कोलकाता। पश्चिम बंगाल में काली पूजा और दीपावली से ठीक पहले कोलकाता के कालीघाट इलाके में हुई एक घटना ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास पर शनिवार तड़के कथित हमले और आसपास के पूजा आयोजनों में तोड़फोड़ के आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। घटना से नाराज ममता बनर्जी ने ऐसी चुनौती दी, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा में बुलडोजर चलाने की हिम्मत है तो उनके ऊपर बुलडोजर चला दिया जाए, लेकिन वे डरने वाली नहीं हैं।
आधी रात को अभिषेक बनर्जी के आवास पर हमला, ममता ने भाजपा को घेरा
ममता बनर्जी के अनुसार, शनिवार तड़के करीब दो बजे उपद्रवियों के एक समूह ने कोलकाता के कालीघाट इलाके में अभिषेक बनर्जी के आवास को निशाना बनाया। आरोप है कि हमलावरों ने परिसर में तोड़फोड़ की और आसपास के क्षेत्र में स्थानीय काली पूजा की तैयारियों में भी बाधा पहुंचाई। घटना के समय इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। काली पूजा और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों से ठीक पहले हुई इस घटना ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की गुंडागर्दी है। उन्होंने कहा कि कालीघाट उनका पारंपरिक क्षेत्र है, जहां से मां काली की पूजा और विसर्जन से जुड़े कई जुलूस निकलते हैं। ऐसे इलाके में आधी रात को पहुंचकर उपद्रव करना और स्थानीय पूजा आयोजनों को बाधित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वर्षों पुरानी काली पूजा की अनुमति रद्द करने का आरोप, नई पूजा को लेकर भी विवाद
ममता बनर्जी ने कालीघाट में पूजा आयोजन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से आयोजित की जा रही पारंपरिक काली पूजा की अनुमति रद्द कर दी गई और उसकी जगह एक नई पूजा आयोजित करने की अनुमति दे दी गई। उनका कहना था कि सड़क के मोड़ पर नई पूजा की अनुमति देकर जानबूझकर पारंपरिक पूजा के रास्ते में बाधा पैदा की गई है।
तृणमूल प्रमुख ने यह भी दावा किया कि बीती रात स्थानीय क्लबों को पूजा से संबंधित कामकाज करने से रोका गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब त्योहार का समय है और लोग धार्मिक आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं, तब इस तरह का व्यवधान क्यों पैदा किया जा रहा है। उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराओं और आयोजनों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
‘बुलडोजर चलाना है तो हमारे शरीर पर चला दो’, ममता की सीधी चुनौती
घटना के बाद मीडिया और अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गुंडागर्दी है और रात के दो-तीन बजे आकर पार्टी कार्यालयों तथा पूजा की तैयारियों में बाधा डालना राजनीतिक विरोध का तरीका नहीं हो सकता।
ममता बनर्जी ने कहा, "यह पूरी तरह से गुंडागर्दी है। लोग रात के 2:00 या 3:00 बजे आकर हमारे पार्टी दफ्तर और पूजा के कामों में खलल डालते हैं। अगर आपमें बुलडोजर चलाने की हिम्मत है, तो आकर हमारे शरीर पर बुलडोजर चला दो, हम डरने वाले नहीं हैं।"
उनका यह बयान सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। ममता बनर्जी ने भाजपा पर विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की एकजुटता से परेशान होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विपक्षी एकता को लेकर भाजपा की नाराजगी इस तरह की घटनाओं के रूप में सामने आ रही है।
कीर्ति आजाद का सनसनीखेज दावा, छह महीने में सातवीं बार अभिषेक पर हमला
इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने भी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले छह महीनों के भीतर अभिषेक बनर्जी पर यह सातवां जानलेवा हमला है। कीर्ति आजाद ने इस घटना को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
कीर्ति आजाद के अनुसार, घटना शनिवार तड़के करीब दो बजे हुई। उस समय अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन का अवसर था। उन्होंने आरोप लगाया कि लाठी-डंडों और पत्थरों से लैस उपद्रवियों ने लगभग 30 से 45 मिनट तक अभिषेक बनर्जी के परिसर में हमला किया। इस दौरान संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और आसपास की छोटी दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई।
उन्होंने कहा कि इस घटना को सामान्य राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। किसी राजनीतिक नेता के आवास और आसपास की संपत्तियों को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है।
पुलिस की कार्रवाई पर कीर्ति आजाद ने उठाए सवाल, लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
कीर्ति आजाद ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन हमलावरों को गिरफ्तार करने के बजाय उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हुए वहां से बाहर निकाला गया। उन्होंने पुलिस की कथित निष्क्रियता को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है।
हालांकि, पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए ये आरोप तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद के बयान पर आधारित हैं। इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कीर्ति आजाद ने भाजपा नेताओं को भी चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा, "जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। अगर कल पासा पलटा तो यही चीज़ आपके साथ भी हो सकती है।"
कालीघाट में बढ़ाई गई पुलिस की तैनाती, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
घटना के बाद कालीघाट इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फुटेज के आधार पर घटना से जुड़े लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
काली पूजा और दीपावली से ठीक पहले हुई इस घटना ने धार्मिक आयोजन, स्थानीय परंपराओं और राजनीतिक टकराव को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला कर पूजा आयोजनों में जानबूझकर बाधा डालने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर कीर्ति आजाद ने अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
त्योहार से पहले बंगाल की सियासत में बढ़ी गर्मी, जांच पर टिकी निगाहें
कालीघाट की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अभिषेक बनर्जी के आवास पर कथित हमले, पारंपरिक काली पूजा की अनुमति को लेकर विवाद और पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों ने मामले को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है। ममता बनर्जी की बुलडोजर वाली चुनौती ने इस विवाद को और सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल पुलिस की जांच और सीसीटीवी फुटेज से सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
