ere | Source: ereनई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने उद्योगपति विजय माल्या को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। माल्या को भगोड़ा और धोखेबाज कहे जाने पर राउत ने आपत्ति जताते हुए उन्हें देशभक्त बताया है। अपनी नई किताब 'बोध कीर्तन' में उन्होंने दावा किया है कि विजय माल्या का किसी को धोखा देने का इरादा नहीं था, बल्कि कारोबारी विफलता के बाद परिस्थितियों ने उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया।

'माल्या को करीब से जानता हूं, उनकी छवि गलत बनाई गई'

संजय राउत ने अपनी किताब में लिखा है कि वह विजय माल्या को काफी करीब से जानते हैं। उनके मुताबिक, माल्या खुशमिजाज और उदार स्वभाव के व्यक्ति हैं। राउत ने यहां तक कहा कि माल्या कई नेताओं से ज्यादा देशभक्त हैं। उनका मानना है कि उद्योगपति की आलीशान जीवनशैली के कारण लोगों के बीच उनके बारे में गलत धारणा बन गई।

राउत की यह किताब जल्द ही एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मौजूदगी में जारी की जाएगी। किताब में राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ कई चर्चित हस्तियों और समसामयिक मुद्दों पर उनके विचार भी शामिल हैं।

'कारोबार डूबा तो बैंकों को देना चाहिए था साथ'

विजय माल्या को भगोड़ा कहे जाने पर सवाल उठाते हुए संजय राउत ने अपनी किताब में लिखा है कि जब किंगफिशर एयरलाइंस का कारोबार ठप हो गया और वह बैंकों का कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गए, तब उन्हें सहयोग मिलना चाहिए था। राउत के अनुसार, माल्या को कर्ज माफी की नहीं, बल्कि राहत और सहयोग की जरूरत थी।

उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले एक दशक में कई उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए गए हैं। ऐसे में विजय माल्या के मामले में अलग रवैया अपनाने को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है।

2019 में घोषित हुए थे आर्थिक भगोड़ा

विजय माल्या किंगफिशर एयरलाइंस के बकाया बैंक कर्ज से जुड़े मामलों के बीच मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद मुंबई की एक अदालत ने वर्ष 2019 में उन्हें आर्थिक भगोड़ा घोषित किया था। उनके खिलाफ बैंकों के कर्ज और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों पर भी लिखे विचार

संजय राउत ने अपनी किताब के 'दीपस्तंभ' अध्याय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों का भी विश्लेषण किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषणों को नीरस और ठोस विषयों से दूर बताया है, जबकि गैर-राजनीतिक भाषणों की प्रशंसा की है।

राउत ने वर्ष 2022 में अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान भगवान राम पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का उल्लेख करते हुए उसे भावनाओं और शब्दों से सजा रोशनी का उत्सव बताया। उन्होंने लिखा कि भगवान राम के आदर्श प्रत्येक भारतीय के लिए मार्गदर्शक होने चाहिए।