाली और छठ पूजा को देखते हुए विभागों को भुगतान में तेजी लाने का निर्देश दिया था। मुख्य सचिव की सख्ती, छुट्टी के दिन कार्यालय खोलने के आदेश और अधिकारियों की बैठक के बावजूद कई कर्मचारियों के खाते खाली रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। वहीं, आरजेडी ने इस मुद्दे को भ्रष्टाचार के आरोपों से जोड़कर सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अब कर्मचारियों की नजर लंबित वेतन भुगतान पर है, जबकि विपक्ष ने सरकार से इस पूरे मामले में जवाब देने और कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।