erer | Source: ereनई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत से जुड़े अवमानना मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। केरल प्रदेश कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा खुलकर कांग्रेस के समर्थन में उतर आई हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इस मामले को न्याय का मजाक करार दिया है। महुआ के बयान के बाद न्यायपालिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

महुआ मोइत्रा ने कांग्रेस के समर्थन में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि यह अदालत की अवमानना का मामला नहीं है। उन्होंने इस मुकदमे को झूठा बताते हुए कहा कि यह अपने आप में न्याय का मजाक है।

महुआ मोइत्रा ने कांग्रेस को सलाह दी कि वह इस मामले को मजबूती से लड़ने के लिए अच्छी कानूनी टीम तैयार रखे। उन्होंने अपने संदेश में कांग्रेस का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अब बहुत हो चुका है और पार्टी को इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए।

आखिर किस पोस्ट ने खड़ा कर दिया इतना बड़ा विवाद?

पूरा विवाद 12 अक्टूबर 2026 को केरल प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर प्रकाशित एक पोस्ट से शुरू हुआ था। इस पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाते हुए उनसे इस्तीफा देने की बात कही गई थी।

पोस्ट में कहा गया था कि यदि कानून और व्यवस्था उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को तलाश लिया जाएगा, जो इस स्थिति से निपट सके।

इस टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। याचिका में इसे न्यायपालिका की गरिमा और न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाला बताते हुए अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस को जारी किया कारण बताओ नोटिस

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार न्याय प्रशासन में बाधा डालने का माध्यम नहीं बन सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और उसके अधिकार को कमजोर करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया जाएगा।

कांग्रेस ने अदालत में क्या सफाई दी?

सुप्रीम कोर्ट में केरल कांग्रेस की ओर से दलील दी गई कि विवादित पोस्ट पार्टी के पदाधिकारियों की अनुमति के बिना प्रकाशित किया गया था। जैसे ही पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी मिली, पोस्ट को तत्काल हटा दिया गया।

कांग्रेस ने अदालत के सामने यह भी कहा कि इस मामले में पार्टी बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है। पार्टी की ओर से अपनी गलती स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त करने का अनुरोध किया गया।

माफी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल

कांग्रेस की दलीलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि अदालत इस बात की जांच करेगी कि पेश की गई सफाई केवल कागजों पर लिखे शब्द हैं या वास्तव में दिल से निकली है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले में माफी की गंभीरता और उसके पीछे की मंशा को भी परखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता कोई ऐसा विषय नहीं है, जिसे राजनीतिक सुविधा के हिसाब से देखा जाए। न्यायिक संस्थाओं के प्रति सम्मान और संयम को कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए।

महुआ के बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद

एक ओर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में न्यायपालिका की गरिमा और अधिकारों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है, वहीं दूसरी ओर महुआ मोइत्रा ने कांग्रेस के समर्थन में आवाज उठाकर इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। अब इस मामले में सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और कांग्रेस की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।