पटना। बिहार की राजनीति में चर्चित मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को लेकर अहम आदेश जारी करते हुए उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण कर वापस जेल जाने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने उनकी बेटी शिवांगी सिंह की 25 नवंबर को निर्धारित शादी को ध्यान में रखते हुए उन्हें कुछ समय की राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और निर्धारित समय पर आत्मसमर्पण कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है और सरेंडर करने के बाद उन्हें दोबारा जमानत मिल जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 1 दिसंबर तक जेल लौटना होगा
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में मोकामा विधायक अनंत सिंह की जमानत से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
अदालत में अनंत सिंह के वकील ने उनकी बेटी शिवांगी सिंह की 25 नवंबर को होने वाली शादी का हवाला देते हुए कुछ समय की राहत देने की मांग की थी। इस पर अदालत ने शादी को ध्यान में रखते हुए उन्हें 1 दिसंबर तक का समय दिया। इसके बाद उन्हें वापस जेल जाना होगा।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे सुनवाई की जाएगी। अदालत के इस आदेश से स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल अनंत सिंह को निर्धारित समय सीमा के भीतर जेल लौटना होगा।
बेटी की शादी के बाद करेंगे सरेंडर, अनंत सिंह ने किया कोर्ट के आदेश का सम्मान
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह पटना में मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा कि वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और अदालत के निर्देश के अनुसार आत्मसमर्पण कर देंगे।
अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जेल जाने के बाद अदालत से उन्हें दोबारा जमानत मिल जाएगी। विधायक के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अनंत सिंह ने यह भी कहा कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका दावा है कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया।
नीरज कुमार पर अनंत सिंह का गंभीर आरोप, बोले- मुझे केस में फंसा दिया
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनंत सिंह ने जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने ही उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में फंसाने का काम किया है।
अनंत सिंह ने दावा किया कि पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आने पर इस मामले को दिल्ली में चुनौती दिलाई गई। उन्होंने इसके पीछे नीरज कुमार की भूमिका होने का आरोप लगाया।
हालांकि, नीरज कुमार ने अनंत सिंह के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दुलारचंद यादव के पोते का नाम भी नीरज कुमार है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि नीरज जी जिसको आशीर्वाद देंगे, वही जिंदा रहेगा, नहीं तो बाकी सब मर जाएगा।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत को दी गई थी चुनौती
मोकामा के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से 19 मार्च को जमानत मिली थी। इसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था। हालांकि, दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पटना हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय उनके आपराधिक इतिहास पर उचित तरीके से विचार नहीं किया। इसी आधार पर जमानत रद्द करने की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान बिहार सरकार भी पक्षकार के रूप में मौजूद रही। मामले में बिहार सरकार को पहला पक्ष और अनंत सिंह को दूसरा पक्ष बनाया गया है।
सरकार ने हलफनामे में बताए 62 मुकदमे, गंभीर आपराधिक इतिहास का किया उल्लेख
बिहार सरकार ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया था। इसमें अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ दर्ज कुल 62 मुकदमों की जानकारी दी गई थी।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत दर्ज मामलों का जिक्र किया गया। सरकार ने उनके आपराधिक इतिहास को काफी गंभीर बताया। साथ ही अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में आरोपपत्र यानी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
जमानत रद्द करने की याचिका में भी इसी आपराधिक इतिहास को प्रमुख आधार बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इतने गंभीर मामलों को देखते हुए जमानत दिए जाने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
ललन सिंह के नाम पर पत्रकार को टोका, बोले- सम्मान से बात करो
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनंत सिंह का एक और बयान चर्चा में रहा। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को लेकर सवाल पूछे जाने पर वह पत्रकार से नाराज हो गए। उन्होंने पत्रकार से कहा कि ललन सिंह का नाम सम्मान से लिया जाना चाहिए।
अनंत सिंह ने कहा कि ललन नाम के बहुत लोग होते हैं, इसलिए उन्हें ललन बाबू या मंत्री जी कहकर संबोधित करना चाहिए। उन्होंने पत्रकार से कहा कि जिस तरह वह ललन नाम ले रहे हैं, उससे ऐसा लग रहा है जैसे किसी अपने चेले को बुला रहे हों।
इसके अलावा उन्होंने जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार पर भी तंज कसा। गौरतलब है कि नीरज कुमार ने कुछ दिन पहले अनंत सिंह को लेकर टिप्पणी की थी कि जब तक जेल में चना रहेगा, उनका जेल आना-जाना लगा रहेगा। इसके जवाब में अनंत सिंह ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
विधायक की सदस्यता पर भी उठे सवाल, विधानसभा अध्यक्ष ने बताई प्रक्रिया
अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलों के बीच उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। जेडीयू की ओर से उनकी विधायिकी रद्द करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से भी सवाल किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले में उन्हें पत्र मिला है और उन्होंने उसकी समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनंत सिंह को नोटिस भेजा जाएगा और उनका पक्ष जाना जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रेम कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। न्यायालय कोई भी कदम सोच-समझकर उठाता है। उन्होंने कहा कि देश में कानून का राज है और न्यायपालिका न्याय देने का काम करती है।
30 अक्टूबर की तारीख भी चर्चा में, चुनाव के दौरान हुई थी दुलारचंद यादव की हत्या
दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान 30 अक्टूबर को ही उनकी हत्या हुई थी। संयोग से इस घटना के एक साल बाद 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत से संबंधित मामले की सुनवाई हुई और अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
इस मामले में अब बिहार सरकार को चार महीने के भीतर जांच पूरी करनी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को अपनी बेटी की शादी के बाद निर्धारित समय सीमा में जेल लौटना होगा।
अनंत सिंह के सामने अब अगली कानूनी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह के सामने एक बार फिर जेल लौटने की स्थिति बन गई है। बेटी की शादी के लिए मिली मोहलत के बाद उन्हें 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। दूसरी ओर, उन्होंने नीरज कुमार पर राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने का आरोप लगाया है, जबकि नीरज इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। अब इस मामले में बिहार सरकार की जांच और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
