ere | Source: ereनई दिल्ली। देश की राजनीति में शनिवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहे टकराव को फिर सुर्खियों में ला दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। खास बात यह रही कि जिस महाभियोग की मांग विपक्ष संसद के भीतर उठा रहा था, उसके लिए अब उसने संसद के बाहर ही एक अलग मंच तैयार कर दिया। इस मॉक संसद में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सत्र की अध्यक्षता की, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया।

खरगे के आवास पर सजी मॉक संसद, विपक्ष ने दिया ‘जन महाभियोग’ का नाम

दिल्ली के 10, राजाजी मार्ग स्थित मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम को विपक्ष ने ‘जन महाभियोग’ नाम दिया। इसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी राजनीतिक और संस्थागत आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से सामने रखना था। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहा है। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सभापति की भूमिका निभाते हुए मॉक संसद की कार्यवाही शुरू कराई।

193 सांसदों ने दिया था नोटिस, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई: खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में दावा किया कि करीब सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव संबंधी नोटिस दिया था। हालांकि, उनके अनुसार इन नोटिसों को खारिज कर दिया गया और उन पर कोई विचार नहीं किया गया। खरगे ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव किसी व्यक्ति के प्रति निजी नाराजगी का परिणाम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक संवैधानिक संस्था की गरिमा, विश्वसनीयता और सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

‘वोटों की चोरी’ का आरोप, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

मॉक संसद को संबोधित करते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि देश में अब वोटों की चोरी की जा रही है और इसके सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) कानून ने ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं, जिनसे चुनाव आयुक्तों को मदद मिल रही है। खरगे ने दावा किया कि दिसंबर 2023 में यह विधेयक उस समय पारित किया गया, जब विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने इस कानून को शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि इसके तहत चुनाव आयुक्तों को व्यापक कानूनी सुरक्षा दी गई है। उनके अनुसार, ऐसी सुरक्षा राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी प्राप्त नहीं है।

2014 के बाद चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप

खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए कई तरह की राजनीतिक रणनीतियां अपनाई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने, राजनीतिक दलों में फूट डालने और निर्वाचित सरकारों को गिराने जैसी गतिविधियां हुईं। इसके अलावा उन्होंने चुनावी बॉन्ड और प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। खरगे का आरोप था कि इन परिस्थितियों का प्रभाव देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ा है। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर भी जताई चिंता

खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करे, ताकि आम नागरिकों का उस पर भरोसा कायम रहे। उन्होंने विशेष रूप से कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के मतदान अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। खरगे ने चिंता जताई कि किसी कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से बिना उचित जानकारी के पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता बनाए रखना केवल किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा विषय है।

गौरव गोगोई की चेतावनी, जनता के सामने जवाबदेही स्वीकार करने की मांग

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने इसे बेहद महत्वपूर्ण जनहित का मामला बताया। गोगोई ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और जनता के सामने अपनी नैतिक जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो जनता उन्हें जवाबदेह बनाने के लिए मजबूर करेगी। इस बयान के जरिए उन्होंने चुनाव आयोग के प्रति विपक्ष की नाराजगी और असंतोष को सार्वजनिक रूप से जाहिर किया।

पवन खेड़ा बोले- यह दिखावटी संसद नहीं, सार्वजनिक महाभियोग है

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस आयोजन को लेकर कहा कि यह कोई दिखावटी संसद नहीं है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सार्वजनिक महाभियोग है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केवल INDIA गठबंधन के नेता ही नहीं, बल्कि नागरिक समाज के सदस्य भी उत्सुक हैं। विपक्ष का कहना है कि इस आयोजन के माध्यम से वह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे मुद्दों पर जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहता है।

बारिश के कारण एक दिन टला कार्यक्रम, 30 अक्टूबर को होनी थी शुरुआत

विपक्षी गठबंधन का यह कार्यक्रम पहले शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे आयोजित किया जाना था। लेकिन दिल्ली में लगातार बारिश होने के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। इसके बाद शनिवार, 31 अक्टूबर को खरगे के आवास पर मॉक संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर बाद करीब 3:47 बजे हुई। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अध्यक्षता संभाली। इसके बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। कार्यक्रम की प्रस्तावित रूपरेखा के अनुसार, INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। अंत में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का समापन संबोधन निर्धारित किया गया था।

अशोक होटल से रामलीला मैदान तक नहीं मिली जगह, खरगे का आवास बना आयोजन स्थल

कांग्रेस के अनुसार, ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम के लिए पहले सरकारी स्वामित्व वाले अशोक होटल में आयोजन की योजना बनाई गई थी। पार्टी का दावा है कि शुरुआत में सहमति मिलने के बावजूद पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अनुमति वापस ले ली गई। इसके बाद रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की संभावना तलाशी गई, लेकिन वहां भी अनुमति नहीं मिली। विपक्ष ने तालकटोरा स्टेडियम, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, मावलंकर हॉल और डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर जैसे स्थानों पर भी आयोजन की संभावना तलाशने की बात कही। हालांकि, कांग्रेस के अनुसार, इन स्थानों पर भी अनुमति या बुकिंग नहीं मिल सकी। पार्टी ने इसके लिए सरकारी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया। आखिरकार मल्लिकार्जुन खरगे के आवास को ही कार्यक्रम का आयोजन स्थल बनाया गया।

क्या इस ‘जन महाभियोग’ से हट जाएंगे मुख्य चुनाव आयुक्त?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विपक्ष ने जिस कार्यक्रम को ‘जन महाभियोग’ नाम दिया, वह संसद की वास्तविक संवैधानिक कार्यवाही नहीं है। यह एक प्रतीकात्मक राजनीतिक आयोजन है, जिसके माध्यम से विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी शिकायतें और आरोप जनता के सामने रखना चाहता है। इस कार्यक्रम में पेश किए गए प्रस्ताव से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संवैधानिक रूप से पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए निर्धारित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। इसलिए इस आयोजन को मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने की कार्रवाई के बजाय विपक्ष की ओर से राजनीतिक दबाव बनाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस तेज करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का यह प्रतीकात्मक आयोजन ऐसे समय हुआ है, जब विपक्ष कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। मल्लिकार्जुन खरगे ने जहां 193 सांसदों के नोटिस खारिज होने का मुद्दा उठाया, वहीं राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। विपक्ष ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सार्वजनिक मंचों पर भी उठाया जाएगा। अब इस पूरे मामले में आगे की राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया पर सभी की निगाहें रहेंगी।