erer | Source: ereबेटा पैदा नहीं कर पाने का आरोप लगाकर एक पति ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया। महिला की दो बेटियां थीं, लेकिन बेटे की चाहत में पति ने उससे रिश्ता खत्म कर लिया। हैरानी की बात यह है कि दूसरी शादी के बाद उसी महिला ने बेटे को जन्म दिया। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया मील ने इस महिला की कहानी साझा करते हुए समाज में आज भी मौजूद बेटे-बेटी के भेदभाव पर सवाल उठाए हैं।

दो बेटियों के जन्म के बाद पति ने दे दिया तलाक

डॉ. प्रिया मील के मुताबिक, पूनम नाम की महिला की पहली शादी से दो बेटियां हैं। उसके पहले पति का मानना था कि पूनम बेटे को जन्म नहीं दे सकती। इसी सोच के चलते उसने महिला को तलाक दे दिया। पूनम के लिए यह दौर बेहद तकलीफ भरा रहा। डॉक्टर ने बताया कि जब महिला ने अपनी जिंदगी की यह कहानी सुनाई तो वह भावुक होकर उनके सामने रो पड़ी।

दूसरी शादी में मिला प्यार और बेटियों को अपनापन

पूनम ने बाद में दूसरी शादी की। डॉ. प्रिया मील बताती हैं कि जब उन्होंने उसके दूसरे पति को दोनों बेटियों के साथ देखा तो उनके व्यवहार में कहीं भी सौतेलेपन का भाव नजर नहीं आया। वह दोनों बच्चियों का जिस प्यार और अपनापन से ध्यान रखते हैं, उससे साफ दिखता है कि एक अच्छा पिता बनने के लिए जैविक रिश्ता ही जरूरी नहीं, बल्कि बच्चों को बराबरी से अपनाना और प्यार देना अधिक महत्वपूर्ण है।

तीसरी सिजेरियन डिलीवरी में बेटे को दिया जन्म

डॉक्टर के अनुसार, हाल ही में पूनम की तीसरी सिजेरियन डिलीवरी हुई, जिसमें उसने बेटे को जन्म दिया। जिस महिला को पहले पति ने यह कहकर छोड़ दिया था कि वह बेटा पैदा नहीं कर सकती, उसी ने दूसरी शादी के बाद बेटे को जन्म दिया। हालांकि, इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बेटे का जन्म नहीं, बल्कि वह सोच है जिसके कारण एक महिला को उसके बच्चे के लिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

बच्चे का लिंग तय करने में महिला की भूमिका नहीं

डॉ. प्रिया मील ने स्पष्ट किया कि बच्चे का लिंग तय करने के लिए महिला को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत है। सामान्य जैविक प्रक्रिया में मां का अंडाणु एक्स (X) गुणसूत्र देता है, जबकि पिता के शुक्राणु से एक्स या वाई गुणसूत्र मिलता है। इसी के आधार पर बच्चे का जैविक लिंग निर्धारित होता है। इसलिए बेटा या बेटी होने के लिए महिला को जिम्मेदार ठहराना न केवल गलत है, बल्कि उसके साथ अन्याय भी है।

डॉक्टर का संदेश है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। एक अच्छे पिता की पहचान इस बात से नहीं होती कि उसके घर बेटा पैदा हुआ है या बेटी, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के कितना प्यार और सम्मान देता है।