नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शुमार की जाती है, जिसे पास करने का सपना देश के लाखों युवा देखते हैं। हालांकि, अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और सटीक रणनीति के दम पर कुछ ही ऐसे मेधावी छात्र होते हैं जो पहले ही प्रयास में इस मुकाम को हासिल कर लेते हैं। राजस्थान की बेटी और मध्य प्रदेश कैडर की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी सोनिया मीणा (IAS Sonia Meena) की सफलता की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
आईएएस विरासत और दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई
मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली सोनिया मीणा का ताल्लुक एक ऐसे परिवार से रहा है जहां जनसेवा और प्रशासनिक सेवाओं की एक मजबूत परंपरा रही है। उनके पिता टीका राम मीणा 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। पिता के प्रशासनिक सफर और जनसेवा की विरासत से ही सोनिया को बचपन से ही सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा मिली।
अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया। उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से मास्टर डिग्री हासिल की।
बिना कोचिंग सेल्फ-स्टडी के दम पर पहले ही प्रयास में हासिल की ऑल इंडिया रैंक-36
सोनिया मीणा ने कॉलेज के दिनों से ही अपनी यूपीएससी की तैयारी की नींव रखनी शुरू कर दी थी। उन्होंने महंगी कोचिंग का सहारा लेने के बजाय सेल्फ-स्टडी (Self-Study) को अपना मुख्य हथियार बनाया। अपनी बौद्धिक क्षमता और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने साल 2013 की सिविल सेवा परीक्षा के अपने पहले ही प्रयास में इतिहास रच दिया। उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक (AIR) 36 के साथ शानदार सफलता हासिल की और मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी बनीं।
निडर और सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं आईएएस सोनिया मीणा
मध्य प्रदेश कैडर में अपनी सेवा के दौरान सोनिया मीणा ने अपनी एक अलग और निडर अधिकारी के रूप में पहचान बनाई है। नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद) की जिला कलेक्टर के रूप में उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में कई बड़े और सकारात्मक सुधार किए। अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई और कानून के शासन को मजबूती से लागू करने के उनके अंदाज ने उन्हें प्रदेश के सबसे अनुशासित और कड़क अधिकारियों की श्रेणी में ला खड़ा किया। उनकी प्रशासनिक कुशलता को देखते हुए राज्य सरकार ने अप्रैल 2026 में उन्हें वित्त विभाग में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
