erer | Source: ererमुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को कारोबार के दौरान अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद बिकवाली तेज हो गई। इसका असर प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 1,000 अंक से अधिक नीचे फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे पहुंच गया। इस गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। निजी बैंकों के शेयरों में कमजोरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता को बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों के रूप में देखा गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी आई गिरावट?

सोमवार दोपहर करीब 1:35 बजे सेंसेक्स 915 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 73,813 अंक पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सेंसेक्स का उच्चतम स्तर 74,849 अंक और निचला स्तर 73,771 अंक रहा। इस तरह बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली का दबाव काफी बढ़ गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 में भी कमजोरी देखने को मिली। यह सूचकांक 268 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 22,877 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,175 अंक का उच्चतम और 22,861 अंक का निचला स्तर छुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक जैसी गिरावट से बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत मिला। इस गिरावट का असर कंपनियों के कुल बाजार मूल्य पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण लगभग 472 लाख करोड़ रुपये से घटकर 468 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी निवेशकों की कुल संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब 4 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। हालांकि, बाजार पूंजीकरण में आई यह कमी वास्तविक नकद नुकसान के समान नहीं होती, बल्कि शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाती है।

पहली वजह: निजी बैंकों के शेयरों में भारी बिकवाली

शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह निजी बैंकिंग शेयरों में कमजोरी रही। बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन बाजार की दिशा को प्रभावित करता है, क्योंकि प्रमुख बैंक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। जब बड़े बैंकों के शेयरों में गिरावट आती है, तो इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ सकता है। सोमवार को एचडीएफसी बैंक के शेयरों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बैंक के सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर दबाव और मुनाफे की धीमी वृद्धि को लेकर निवेशकों की चिंता सामने आई। शुद्ध ब्याज मार्जिन बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई और ब्याज पर किए जाने वाले भुगतान के बीच के अंतर को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। इसके अलावा बैंक निफ्टी भी करीब 0.5 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी कमजोरी रही। इन शेयरों में करीब 1.72 प्रतिशत से 3.80 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा रही थी। वित्तीय क्षेत्र के प्रमुख शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाने में भूमिका निभाई।

दूसरी वजह: 108 डॉलर के पार कच्चे तेल की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय रहा। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। महंगा कच्चा तेल परिवहन, माल ढुलाई और ऊर्जा से जुड़े खर्चों को बढ़ा सकता है। इससे उन कंपनियों पर विशेष दबाव पड़ सकता है जिनकी लागत में ईंधन की हिस्सेदारी अधिक होती है। यदि कंपनियों की लागत बढ़ती है और वे उसका पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, तो उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से देश के आयात खर्च और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों पर भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों की नजर बनी रहती है।

तीसरी वजह: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत

भारतीय बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक बाजारों की कमजोरी भी एक महत्वपूर्ण कारण रही। एशियाई बाजारों में दबाव के बीच निवेशकों का रुझान जोखिम वाले निवेश से दूर होता दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अक्सर अपने निवेश को लेकर अधिक सतर्क हो जाते हैं, जिसका असर उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में निवेश और बड़े स्तर पर पूंजी की जरूरत को लेकर चिंताओं ने प्रौद्योगिकी शेयरों पर दबाव बढ़ाया। इन कंपनियों के कारोबार में भविष्य की संभावनाओं के साथ-साथ भारी निवेश और उससे मिलने वाले प्रतिफल को लेकर भी बाजार में आकलन किया जाता है। जब वैश्विक स्तर पर निवेशकों की चिंता बढ़ती है, तो वे शेयरों में जोखिम कम करने की कोशिश कर सकते हैं। इसका असर भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और शेयरों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट को केवल वैश्विक संकेतों के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं होता। घरेलू आर्थिक परिस्थितियां और कंपनियों के नतीजे भी बाजार की चाल को प्रभावित करते हैं।

चौथी वजह: इंडिया वीआईएक्स में बढ़ोतरी

बाजार में अनिश्चितता का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स भी सोमवार को बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। इसमें करीब 4 प्रतिशत की तेजी आई और यह 14.52 के स्तर पर पहुंच गया। इंडिया वीआईएक्स को सामान्य तौर पर बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव की आशंकाओं का संकेतक माना जाता है। इसमें तेजी आने का अर्थ है कि निवेशक निकट भविष्य में बाजार में अधिक अस्थिरता की संभावना को लेकर सतर्क हो रहे हैं। हालांकि, वीआईएक्स की बढ़त अपने आप में यह तय नहीं करती कि बाजार आगे गिरेगा ही। यह मुख्य रूप से बाजार की अपेक्षित अस्थिरता और अनिश्चितता के स्तर को दर्शाता है। जब शेयरों में बिकवाली बढ़ती है और साथ ही वीआईएक्स भी ऊपर जाता है, तो निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ सकती है। सोमवार को बाजार की गिरावट के दौरान इस सूचकांक में तेजी ने भी निवेशकों की चिंता को रेखांकित किया।

आगे शेयर बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों का रुख, कंपनियों के तिमाही नतीजे और बैंकिंग शेयरों का प्रदर्शन बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खास तौर पर निजी बैंकों के नतीजों और भविष्य की कमाई को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। इसके अलावा इंडिया वीआईएक्स में होने वाले बदलाव से बाजार में अपेक्षित उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है। यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है और घरेलू शेयरों में खरीदारी लौटती है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने और बिकवाली जारी रहने की स्थिति में दबाव बना रह सकता है। ये संभावनाएं हैं, निश्चित भविष्यवाणियां नहीं। खबर के अनुसार, दशहरा के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार बंद रहेगा। ऐसे में अगले कारोबारी सत्र में बाजार की प्रतिक्रिया पर निवेशकों की नजर रहेगी।

निवेशकों के लिए क्या है अहम संदेश?

सोमवार की गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि शेयर बाजार पर घरेलू कंपनियों के नतीजों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की मनोस्थिति का भी असर पड़ता है। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के साथ बाजार पूंजीकरण में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज हुई, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक निवेशक को समान अनुपात में नुकसान हुआ है। वास्तविक लाभ या नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि किसी निवेशक ने कौन से शेयर खरीदे हैं, किस कीमत पर खरीदे हैं और उनमें कितनी गिरावट आई है।