नई दिल्ली। दिल्ली के प्रेस क्लब में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय विवादों में घिर गई, जब मीडिया से बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने अचानक विरोध शुरू कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा) की प्रमुख नेहा बोरा सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में हुई इस घटना के दौरान ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ जैसे नारे सुनाई दिए। हंगामे के बीच अभिजीत दीपके की एक टिप्पणी ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने विरोध कर रहे लोगों को 50-100 रुपये का नोट देकर बाहर करने की बात कही। इस घटना के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल गर्म हो गया और वहां मौजूद पत्रकारों का ध्यान नेताओं के संबोधन से हटकर विरोध कर रहे लोगों की ओर चला गया।
प्रेस क्लब में भाषण के बीच शुरू हुआ विरोध, पत्रकार भी हुए हैरान
दिल्ली के प्रेस क्लब में विभिन्न छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े समूहों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसमें अभिजीत दीपके, नेहा बोरा और अन्य नेता अपनी बात रख रहे थे। कार्यक्रम का उद्देश्य आगामी विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़े मुद्दों पर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखना था। इसी दौरान जब नेहा बोरा अपनी बात रख रही थीं, तभी कुछ लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
पत्रकारों से भरे प्रेस क्लब के लॉन में अचानक ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ जैसी आवाजें गूंजने लगीं। घटनाक्रम इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद पत्रकारों ने पीछे की ओर मुड़कर देखा कि आखिर विरोध कौन कर रहा है और इसकी वजह क्या है। कुछ देर के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस का क्रम बाधित हो गया। नेहा बोरा ने पहले विरोध कर रहे लोगों को शांत कराने की कोशिश की और फिर प्रेस क्लब प्रबंधन से हंगामा करने वालों को बाहर करने की अपील की।
अभिजीत दीपके की 50-100 रुपये वाली टिप्पणी से बढ़ा विवाद
हंगामे के बीच अभिजीत दीपके ने माइक संभाला और विरोध करने वालों की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे के लिए इस तरह का विरोध कर रहे हैं। दीपके ने कहा, ‘इनको 50-100 का नोट दे दीजिए। इसलिए वे आए हैं। प्रेस क्लब वालों से कहता हूं कि इन्हें 50-100 का नोट देकर बाहर कर दीजिए। 50-100 के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं।’
उनकी इस टिप्पणी का सीधा निशाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में विरोध कर रहे लोग थे। दीपके ने अपने बयान के जरिए यह आरोप लगाया कि विरोध के पीछे आर्थिक कारण हो सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में विरोध करने वाले लोगों की पहचान और उनके विरोध के पीछे की वजह की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
इस दौरान नेहा बोरा ने भी स्थिति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों को एक कोने में ऐसा करने दिया जाए और पत्रकार इस घटनाक्रम को कवर करें। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे स्टूडियो में जो सीखते हैं, वही यहां कर रहे हैं। इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं और विरोध कर रहे लोगों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
सौरभ दास और आशुतोष रांका के समर्थन में 16 अक्टूबर को तिरंगा कार्यक्रम
इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के पीछे एक प्रमुख वजह 16 अक्टूबर को दिल्ली के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम का ऐलान था। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका के समर्थन में इस कार्यक्रम के लिए जुटने की घोषणा की है।
सौरभ दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अवैध तरीके से प्रवेश करने और बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सीजेपी ने इसी कार्रवाई के विरोध में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम की घोषणा की। इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने और अपनी बात रखने के लिए विभिन्न छात्र संगठनों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ प्रेस क्लब में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी।
आयोजकों की ओर से इस कार्यक्रम के जरिए गिरफ्तारी और उससे जुड़े घटनाक्रम पर विरोध दर्ज कराने की बात सामने आई। हालांकि, 16 अक्टूबर के कार्यक्रम में कितने लोग शामिल होंगे और प्रशासन की ओर से क्या व्यवस्था रहेगी, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर केंद्र सरकार पर अभिजीत दीपके का तीखा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। दीपके का आरोप था कि ज्ञानेश कुमार केवल अपने राजनीतिक नेतृत्व की बात सुन रहे हैं और उनके बचाव में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘जब से यह खुलासा हुआ है कि ज्ञानेश कुमार किसी की नहीं सुन रहे हैं, सिर्फ अपने पॉलिटिकल मास्टर की सुन रहे हैं। तब से तानाशाह नरेंद्र मोदी ने सिस्टम की सारी मशीनरी ज्ञानेश कुमार को बचाने में लगा दी है।’
दीपके ने अपने संबोधन में दावा किया कि पिछले 10 दिनों से युवा इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें सड़कों पर घसीटा जा रहा है। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हिरासत का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों का नाम भी लिया। उनके मुताबिक, ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हुआ है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
ये सभी आरोप अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए। उपलब्ध विवरण में इन आरोपों पर केंद्र सरकार या संबंधित अधिकारियों का पक्ष शामिल नहीं है।
रेलवे और मेट्रो बंद करने को लेकर भी उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में 10 अक्टूबर से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए रेलवे और दिल्ली मेट्रो की सेवाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के समर्थन में कार्रवाई करते हुए देश में पहली बार रेलवे बंद किए गए और दिल्ली के मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों से सुरक्षा बलों को बुलाया गया। दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने ही लोगों के खिलाफ जंग जैसी स्थिति पैदा कर दी है। उनके बयान में जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के लिए पहुंचे सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल रहा।
दीपके ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जेल में डाल दिया गया और दिल्ली को भारत-पाकिस्तान सीमा जैसी स्थिति में बदल दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार के लिए इतनी सख्ती क्यों की जा रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनसे क्या हासिल हो रहा है। इन बयानों के जरिए उन्होंने सरकार की कार्रवाई को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
विरोध, गिरफ्तारी और राजनीतिक आरोपों के बीच बढ़ा टकराव
दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई इस घटना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आए दो प्रमुख पहलुओं को उजागर किया। एक ओर सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को तिरंगा कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए हंगामे ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया।
अभिजीत दीपके की 50-100 रुपये के नोट वाली टिप्पणी और नेहा बोरा की प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम के प्रमुख हिस्से रहे। वहीं, ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार को लेकर लगाए गए आरोपों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।
फिलहाल, इस घटनाक्रम में विरोध करने वाले लोगों की पहचान और उनके विरोध के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। 16 अक्टूबर को दिल्ली के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित तिरंगा कार्यक्रम के दौरान क्या स्थिति रहती है, इस पर भी नजर रहेगी। प्रेस क्लब में हुआ यह घटनाक्रम राजनीतिक विरोध, सार्वजनिक संवाद और प्रदर्शन के तरीकों को लेकर जारी बहस के बीच सामने आया है।
