बनासकांठा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा जिले से विपक्ष को कड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि वह अपनी आखिरी सांस तक देश की जनता की सेवा करते रहेंगे। प्रधानमंत्री का यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हालिया विवादित टिप्पणी के कुछ दिनों बाद आया है। खरगे ने अपने बयान में कहा था, ''मोदी का बाप भी जाएगा।'' इसके बाद प्रधानमंत्री ने जनसभा में अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उनका जीवन देशवासियों की सेवा के लिए समर्पित है और वह जीवन के अंतिम क्षण तक जनता के लिए काम करते रहेंगे। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर अंतरराष्ट्रीय संकट के समय अफवाह फैलाने, किसानों को खाद नहीं मिलने की आशंका जताने और सरकार को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
आखिरी सांस तक जनता की सेवा करता रहूंगा: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपने गृह राज्य गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उन्होंने बनासकांठा जिले के भीलड़ी में 'भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर' का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
उन्होंने कहा, ''जीवन के अंतिम क्षण तक जनता की सेवा में ही जुटा रहूंगा।'' प्रधानमंत्री के इस बयान को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने किसी का नाम लेकर सीधे जवाब देने के बजाय जनता की सेवा को अपने जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य बताया।
देश में संकट आया तो कुछ लोगों ने मनाया जश्न: विपक्ष पर मोदी का हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को देश पर संकट आने पर खुशी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था, तब विरोधियों ने देश में भ्रम फैलाने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री के अनुसार, उस दौरान अफवाहें फैलाई गईं कि किसानों को खाद नहीं मिलेगी और आम लोगों को रसोई गैस यानी एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन इन आशंकाओं के बावजूद सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी।
मोदी ने कहा कि कुछ लोगों को भारत की प्रगति और विकास पसंद नहीं है। वे देश को संकट में देखना चाहते हैं और जब देश मुश्किल परिस्थितियों का सामना करता है तो उन्हें खुशी होती है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
यूरिया का अंतरराष्ट्रीय भाव 3,000 रुपये, भारतीय किसान को 300 रुपये से भी कम में मिल रहा
प्रधानमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों और भारत में किसानों को मिल रही राहत का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया के एक बैग की कीमत लगभग 3,000 रुपये है, जबकि भारतीय किसानों को यह 300 रुपये प्रति बैग से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी तरह डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 5,000 रुपये प्रति बैग बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय किसानों को यही खाद 1,350 रुपये में मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि होने के बावजूद सरकार ने इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, सरकार अतिरिक्त लागत स्वयं वहन कर रही है, ताकि किसानों को खेती के लिए जरूरी खाद उचित कीमत पर मिलती रहे। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय किसानों की जेब पर नहीं पड़ने देना सरकार की प्राथमिकता है।
पीएम-किसान की 24वीं किस्त जारी, छोटे किसानों के खातों में पहुंचे 4.5 लाख करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत छोटे किसानों के बैंक खातों में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने योजना की 24वीं किस्त भी जारी की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहायता देने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार की नीतियों और पांच प्रमुख योजनाओं के माध्यम से किसानों को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिला है या उनकी इतनी बड़ी बचत हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और उन्हें खेती की बढ़ती लागत से राहत मिले।
मीठी क्रांति से 12 साल में दोगुना हुआ शहद उत्पादन, महिला की कमाई का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि क्षेत्र में आय के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए 'स्वीट रिवोल्यूशन' यानी मीठी क्रांति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश में शहद का उत्पादन दोगुना हो गया है।
उन्होंने शहद उत्पादन से जुड़ी एक महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि वह 35 लाख रुपये का शहद बेचती है। प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से बताया कि मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन जैसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों तथा महिलाओं के लिए अतिरिक्त आमदनी के अवसर पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं। मीठी क्रांति के माध्यम से शहद उत्पादन को बढ़ावा देना भी इसी दिशा में किया गया प्रयास है।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली शपथ को किया याद, पूरे हुए सार्वजनिक जीवन के 25 साल
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने गुजरात के साथ अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के संबंधों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2001 में उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस तरह सार्वजनिक जीवन में उनके 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
पुराने दिनों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो, जब मैंने अक्टूबर 2001 में पहली बार शपथ ली थी। आप लोगों ने मुझ पर बहुत प्यार बरसाया... जब गुजरात के लोग मुझे ‘हमारे नरेंद्रभाई’ कहकर बुलाते हैं, तो मेरा सीना गर्व से फूल जाता है।''
उन्होंने अपनी साधारण पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उन्हें सरकारी कार्यालयों और फाइलों की कार्यप्रणाली के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद गुजरात की जनता ने उन पर भरोसा जताया और लगातार अपना स्नेह दिया।
रोडशो से विकास परियोजनाओं तक, बनासकांठा में प्रधानमंत्री के कई कार्यक्रम
गुजरात दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रमों की शुरुआत बनासकांठा में रोडशो के साथ की। इसके बाद वह भीलड़ी पहुंचे, जहां 'भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर' का उद्घाटन किया। उन्होंने 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
इन कार्यक्रमों में विकास कार्यों के साथ कृषि क्षेत्र और पशुपालन से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई। प्रधानमंत्री ने किसानों के हितों, खाद की कीमतों, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया।
जनसेवा के संकल्प के साथ किसानों को राहत का संदेश
बनासकांठा की जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के साथ किसानों के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अपनी आखिरी सांस तक जनता की सेवा करने का संकल्प दोहराया और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद किसानों को खाद पर राहत देने की बात कही। पीएम-किसान की 24वीं किस्त जारी करने, शहद उत्पादन में वृद्धि और गुजरात में अपने 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को याद करने के साथ प्रधानमंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा।
