गुरुग्राम/फरीदाबाद: हरियाणा में बिजली विभाग के करीब 40 हजार कर्मचारियों के निजीकरण के विरोध में अचानक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पूरा राज्य गहरे बिजली संकट में डूब गया है। प्रदेश के 23 जिलों के लगभग 8 से 10 लाख घरों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति पैदा हो गई है। इसका सबसे भयावह असर आर्थिक और औद्योगिक केंद्र गुरुग्राम तथा फरीदाबाद पर पड़ा है, जहां बिजली-पानी की किल्लत और संचार सेवाएं ठप होने से हाहाकार मच गया है।
इन्वर्टर फेल, वाई-फाई ठप और पानी की बूंद-बूंद को तरसी जनता
निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का यह उग्र प्रदर्शन अब आम नागरिकों के लिए सबसे दुस्वप्न जैसा बन गया है। गुरुग्राम के लगभग 50 प्रतिशत इलाकों और आसपास के 50 से अधिक गांवों में बीते 24 घंटे से बिजली पूरी तरह गायब है। घरों में लगे इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं, पानी की मोटरें न चलने से पेयजल आपूर्ति रुक गई है और वाई-फाई कनेक्शन बंद होने से लोगों का संपर्क टूट गया है। नूंह और आसपास के क्षेत्रों में भी पूरा दिन अंधेरे में बीता, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
सड़कों पर फूटा जनता का गुस्सा, पुलिस के साथ हुई तीखी नोकझोंक
घंटों तक बिजली और पानी न मिलने से आक्रोशित लोग आधी रात को ही सड़कों पर उतर आए। गुरुग्राम की राजेंद्रा पार्क कॉलोनी के निवासियों ने रेलवे रोड पर चक्काजाम कर दिया और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस टीम के साथ भी लोगों की काफी तीखी बहस हुई, जिसके बाद करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत से रास्ता खुलवाया जा सका। उधर, फरीदाबाद के सारन चौक, लखानी चौक, बल्लभगढ़-तिगांव रोड और प्याली चौक पर भी सैकड़ों लोगों ने रास्ता रोककर प्रदर्शन किया।
उद्योगों में उत्पादन 50% गिरा, 10 से अधिक स्कूलों में घोषित हुई छुट्टी
बिजली संकट की गाज अब राज्य की अर्थव्यवस्था और बच्चों की शिक्षा पर भी गिर रही है। फरीदाबाद और गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली न होने से 50 से अधिक फीडर ब्रेकडाउन हो चुके हैं, जिससे फैक्ट्रियों में उत्पादन आधा रह गया है और कई कंपनियों को अपने संचालन पर अस्थायी ताला लगाना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फरीदाबाद के 10 से अधिक निजी और सरकारी स्कूलों ने शुक्रवार को छुट्टी का ऐलान कर दिया और अभिभावकों को मैसेज भेजकर बच्चों को स्कूल न भेजने की सलाह दी है।
